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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर
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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर hi योगः कर्मसु कौशलम्(hi-Latn Yoga Karmasu Kaushālam) Perfection in action is Yoga 150px|IIT Kharagpur's Logo 1951 शिक्षा और शोध संसथान दामोदर आचार्य Madhusudan Chakraborty D Gunasekaran खड़गपुर पश्चिम बंगाल, भारत २१०० एकड़ (8.5 वर्ग किमी) ४५00 (अनुमानित) २५00 (अनुमानित) 470 2403
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर भारत सरकार द्बारा १९५१ में स्थापित अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग) और प्रौद्योगिकी -उन्मुख एक स्वायत्त उच्च शिक्षा संस्थान है। सात आईआईटी में यह सबसे पुरानी है। भारत सरकार ने इसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय महत्त्व का संस्थान माना है और इसकी गणना भारत के सर्वोत्तम इंजीनियरिंग संस्थानों में होती है। आई आई टी खड़गपुर को विभिन्न इंजीनियरिंग शिक्षा सर्वेक्षणों जैसे कि इंडिया टुडे और आउटलुक में सर्वोच्च इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक का स्थान दिया गया है। इंडिया टुडे
http://www.iitbombay.org/misc/press/indiatoday060203.htm
इंडिया टुडे: TOP 10 Colleges - Engineering
इंडिया टुडे – June, 2003 Issue
इंडिया टुडे (mirrored on IIT Bombay website)
2 जून 2003
14 मई 2006
https://web.archive.org/web/20070329141522/http://www.iitbombay.org/misc/press/indiatoday060203.htm
29 मार्च 2007
dead
१९४७ में भारत की स्वाधीनता के बाद आई आई टी खड़गपुर की स्थापना उच्च कोटि के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को प्रसिक्षित करने के लिए हुई थी। इसका संस्थागत ढांचा दूसरी IITओं की ही तरह है और इसकी प्रवेश की विधि भी बाकी IITओं के साथ ही होती है। आई आई टी खड़गपुर के छात्रों को अनौपचारिक तौर पर केजीपिअन् (KGPians) कहा जाता है। सभी IITओं में इसका कैम्पस क्षेत्रफल सबसे ज्यादा (२१०० एकड़) है http://www.iitkgp.ac.in/institute/history.php Institute History 2 मई 2008 IIT Kharagpur https://web.archive.org/web/20080420181942/http://www.iitkgp.ac.in/institute/history.php 20 अप्रैल 2008 live और साथ ही विभाग और छात्रों की संख्या भी सर्वाधिक है। आई आई टी खड़गपुर, इल्लुमिनेशन, रंगोली, क्षितिज और स्प्रिन्ग्फेस्ट जैसे अपने वार्षिक उत्सवों के कारण जाना जाता है।
इतिहास
300px|thumb|left|भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर का मुख्य भवन
भारत में युद्धोपरांत औद्योगिक विकास हेतु उच्चतर तकनीकी संस्थानों कि स्थापना के लिए दो भारतीय शिक्षाविदों हुमायूँ कबीर और जोगेंद्र सिंह ने १९४६ में तत्कालीन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बिधान चन्द्र रॉय की मदद से एक कमिटी का गठन किया। इसके बाद नलिनी रंजन सरकार कि अगुवाई में २२-सदस्यीय एक कमिटी का गठन हुआ। अपने अंतरिम रिपोर्ट में कमिटी में देश के विभिन्न भागों में मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) की तर्ज़ पर सम्बद्ध दूसरे दर्जे के संस्थानों के साथ उच्चतर तकनीकी संस्थानों कि स्थापना का प्रस्ताव रखा। रिपोर्ट में देश के चार भागों में प्रमुख संस्थानों कि जल्द स्थापना के लिए कार्य आरंभ करने पर जोर दिया गया, साथ ही यह भी कहा गया कि पूर्व और पश्चिम में संस्थानों की स्थापना अतिशीघ्र होनी चाहिए।
उस वक़्त पश्चिम बंगाल में उद्योगों के सर्वाधिक केन्द्रीकरण की दलील देते हुए बिधान चन्द्र रॉय ने भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को इस बात के लिए राज़ी कर लिया कि पहले संस्थान की स्थापना पश्चिम बंगाल में ही हो। इस प्रकार पहले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कि स्थापना मई १९५० में "Eastern Higher Technical Institute" के नाम से हुई। . IIT Kharagpur
2002
Profile of a Trailblazer
IIT Kharagpur
India
(i)
आरम्भ में संस्थान कोलकाता के पूर्वी एस्प्लेनेड में स्थित था और सितमबर १९५० में अपने स्थायी कैम्पस कोलकाता से १२० किमी दक्षिण पूर्व में हिजली, खड़गपुर में विस्थापित किया गया। जब अगस्त १९५१ में पहला सत्र आरम्भ हुआ, तब संस्थान में २२४ छात्र और १० विभागों में ४२ शिक्षक थे। सारी कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और प्रशासनिक कार्यालय ऐतिहासिक हिजली कारावास शिविर (अभी शहीद भवन के नाम से जाना जाने वाला) में स्थित थे जहाँ कि अंग्रेजी शासन काल में राजनितिक क्रांतिकारिओं को बंदी बना कर रखा जाता था और प्राण दंड दिया जाता था। इस कार्यालय के भवन में ही द्वितीय विश्व युद्ध के वक़्त U.S. 20th Air Force का मुख्यालय भी था।
१८ अगस्त १९५१ को मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के द्वारा औपचारिक उद्घाटन से पूर्व "भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान" का नाम ग्रहण किया गया था। १५ सितम्बर १९५६ को भारतीय संसद ने "भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (खड़गपुर) अधिनियम" पारित कर दिया जिसके तहत संस्थान को "राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान" का दर्जा मिला।
१९५६ में प्रधानमंत्री नेहरु ने संस्थान के पहले दीक्षांत अभिभाषण में कहा: Kharagpur Indian Institute of Technology 14 मई 2006 http://iitkgp.ac.in/institute/history.php Institute History 14 मई 2006 https://web.archive.org/web/20060518045010/http://www.iitkgp.ac.in/institute/history.php 18 मई 2006 dead
ऐतिहासिक हिजली बंदी ग्रह जो भारत के बेहतरीन स्मारकों में से एक है अब भारत के नये भविष्य के रूप में बदल रहा है। यह चित्र मुझे उन परिवर्तनों का आभास कराता है जो कि भारत में हो रहे हैं।
शहीद भवन को १९९० में एक संग्रहालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। Suhrid Sankar
Chattopadhyay
http://www.hinduonnet.com/fline/fl1909/19090840.htm
Kharagpur's legend
Volume 19 - Issue 9
फ्रंटलाइन
27 अप्रैल 2002
28 अगस्त 2006
https://web.archive.org/web/20071212134847/http://www.hinduonnet.com/fline/fl1909/19090840.htm
12 दिसंबर 2007
dead
श्रीनिवास रामानुजन् परिसर को एक नए शैक्षणिक परिसर के तौर पर शामिल किया गया जहाँ तक्षशिला ने २००२ और विक्रमशिला ने २००३ में काम करना प्रारंभ किया।
उल्लेखनीय पूर्व-छात्र
अरविंद केजरीवाल
सुंदर पिचाई
खीमराज सोनी
अर्जुन मलहोत्रा
विनोद गुप्ता
दुव्वुरी सुब्बाराव भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर|
अरुण शरिन
रंजन मिस्त्री
सन्दर्भ
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