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411 समाचार
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ज़ांस्करी

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ज़ांस्करी उत्तर भारत के लद्दाख में पाया जाने वाला घोड़ा प्रजाति का जीव है। इसका नाम कारगिल ज़िला के ज़ांस्कर घाटी के आधार पर रखा गया है। यह हिमाचल प्रदेश के स्पीति घोड़े की नस्ल की तरह ही है। यह उच्च स्थानों पर काम करने के लिए बहुत ही अनुकूल जीव है। स्पीति की तरह, यह पड़ोसी तिब्बत के तिब्बती नस्लों के घोड़ों के समान है। इस नस्ल को आज संकटग्रस्त माना जाता है, क्योंकि आज यह केवल कुछ सौ की संख्या में ही जीवित हैं। इसके सरंक्षण के लिए भारत में एक कार्यक्रम शुरू किया गया है।Gujral G. S. Sharma Virinder Changing Perspectives of Biodiversity Status in the Himalaya 1996 British Council Division, British High Commission 978-81-900651-0-8 https://books.google.co.in/books?id=h93aAAAAMAAJ&redir_esc=y 21 अप्रैल 2021 en इतिहास वर्ष 1977 में ज़ांस्करी घोड़ों की संख्या 15,000-20,000 अनुमानित की गई थी। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन ने वर्ष 2007 में इसे उन जीवों में सूचीबद्ध किया था जो खतरे से बाहर होते हैं हालांकि वर्तमान में इसे अन्य घोड़ों के साथ अंधाधुंध क्रॉस-ब्रीडिंग कराने के कारण इनकी मूल नस्ल पर संकट आया है और यह माना जाता है कि अब केवल कुछ सौ जीव ही शुद्ध नस्ल के हैं। मशीनीकरण और अपने मूल क्षेत्र में सड़कों की संख्या में वृद्धि के कारण भी इनकी जनसंख्या में तेजी से गिरावट आई है। हालांकि, 2006-2007 तक में इनकी जनसंख्या में किसी भी प्रकार के आनुवंशिक अड़चन के संकेत नहीं दिखाई देते थें।Behl Rahul Behl Jyotsna Gupta Neelam Gupta S. C. Ahlawat S. P. S. Ragnekar Mahesh Ahmed Z. Genetic characterization of Zanskari breed of horse 2006 199–203 https://link.springer.com/article/10.1007/BF02935331 22 अप्रैल 2021 en विशेषताएँ ज़ांस्करी एक मजबूत और गठीला जीव है। यह लद्दाख के कठिन वातावरण में काम करने के लिए विशेष रूप से अनुकूलित है। इसकी ऊंचाई आमतौर पर 120 और 140 सेंटीमीटर (11.3 और 13.3 हाथ) के बीच होती है, वक्ष परिधि 140-150 सेमी (55-60 इंच) और शरीर की लंबाई लगभग 95-115 सेमी (38-45 इंच) होती है। इसका सामान्य रंग भूरा, सफेद और काला है।Gujral G. S. Sharma Virinder Changing Perspectives of Biodiversity Status in the Himalaya 1996 British Council Division, British High Commission New Delhi 978-81-900651-0-8 https://books.google.co.in/books?id=h93aAAAAMAAJ&redir_esc=y 22 अप्रैल 2021 en उपयोग ज़ांस्करी को विशेष रूप से लद्दाख जैसे क्षेत्र के उच्च ऊंचाई और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के लिए व्यवहार में लाया जाता है। यह इलाका समुद्र तल से 3000 और 5000 मीटर के बीच स्थित है और जहां तापमान -40 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। यह मजबूत और गठीला जीव है और अच्छी सहनशक्ति रखता है। लद्दाख में कई सामान ढोने में इसका उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग सवारी के लिए और पोलो के लिए भी किया जाता है।Gupta A. K. Tandon S. N. Pal Y. Bhardwaj A. Chauhan M. Phenotypic characterization of Indian equine breeds: a comparative study 2012 49–58 https://www.cambridge.org/core/journals/animal-genetic-resources-resources-genetiques-animales-recursos-geneticos-animales/article/abs/phenotypic-characterization-of-indian-equine-breeds-a-comparative-study/132328D28BC8ED06B19289D84499E984 22 अप्रैल 2021 en सन्दर्भ श्रेणी:अश्व श्रेणी:लद्दाख़ के जीव