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411 समाचार
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सार्स कोरोनावाइरस

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सार्स कोरोनावाइरस (SARS-CoV) 250x250पिक्सेल|सार्स कोरोनावायरस का सूक्ष्मदर्शी दृश्य विषाणु की जानकारी समूह समूह IV ((+)ssRNA) गण निडोविरालेस (Nidovirales) कुल कोरोनाविरिडे (Coronaviridae) वंश बीता-कोरोनावायरस (Betacoronavirus) प्रजाति सार्स-संबंधित कोरोनावायरस सार्स कोरोनावाइरस (SARS-CoV) एक अत्यंत संक्रामक विषाणु है जो मनुष्यों के श्वसन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यह 'सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम' (SARS) नामक रोग का कारक है। कोरोनाविरिडे परिवार का यह सदस्य मुख्य रूप से हवा में मौजूद बूंदों (droplets) के माध्यम से फैलता है।SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) https://www.who.int/health-topics/severe-acute-respiratory-syndrome World Health Organization 19 February 2026 ऐतिहासिक प्रकोप (2002–2003) सार्स का पहला बड़ा प्रकोप नवंबर 2002 में दक्षिणी चीन (गुआंगडोंग प्रांत) में आरंभ हुआ था। जुलाई 2003 तक यह दुनिया के लगभग 26 देशों में फैल गया। इस प्रकोप के दौरान विश्व स्तर पर 8,098 लोग संक्रमित हुए और 774 लोगों की मृत्यु हुई। हांगकांग और चीन इस वायरस से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र रहे थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के त्वरित प्रयासों और क्वारंटीन उपायों के कारण 2004 के बाद से इस विशेष स्ट्रेन का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। सार्स-कोव-2 और कोविड-19 (2019–वर्तमान) दिसंबर 2019 में, चीन के वुहान शहर से कोरोनावायरस का एक नया और अधिक घातक रूप सामने आया, जिसे **सार्स-कोव-2** (SARS-CoV-2) नाम दिया गया। इसने 'कोविड-19' नामक वैश्विक महामारी को जन्म दिया। शुरुआत में इसे केवल निमोनिया जैसा संक्रमण माना गया, लेकिन मार्च 2020 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया। 2020 के शुरुआती अनुमानों की तुलना में इस वायरस का प्रभाव अत्यंत विनाशकारी रहा। वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोग इससे संक्रमित हुए और लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई। भारत में इसका पहला मामला जनवरी 2020 में केरल में दर्ज किया गया था। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील और भारत जैसे देश संक्रमण और मृत्यु दर के मामले में सर्वाधिक प्रभावित रहे। उपचार और टीकाकरण महामारी के शुरुआती दौर में उपचार के लिए 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन' जैसी दवाओं का परीक्षण किया गया था, लेकिन बाद के वैज्ञानिक शोधों में इनकी प्रभावशीलता सीमित पाई गई। 2021 की शुरुआत तक, वैज्ञानिकों ने इस वायरस के खिलाफ प्रभावी टीकों (Vaccines) का विकास कर लिया था। वर्तमान में फाइजर-बायोएनटेक, मॉडर्ना, एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) और कोवैक्सिन जैसे टीके वैश्विक स्तर पर उपलब्ध हैं, जिन्होंने मृत्यु दर और गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम कर दिया है। अब इस वायरस के विभिन्न वेरिएंट्स (जैसे ओमिक्रॉन) के प्रबंधन के लिए 'बूस्टर डोज' और एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जा रहा है।Coronavirus Disease 2019 (COVID-19) https://www.cdc.gov/coronavirus/2019-ncov/index.html Centers for Disease Control and Prevention 19 February 2026 सन्दर्भ श्रेणी:विषाणु श्रेणी:कोरोनावायरस श्रेणी:महामारी