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411 समाचार
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इरावन

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Sri Aravan ஸ்ரீ அரவான் at Maha Mariamman Koyil Singapore (2023) - img 02.jpg श्री मरिअम्मन मंदिर, सिंगापुर में इरावान की मूर्त इरावान इरावान् महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता, पुराण अर्जुन और उलूपी सौतेले भाई : बभ्रुवाहन (छोटा भाई) , अभिमन्यु (बड़ा भाई) और श्रुतकीर्ति मोहिनी इरावन On thrones of gold: three Javanese shadow plays https://archive.org/details/onthronesofgoldt0000unse Brandon, James R. University of Hawaii Press 1993 0-8248-1425-8 अर्जुन और नागकन्या उलूपी का पुत्र था। वह एक कुशल धनुर्धर और मायावी अस्त्रों का ज्ञाता था। कुरुक्षेत्र के युद्ध में, उसने शकुनि के छः भाइयों का वध किया और अन्य बहुत से योद्धाओं को परास्त किया। इरावन का वध 8वें दिन के युद्ध में अलम्बुष नामक राक्षस ने किया। विवाह महाभारत युद्ध में महान योद्धा और अर्जुन पुत्र इरावन का भी जिक्र आता है। कहा जाता है कि युद्ध छिड़ने पर वह नृशंसता से कौरवों का नाश करते जा रहे थे, मगर धार्मिक प्रवृति के होने के बावजूद वह अविवाहित नहीं मरना चाहते थे, इस युद्ध के दौरान विवाह की जिद पकड़ ली। ऐसे में खुद कृष्ण ने मोहिनी रूप धरकर इरावन से विवाह किया। युद्ध के आठवें दिन इरावन वीरगति को प्राप्त हुए तो पूरे दिन कृष्ण खुद को विधवा मानकर विलाप करते रहे। इरावन अर्जुन और नागकन्या उलूपी के बेटे थे। उलूपी का अर्जुन से विवाह वनवास के दौरान हुआ था। इनसे इरावन का जन्म हुआ। महाभारत कथा के अनुसार इरावन पांडवों की तरफ से लड़े और कौरव पक्ष के योद्धाओं अवंती राजकुमार विंद, अनुविंद, शकुनि के भाइयों गज, गवाक्ष, ऋषभ, आर्जव, शुक्र, चर्मवान, दुयोधन के साले सुदक्षिण, भूरिश्रवा के चार पुत्रों को मार डाला. युद्ध के आठवें दिन कौरवों की ओर से लड़ रहे राक्षस अम्बलुष ने इरावन को मार डाला। किवदंतियों में यह भी प्रचलित है कि इरावन पांडवों की विजय के लिए खुद को देवी चामुण्डा को बलि देना चाहता था, लेकिन पांडव तैयार नहीं थे। श्रीकृष्ण ने समझाया कि इरावन का बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा। देवी चामुण्डा का आशीर्वाद मिलने से विजय मिलेगी। पांडव उसकी इच्छा का सम्मान करते हुए इसे नियति मानकर राजी हो गए। मगर उसने यह इच्छा रख दी कि वह अविवाहित नहीं मरना चाहता है, मरने से पहले उसका विवाह कराया जाए। उसे विवाह के बाद उसे मरना ही है, यह जानकर पांडवों के समर्थक कोई राजा उससे अपनी बेटी से विवाह कराने के लिए आगे नहीं आया। इस पर श्रीकृष्ण ने मोहिनी रूप धर उससे विवाह किया और पत्नी की तरह अंतिम विदाई भी दी। किन्नर इरावन को एक दिन के लिए बनाते हैं पति कहा जाता है कि भारत में हिन्दू धर्म मानने वाले किन्नर अरावन को पूजते हैं। पौराणिक किवदंतियों के अनुसार एक दिन के लिए उनकी मूर्ति को साक्षात इरावन मानते हुए उससे विवाह करते हैं। एक दिन बाद विधवा की तरह विलाप भी होता है। यह रस्म किन्नरों में बेहद पवित्र मानी जाती हैं। महाभारत युद्ध में योगदान महाभारत के भीष्म पर्व के 83वें अध्‍याय के अनुसार महाभारत के युद्ध के सातवें दिन अर्जुन और उलूपी के पुत्र इरावान का अवंती के राजकुमार विंद और अनुविंद से अत्यंत भयंकर युद्ध हुआ। इरावान ने दोनों भाइयों से एक साथ युद्ध करते हुए अपने पराक्रम से दोनों को पराजित कर दिया और फिर कौरव सेना का संहार आरंभ कर दिया। भीष्म पर्व के 91वें अध्याय के अनुसार आठवें दिन जब सुबलपुत्र शकुनि और कृतवर्मा ने पांडवों की सेना पर आक्रमण किया, तब अनेक सुंदर घोड़े और बहुत बड़ी सेना द्वारा सब ओर से घिरे हुए शत्रुओं को संताप देने वाले अर्जुन के बलवान पुत्र इरावान ने हर्ष में भरकर रणभूमि में कौरवों की सेना पर आक्रमण कर प्रत्युत्तर दिया।