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411 समाचार
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मखाना

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Euryale ferox.jpg लावा पादप मैग्नोलियोफाइटा मैग्नोलियोप्सीडा Nymphaeales Nymphaeaceae Euryale सैलिस्बरी., १८०५ E. ferox यूरेल फ़ेरॉक्स सैलिस्बरी., १८०५ बाएँ|अंगूठाकार|यहाँ इन्हें हल्का सा भूनकर कुरकुरा बनाया जा रहा है। पाँच मिनट में ये खाने के लिए तैयार हो जाएँगे। इन्हें और भी स्वादिष्ट बनाने के लिए भूनते समय घी और मसाला भी डाला जा सकता है। मखाना दक्षिणी और पूर्वी एशिया में पाया जाने वाला एक प्रकार का कमल है और जीनस यूरीएल (Euryale) का एकमात्र विद्यमान सदस्य है। इसके खाद्य बीजों को मखाना (फॉक्स नट्स) या गोर्गन नट्स कहा जाता है, जिन्हें सुखाकर मुख्यतः एशिया में खाया जाता है। यह पौधा भारत, चीन और जापान में निचले इलाकों के तालाबों में इसके बीजों के लिए उगाया जाता है। भारत का बिहार राज्य विश्व के ९०% फॉक्स नट्स का उत्पादन करता है (देखें, मिथिला मखाना)। चीनियों ने सदियों से इस पौधे की खेती की है। भारत में, १९९०-१९९१ में बिहार के ९६,००० हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को यूरीएल की खेती के लिए अलग रखा गया था। भारत के उत्तरी और पश्चिमी भागों में, इन बीजों को अक्सर भूनकर या पॉपकॉर्न की तरह तला जाता है। खेती बीजों और पर्णवृंतों का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है। भारत में, बिहार के ९६,००० हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र, जहाँ इसकी स्थानीय किस्म (और इसके द्वारा उत्पादित नट्स) को मिथिला मखाना कहा जाता है, को १९९०-१९९१ में यूरीएल की खेती के लिए अलग रखा गया था। भारत मखाना (फॉक्स नट) का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है, जहाँ ९०% से अधिक खेती बिहार के बाढ़ के मैदानी क्षेत्रों, विशेष रूप से दरभंगा, मधुबनी और पूर्णिया जैसे जिलों में केंद्रित है। मखाना अपने पोषण प्रोफाइल और भौगोलिक संकेत के लिए मूल्यवान होने के कारण, एक प्रमुख कृषि-निर्यात वस्तु के रूप में भी उभरा है। भारत के उत्तरी और पश्चिमी भागों में, यूरीएल फेरॉक्स के बीजों को अक्सर भूनकर या पॉपकॉर्न की तरह तला जाता है। अन्य प्रकार के खाना पकाने में, ये एक दलिया या हलवा बनाते हैं जिसे खीर कहा जाता है। बीजों का उपयोग कैंटोनी सूप, आयुर्वेदिक तैयारी, और पारंपरिक चीनी चिकित्सा में किया जाता है। फॉक्स नट्स को परंपरागत रूप से मीठे पानी के तालाबों में २.४ मीटर (७ फीट १० इंच) की गहराई तक बिना श्वास उपकरण के गोताखोरी करके काटा जाता था। यह कठिन कार्य है, जिसमें कीचड़ और पौधे के कांटों से त्वचा को खतरा रहता है। २१वीं सदी में, राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र ने ३० सेमी (१२ इंच) की गहराई तक जलमग्न खेतों में इस पौधे की खेती में अग्रणी भूमिका निभाई है, जिससे उत्पादन और कटाई आसान हो गई है। फॉक्स नट उत्पादन के लिए समर्पित भूमि का क्षेत्रफल २०२२ तक बढ़कर ३५,००० हेक्टेयर (८६,००० एकड़) हो गया है। इस केंद्र ने अधिक उत्पादक किस्म विकसित की है, जिससे किसानों की आय बढ़ी है, और यह एक कटाई मशीन भी विकसित कर रहा है। उत्पादन बिहार में मिथिला के दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सहरसा, सुपौल, सीतामढ़ी, पूर्णिया, कटिहार आदि जिलों में मखाना का सार्वाधिक उत्पादन होता है। मखाना के कुल उत्पादन का ८८% बिहार में होता है। https://web.archive.org/web/20091006042618/http://industries.bih.nic.in/ 6 अक्तूबर 2009 उद्योग विभाग, बिहार सरकार द्वारा उत्पादन पर जारी तथ्य मखाना कैसे बनता है? मखाने के बीजों को इकट्ठा करने के लिए सबसे पहले तालाब के अंदर गोता लगाकर या इन्हें बांस के जरिए पानी से बाहर निकाला जाता है, फिर बड़े-बड़े बर्तन में एकत्रित करके उन बीजों को लगातार हिलाते हैं और उसके ऊपर लगी गंदगी की साफ-सफाई करके उन्हें पानी से बार-बार धोया जाता है। फिर उसे चटाई पर सुखाया जाता है। उसके बाद लोहे की बड़ी-बड़ी कई छलनियों की सहायता से उनको साइज के हिसाब से अलग करके स्टोर किया जाता है।