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मेहोजी मांगलिया
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मेहाजी मांगलिया बापिणी के शासक वि.सं. 1332 बापिणी, राजस्थान रातडिये मगरे, राजस्थान रावत केलूजी मांगलिया गुहिल वंशीय मांगलिया सनातन धर्म केलू मांगलिया
मेहाजी मांगलिया राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के प्रसिद्ध लोकदेवताओं में माने जाते हैं। लोकपरंपरा में उनका उल्लेख पंच पीर की परंपरा से जुड़े वीर के रूप में किया जाता है। उन्हें विशेष रूप से गोरक्षा करने वाले वीर तथा मांगलिया समुदाय के आराध्य देवता के रूप में पूजा जाता है।विरोध: मेहोजी के इतिहास से छेड़छाड़ पर ग्रामीणों ने जताया रोष https://www.bhaskar.com/local/rajasthan/jodhpur/news/villagers-expressed-anger-over-tampering-with-mehojis-history-127707872.html दैनिक भास्कर 2020 6 सितंबर 2026 hi
लोकमान्यता के अनुसार मेहाजी का जन्म 13वीं शताब्दी में राजस्थान के बापिणी क्षेत्र में हुआ था। उनके पिता रावत केलूजी मांगलिया बताए जाते हैं, जिन्हें खींवसर क्षेत्र से संबंधित माना जाता है।662 साल पूर्व दूलंगजी ने रखी थी मेवाड़ के संस्थापक बप्पारावल के नाम पर बापिणी की नींव https://www.patrika.com/amp/jodhpur-news/foundation-of-bapini-in-the-name-of-bapparawal-the-founder-of-mewar-5006632 पत्रिका पवन कुमार पारीक 24 अगस्त 2019 6 सितंबर 2026 hi
जन्म
लोकपरंपरा के अनुसार मेहाजी मांगलिया का जन्म वि.सं. 1331 अथवा 1332 के आसपास खींवसर परगना क्षेत्र में हुआ था। उनके पिता का नाम रावत केलूजी बताया जाता है। कुछ परंपराओं में केलूजी को खींवसर के राणा करणदास का पुत्र बताया गया है।662 साल पूर्व दूलंगजी ने मेवाड़ के संस्थापक बप्पारावल के नाम पर बापिणी की नींव https://www.patrika.com/amp/jodhpur-news/foundation-of-bapini-in-the-name-of-bapparawal-the-founder-of-mewar-5006632 पत्रिका पवन कुमार पारीक 24 अगस्त 2019 6 सितंबर 2026 hi
मेहाजी का मूल स्थान बापिणी, ओसियां, जोधपुर क्षेत्र से संबंधित माना जाता है। लोकपरंपरा में उनके ननिहाल का संबंध मंडोर के राणा रुपड़ा पड़ियार से बताया जाता है।
परंपरागत विवरणों में मेहाजी को क्षत्रिय तथा गुहिल/गुहिलोत वंशीय मांगलिया बताया गया है। कर्नल जेम्स टॉड के लेखन से भी मांगलिया वंश और उसके संबंध में उल्लेख प्राप्त होने का दावा किया जाता है।
घोड़ा
लोकपरंपरा में मेहाजी के घोड़े का नाम करड़ा अथवा किरड़ काबरा बताया जाता है। उनके घोड़े के संबंध में लोकगीत और पद भी प्रचलित हैं।
करड़ो घोड़ों किलवंत रा,
रण भयो अपहार।
करड़ो केकाणु, हेम पिलानु,
हेमानु भुज भालानू।
करड़े अश्वारू, कुल सिंगारू,
जागे मेहाजी झलझारू।।
मेहाजी का विवाह एवं गोरक्षा
लोकमान्यता के अनुसार मेहाजी का विवाह महेचा मल्लीनाथ की पुत्री के साथ हुआ था। परंपराओं में वर्णित है कि उन्होंने एक महिला को उसकी गायों की रक्षा करने का वचन दिया था। उस महिला को उनकी धर्मबहन के रूप में भी बताया जाता है।
लोककथाओं के अनुसार मेहाजी गायों की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।RajRAS Art Architecture & Culture of Rajasthan RajRAS 2 मार्च 2018 60 https://books.google.com/books?id=bdbHDwAAQBAJ
युद्ध और बलिदान
लोकपरंपरा में मेहाजी के युद्ध का संबंध जैसलमेर क्षेत्र से आए लुटेरों अथवा आक्रमणकारियों से बताया जाता है। कुछ परंपराओं में उनका युद्ध रावल दूदाजी भाटी से संबंधित बताया गया है।
उनके बलिदान का स्थान झीगोर नाड़ी, केरलानाडा गांव के निकट, भीकमकोर (ओसियां) क्षेत्र में बताया जाता है।
पूजा और मेला
मेहाजी मांगलिया की पूजा विशेष रूप से भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी, अर्थात् जन्माष्टमी, के अवसर पर किए जाने की लोकपरंपरा है।
उनसे संबंधित मंदिरों में मांगलिया और गुहिलोत वंश से संबंधित भोपा परंपरा के पुजारियों द्वारा पूजा किए जाने का उल्लेख मिलता है।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व
मेहाजी मांगलिया को मारवाड़ की लोकपरंपरा में वीरता और गोरक्षा के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है। मांगलिया समुदाय में उनकी विशेष धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतिष्ठा मानी जाती है।
उनकी कथा राजस्थान की लोकदेवता परंपरा, लोकगीतों और क्षेत्रीय धार्मिक मान्यताओं में प्रचलित है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
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