https://www.lokmatnews.in/spirituality/mahabharat-story-hindi-when-lord-shri-krishna-married-arjuns-son-iravan-and-its-transgender/ 30 अक्टूबर 2023 इरावान द्वारा किए गए इस अत्यंत भयानक युद्ध में कौरवों की घुड़सवार सेना नष्ट हो गयी। तब शकुनि के छहों पुत्रों ने इरावान को चारों ओर घेर लिया। इरावान ने अकेले ही लंबे समय तक इन छहों से वीरतापूर्वक युद्ध कर उन सबका वध कर डाला। यह देख दुर्योधन भयभीत हो उठा और वह भागा हुआ राक्षस ऋष्यश्रृंग के पुत्र अलम्बुष के पास गया, जो पूर्वकाल में किए गए बकासुर वध के कारण भीमसेन का शत्रु बन बैठा था। ऐसे में अल्बुष ने इरावस से युद्ध किया। इरावान और अलम्बुष का अनेक प्रकार से माया-युद्ध हुआ। अलम्बुष राक्षस का जो जो अंग कटता, वह पुनः नए सिरे से उत्पन्न हो जाता था। युद्धस्थल में अपने शत्रु को प्रबल हुआ देख उस राक्षस ने अत्यंत भयंकर एवं विशाल रूप धारण करके अर्जुन के वीर एवं यशस्वी पुत्र इरावान को बंदी बनाने का प्रयत्न आरंभ किया। उस दुरात्मा राक्षस की माया देखकर क्रोध में भरे हुए इरावान ने भी माया का प्रयोग आरंभ किया। उसी समय नागकन्या पुत्र इरावान के मातृकुल के नागों का समूह उसकी सहायता के लिए वहां आ पहुंचा। रणभूमि में बहुतेरे नागों से घिरे हुए इरावान ने विशाल शरीर वाले शेषनाग की भांति बहुत बड़ा रूप धारण कर लिया। तब उसने बहुत से नागों द्वारा राक्षस को आच्छादित कर दिया। तब उस राक्षसराज अलम्बुष ने कुछ सोच-विचार कर गरूड़ का रूप धारण कर लिया और समस्त नागों को भक्षण करना आरंभ किया। जब उस राक्षस ने इरावान के मातृकुल के सब नागों को भक्षण कर लिया, तब मोहित हुए इरावान को तलवार से मार डाला। इरावान के कमल और चंद्रमा के समान कांतिमान तथा कुंडल एवं मुकुट से मंडित मस्तक को काटकर राक्षस ने धरती पर गिरा दिया। इरावान को युद्धभूमि में मारा गया देख भीमसेन का पुत्र राक्षस घटोत्कच बड़े जोर से सिंहनाद करने लगा। उसने भीषण रूप धारण कर प्रज्वलित त्रिशूल हाथ में लेकर भांति-भांति के अस्त्र-शस्त्रों से संपन्न बड़े-बड़े राक्षसों के साथ आकर कौरव सेना का संहार आरंभ कर दिया। उसने दुर्योधन और द्रोणाचार्य से भीषण युद्ध किया। घटोत्कच और भीमसेन ने भयानक युद्ध किया और क्रुद्ध भीमसेन ने उसी दिन धृतराष्ट्र के नौ पुत्रों का वध कर इरावान की मृत्यु का प्रतिशोध ले लिया।The Eighth Day at Kurukshetra; Iravan is Slain [Chapter 8] https://www.wisdomlib.org/hinduism/book/mahabharata/d/doc118438.html www.wisdomlib.org 30 अक्टूबर 2023 en 9 जनवरी 2015 श्रीकृष्ण के प्रिय सखा अर्जुन के पुत्र इरावन और उनसे जुड़ी बड़ी ही रोचक कथा है। इस प्रसंग के अंतर्गत हम आपको बताएंगे कि श्री कृष्ण ने अर्जुन पुत्र इरावन से विवाह किया था महाभारत के इस योद्धा का बेटा था किन्नर, श्रीकृष्ण को मजबूरी में रचानी पड़ी थी शादी https://zeenews.india.com/hindi/web-stories/zee-hindustan/shri-krishna-married-to-iravan-kinnar-son-of-arjun-in-mahabharat-war/1922099 30 अक्टूबर 2023 Zee News hiऔर उसकी मृत्यु पर विधवा रूप में विलाप भी किया था। आइए जानते हैं श्री कृष्ण ने अर्जुन के पुत्र इरावन से विवाह क्यों किया था और इरावन ने क्यों दी थी अपनी बलि। मान्यताएँ इरावान को