मखाने कैसे बनते हैं, जानिएक्या आप जानते हैं कैसे बनता है मखाना? मखाने के बीज जब पूरी तरह सूख जाते हैं तब उन्हें फ्राई करके उससे मखाने या 'फूल मखाना' बनाए जाते हैं। मखाने के बीजों से फूल मखाना तैयार करने के लिए एक तय समय के अंदर ही यह सारा प्रोसेस पूर्ण करना होता है, अन्यथा इनके खराब होने की अधिक सम्भावना होती है। इसके अलावा इन्हें फ्राई करने के बाद बांस के पात्र में भण्डारित करते समय एक खास कपड़े से ढंककर रखा जाता है और तापमान सही रखने के लिए पात्र के आसपास गोबर का लेप किया जाता है। कुछ घंटों के पश्चात उन्हें पुन: फ्राई करके पहले की प्रक्रिया दोहराई जाती है। अगर एक बार फ्राई करने में ही बीज फट गया तो उसमें से सफेद मखाना बाहर निकलता है। फिर उन्हें लकड़ी के तख्तों पर इकट्‍ठा किया जाता है। अंतत: कड़ी मेहनत के बाद स्वादिष्ट मखाना तैयार होता है। मखाने को एक हल्के-फुल्के स्नैक्स के तौर पर उपयोग किया जाता है। बेगूसराय जिले में अत्याधुनिक मखाना प्रोसेसिंग यूनिट की होगी स्थापना, भूमि आवंटित बिहार के कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) परिसर में अत्याधुनिक मखाना प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की जाएगी। इसके खुलने से बेगूसराय में विकास की रफ्तार एक बार फिर न सिर्फ तेज होगी वरन मखाना के उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने की भी तैयारी की जाएगी। इसके लिए सल्यूटरी फूड एंड बेवरेजेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को बेगूसराय में अत्याधुनिक मखाना प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने को लेकर औद्योगिक भूमि आवंटित की है। रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम कंपनी अपने प्रीमियम ब्रांड आपना मखाना के माध्यम से बिहार के विश्वप्रसिद्ध मखाना को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। प्रस्तावित प्रोसेसिंग यूनिट बिहार के मखाना उद्योग को नई दिशा देने के साथ-साथ राज्य में आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण, रोजगार सृजन एवं किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ज्ञात हो कि यह इकाई मिथिला क्षेत्र के प्रमुख मखाना उत्पादक जिलों दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, कटिहार, पूर्णिया एवं बेगूसराय से सीधे किसानों एवं किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले मखाना की खरीद करेगी। कंपनी का उद्देश्य किसानों को उचित मूल्य उपलब्ध कराना, आपूर्ति श्रृंखला को अधिक पारदर्शी बनाना तथा गुणवत्ता आधारित प्रसंस्करण को बढ़ावा देना है। आवश्यकताओं को पूरा करेगी प्रोसेसिंग प्लांट प्रस्तावित संयंत्र में आधुनिक क्लीनिंग, ग्रेडिंग, रोस्टिंग, सॉर्टिंग, पैकेजिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण की सुविधाएं विकसित की जाएगी। यह इकाई घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात, आधुनिक रिटेल, संस्थागत ग्राहकों एवं प्राइवेट लेबल उत्पादन की आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी। इस दिशा में कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसानों को आधुनिक बाजार, उचित मूल्य और प्रोसेसिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए तो बिहार कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों प्राप्त कर सकता है। किसानों को सशक्त बनाना, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उत्पन्न करना तथा स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में यह मिल का पत्थर साबित होगा।https://kositimes.com/a-state-of-the-art-processing-unit-for-aapna-makhana-will-be-set-up-in-bihar-biada-has-allotted-land-in-begusarai/ बिहार में स्थापित होगी 'आपना मखाना' की अत्याधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट, बेगूसराय में BIADA ने आवंटित की भूमि DESK KTNN 2026-07-29 Kosi Times en-US 2026-10-06 पौष्टिक तत्त्व मखाने में कैल्शियम, एंटी-ऑक्सीडेंट, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, फैट, मिनरल, फॉस्फोरस के अलावा भी कई पौष्टिक तत्व और आवश्यक गुण पाते हैं। अत: मखाने के सेवन से हम अनिद्रा, तनाव, हार्ट अटैक, मधुमेह, जोड़ों के दर्द, पाचन में गडबड़, झुर्रियां, कब्ज, किडनी आदि रोगों में फायदा देने वाले मखाने का सेवन करना लाभदायी माना जाता है। अनुसंधान 28 फ़रवरी 2002 को दरभंगा के निकट बासुदेवपुर में राष्ट्रीय मखाना शोध केंद्र की स्थापना की गयी। दरभंगा में स्थित यह अनुसंधान केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्य करता है। दलदली क्षेत्र में उगनेवाला यह पोषक भोज्य उत्पाद के विकाश एवं अनुसंधान की प्रबल संभावनाएँ है। सन्दर्भ इन्हें भी देखें मिथिला मखाना बाहरी कड़ियाँ Euryale (Nymphaeaceae) Euryale ferox page Fox nut page Euryale seed page Gordon Euryale page मखाना चाट आसानी से कैसे बनाएं https://web.archive.org/web/20230906074158/https://ourkitchenrecipe.com/makhana-chaat/ 6 सितंबर 2023 सुपर फूड मखाना ग्लोबल तो बन गया पर खाली हाथ हैं किसान श्रेणी:औषधीय पौधे