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411 समाचार
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तंत्रिकादौर्बल्य

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thumb|तंत्रिकादौर्बल्य तंत्रिकादौर्बल्य, मन:श्रांति या न्यूरैस्थिनिया (Neurasthenia) शारीरिक और मानसिक थकान की अवस्था है, जिसमें व्यक्ति निरंतर थकान और शक्ति के ह्रास का अनुभव करता है। हिन्दी में इसे 'तंत्रिकावसाद' भी कहते हैं। कारण तंत्रिकादौर्बल्य के मुख्य कारण अत्यधिक शारीरिक परिश्रम, दीर्घकालीन संवेगात्मक तनाव, मानसिक श्रम और चिंता इत्यादि हैं। चाय, काफी तथा मदिरा का अत्यधिक सेवन, इन्फ्लुएंजा, आंत्रिक ज्वर एवं प्रवाहिका (पेचिस) आदि भी इसकी उत्पत्ति और विकास में योग देते हैं। लक्षण इसके लक्षण मुख्यतया दो प्रकार के हैं : (1) शारीरिक तथा (2) मानसिक। शारीरिक लक्षणों के अंतर्गत साधारणतया व्यक्ति को निरंतर शारीरिक क्षीणता, रक्ताल्पता, अनिद्रा, थकान एवं शरीर का भारीपन और विशेष रूप से आमाशय संबंधी विकार, जैसे औदरिक क्लेश आदि, खट्टी डकार आना, कब्ज रहना तथा हृदय संबंधी विकार, जैसे धड़कन इत्यादि का अनुभव होता है। इनके अतिरिक्त अत्यधिक संवेदनशीलता, मेरुदंड के कुछ भागों में वेदना, मांसपेशियों में व्यतिक्रम, पलक, जिह्वा और हाथों में कंपन का भी अनुभव करता है। मानसिक लक्षणों के अंतर्गत व्यक्ति को सिर के अंदर तनाव तथा कुछ रेंगने का अनुभव होता है। सर्वांग वेदना, किसी चीज पर एकाग्रचित्त न हो पाना और अधिक देर तक मानसिक कार्य करने में असमर्थ रहना भी इसके लक्षण हैं। रोगी के स्वभाव में संवेगात्मक अस्थिरता, चिड़चिड़ापन, उदासीनता और शीघ्र घबड़ा जाने की प्रवृत्ति आ जाती है। गंभीर अवस्था में रोगी की संकल्प शक्ति का इतना ह्रास हो जाता है कि वह कई सप्ताह एवं माह तक विश्राम करने पर भी मानसिक तथा शारीरिक शक्ति को पुन: जाग्रत नहीं कर पाता। इस रोग में व्यक्ति को थकावट विशेष प्रकार के श्रमों से ही उत्पन्न होती है, जैसे व्यवसाय संबंधी वार्तालाप इत्यादि। इसमें जो कार्य रोगी को जितना ही अप्रिय होगा, रोगी की थकान तथा मन:श्रांति उतनी ही अधिक होगी। इस रोग में कभी कभी उपद्रव स्वरूप उन्माद की अवस्था उत्पन्न हो जाती है। उपचार मन:श्रांति के स्थायी उपचार के लिये उसके उत्तेजक कारणों का पता लगाना अत्यंत आवश्यक है, जैसे मानसिक, चिंता, विषाक्तता (toxaemia), अथवा आघात। जीर्ण रोगियों के लिये पूर्ण विश्राम, उत्तेजक वातावरण में परिवर्तन तथा मनोनुकूल वार्तालाप आवश्यक हे। उपर्युक्त उपचार के अतिरिक्त रोगी को पौष्टिक आहार एवं दूध, फल आदि का अत्यधिक सेवन करना चाहिए तथा सुबह शाम टहलना एवं हलकी कसरत करना नितांत आवश्यक है। अनिद्रा की अवस्था के लिये मृदु प्रकार की निद्राकारी ओषधियों का सेवन करना उत्तम है। अन्य उपचार मनोवैज्ञानिक चिकित्सा के अंतर्गत करना चाहिए। पठनीय http://bms.brown.edu/HistoryofPsychiatry/Beard.html An American Treatment for the 'American Nervousness' 2008-09-11 1980 Brown EM American Association of the History of Medicine https://web.archive.org/web/20080907212129/http://bms.brown.edu/HistoryofPsychiatry/Beard.html 7 सितंबर 2008 dead Gijswijt-Hofstra, Marijke Cultures of Neurasthenia: From Beard to the First World War (Clio Medica 63) (Clio Medica) Rodopi Bv Editions 2001 90-420-0931-4 Silas Weir Mitchell Weir Mitchell S 1884 Fat and Blood: an essay on the treatment of certain types of Neurasthenia and hysteria Philadelphia J. D. Lippincott & Co. http://www.gutenberg.org/files/16230/16230-h/16230-h.htm 2008-09-11 https://web.archive.org/web/20080920170313/http://www.gutenberg.org/files/16230/16230-h/16230-h.htm 20 सितंबर 2008 live Farmer A, Jones I, Hillier J, Llewelyn M, Borysiewicz L, Smith A Neuraesthenia revisited: ICD-10 and DSM-III-R psychiatric syndromes in chronic fatigue patients and comparison subjects Br J Psychiatry 167 4 503–6 1995 October 8829720 10.1192/bjp.167.4.503 http://bjp.rcpsych.org/cgi/content/abstract/167/4/503 20 अक्तूबर 2009 https://web.archive.org/web/20110719170217/http://bjp.rcpsych.org/cgi/content/abstract/167/4/503 19 जुलाई 2011 dead श्रेणी:मनोविज्ञान