इरवन और अरावन भी कहते हैं। समस्त हिजड़े स्वयं को उसकी विधवा मानते हैं। भारत का हिजड़ा समुदाय इसी कथा को आत्मसात कर श्रीकृष्ण के योनि संयोजन में स्वयं को देखता है और इरावान को अपना देवता और पति मानता है। तमिलनाडु के वेल्लुपुरम जिले के कूवगम गांव में इरावान देवता का मंदिर है। हर साल तमिल वर्ष की पहली पूर्णिमा को इस मंदिर में 18 दिवसीय कार्यक्रम मनाया जाता है, इसमें हजारों हिजड़ों द्वारा उनके देवता इरावान से विवाह किया जाता है, लेकिन अगले दिन ही मंगलसूत्र तोड़ और महाविलाप के बीच इरावान की प्रतिमा को भग्न कर हिजड़ों द्वारा विधवा वेश धारण कर लिया जाता है। भगवान अरावन की दुल्हनें ट्रांसजेंडर लोग एक दिन के लिए पौराणिक भगवान अरावन से शादी करते हैं और अगले दिन विधवा हो जाते हैं। विल्लुपुरम भारतः कूवगम गांव विल्लुपुरम जिले में उलुंदुरपेट तालुक के बगल में है। कूथंडावर मंदिर इसी गांव में स्थित है। पूरे भारत से ट्रांसजेंडर भारतीय महाकाव्य महाभारत से ली गई एक कहानी को फिर से प्रदर्शित करने के लिए विल्लुपुरम में इकट्ठा होते हैं, जिसे वर्ष 2016 में प्रलेखित भव्य शैली में मनाया जाता है। अगले साल का त्योहार, जो 19 अप्रैल 2019 को पड़ता है, लेकिन अपडेट के लिए यहां देखते रहें । महाभारत की कथा भगवान, 'अरावन', या महाभारत में इरावन, का जन्म अर्जुन और नागा राजकुमारी उलूपी से हुआ था। पांडवों ने युद्ध में जीत सुनिश्चित करने के लिए एक मानव बलि देने का फैसला किया। इरावन ने स्वेच्छा से बलिदान दिया और बदले में उसे इच्छानुसार इच्छा पूरी की गई । बलि के लिए खुद को अर्पित करने से पहले, इरावन एक महिला के सुख का आनंद लेना चाहता था और एक विवाहित पुरुष के रूप में मरना चाहता था। भगवान कृष्ण मोहिनी रूप धारण कर स्त्री के रूप में प्रकट हुए और उनसे विवाह किया और अगले दिन अरावन का सिर काट दिया गया। मोहिनी उसके लिए ऐसे रोई, विलाप किया, विलाप किया और शोक मनाया जैसे कोई पत्नी अपने पति के लिए नहीं करती होगी।आपको पता है कौन थे इरावन, जिसकी विधवा बन खुद भगवान् श्री कृष्ण ने बहाये थे अपने आसूं https://www.newstrend.news/477247/mahabharat-iraavan-and-mohini-story/ 30 अक्टूबर 2023 27 जून 2021The story of Iravan Mahabharata Stories, Summary and Characters from Mahabharata https://www.mahabharataonline.com/stories/mahabharata_character.php?id=82 www.mahabharataonline.com 30 अक्टूबर 2023 30 अक्तूबर 2023 https://web.archive.org/web/20231030160934/https://www.mahabharataonline.com/stories/mahabharata_character.php?id=82 dead त्योहार 'अरावन की अरावनियां' अपनी पहचान 'मोहिनी' से करती हैं - कृष्ण का स्त्री रूप, एक पुरुष के शरीर के अंदर फंसी हुई महिला के रूप में। इस त्योहार में पुजारी, जिसे 'अरावन' माना जाता है, अरावनियों को 'थाली' या 'मंगलसूत्र बांधता है और उन्हें विवाह के रिश्ते में बांधता है। अगले दिन, 'थाली अरुत्थल' या विधवापन के अनुष्ठानों का पालन किया जाता है, जिसमें इरावन की मृत्यु का संकेत देने के लिए थाली तोड़ना और चूड़ियाँ तोड़ना शामिल है। 'अरावनियां' सफेद साड़ी पहनती हैं और अरावन की मृत्यु पर विलाप करती हैं। यह 18 दिवसीय उत्सव के आखिरी दिन किया जाता है। पूरा स्थान ट्रांसवुमेन के तेज़ विलाप से भरा हुआ है, और उनकी उपस्थिति पिछले दिन के बिल्कुल विपरीत है, जहाँ वे पोशाक में सजी हुई थीं ।The Brides of Lord Aravan https://vidhyaa.visura.co/the-brides-of-lord-aravan-2 Vidhyaa 30 अक्टूबर 2023 en सन्दर्भ २ बाहरी सम्पर्क श्रेणी:महाभारत के पात्र