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मिशाल बिन्त फ़हद अल सऊद
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मिशाल बिन्त फ़हद अल सऊद (अरबी: الأميرة مشاعل بنت فهد بن محمد بن عبدالعزيز آل سعود) (1958 – 15 जुलाई 1977) सऊदी अरब के हाउस ऑफ सऊद (सऊदी शाही परिवार) की एक राजकुमारी थीं, जिन्हें 1977 में कथित रूप से व्यभिचार (परस्त्रीगमन) के अपराध में गोली मारकर मृत्युदंड दिया गया था। उस समय उनकी आयु केवल 19 वर्ष थी। वे प्रिंस फ़हद बिन मुहम्मद की पुत्री और प्रिंस मुहम्मद बिन अब्दुलअज़ीज़ की पौत्री थीं, जो राजा अब्दुलअज़ीज़ (सऊदी अरब के संस्थापक) के पुत्र और राजा खालिद के बड़े व एकमात्र सगे भाई थे।
इस घटना के बारे में जो भी जानकारी उपलब्ध है, उसका अधिकांश भाग 1980 की ब्रिटिश डॉक्यू-ड्रामा फ़िल्म “डेथ ऑफ ए प्रिंसेस” से लिया गया है, जिसमें इस घटना का नाटकीय और आंशिक रूप से काल्पनिक चित्रण किया गया है।https://www.independent.co.uk/news/world/middle-east/fate-of-another-royal-found-guilty-of-adultery-1753012.html Fate of another royal found guilty of adultery 2009-07-19 The Independent en 2025-10-14
पृष्ठभूमि
राजकुमारी मिशाल को उनके परिवार ने उनकी इच्छा पर पढ़ाई के लिए बेरूत, लेबनान भेजा था। वहाँ उनकी मुलाकात ख़ालिद अल शाएर मुहलहल नामक युवक से हुई, जो लेबनान में सऊदी राजदूत अली हसन अल शाएर का भतीजा था। दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए।
सऊदी अरब लौटने के बाद यह बात सामने आई कि दोनों ने कई बार अकेले मिलने की योजना बनाई थी, जिसके चलते उन पर व्यभिचार (ज़िना) का आरोप लगाया गया।
राजकुमारी ने झूठा आत्महत्या (डूबने) का नाटक करने की कोशिश की, लेकिन वह ख़ालिद के साथ सऊदी अरब से भागने की कोशिश में जेद्दाह अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पकड़ी गईं। उन्होंने पुरुष का वेश धारण किया था, परंतु पासपोर्ट अधिकारी ने उन्हें पहचान लिया। बाद में उन्हें उनके परिवार को वापस सौंप दिया गया।https://www.pbs.org/wgbh/pages/frontline/shows/princess/reflect/harvard.html 25 Years Later - The 'death Of A Princess' Controversy Death Of A Princess FRONTLINE PBS www.pbs.org 2025-10-14
सऊदी अरब में उस समय लागू शरीअत क़ानून के अनुसार, किसी व्यक्ति को व्यभिचार का दोषी केवल तभी ठहराया जा सकता है जब चार वयस्क पुरुष गवाह प्रत्यक्ष रूप से इस कृत्य के साक्षी हों, या अभियुक्त स्वयं अदालत में चार बार स्वीकार करे — “मैंने व्यभिचार किया है।”
मिशाल के परिवार ने उनसे कहा कि वे स्वीकार न करें, केवल यह वादा करें कि वह अपने प्रेमी से फिर कभी नहीं मिलेंगी। लेकिन अदालत में लौटने पर उन्होंने खुले शब्दों में चार बार कहा —
“मैंने व्यभिचार किया है।
मैंने व्यभिचार किया है।
मैंने व्यभिचार किया है।
मैंने व्यभिचार किया है।”
मृत्युदंड
15 जुलाई 1977 को जेद्दाह में क्वीन बिल्डिंग पार्क के पास राजकुमारी मिशाल और ख़ालिद दोनों को सार्वजनिक रूप से फाँसी दी गई। मिशाल की आँखों पर पट्टी बाँधी गई, उन्हें घुटनों पर बैठाया गया और गोली मार दी गई। यह आदेश उनके दादा द्वारा दिया गया था, जो शाही परिवार के वरिष्ठ सदस्य थे, क्योंकि मिशाल के कृत्य से परिवार की “इज़्ज़त” को ठेस पहुँची थी।
ख़ालिद को पहले यह दृश्य देखने के लिए मजबूर किया गया और फिर उसका सिर तलवार से काटा गया — ऐसा माना जाता है कि यह कार्य किसी पेशेवर जल्लाद ने नहीं बल्कि स्वयं राजकुमारी के किसी पुरुष रिश्तेदार ने किया था। उसका सिर अलग करने में पाँच वार लगे।https://books.google.co.in/books?id=dpAXAAAAIAAJ&q=drowning&redir_esc=y The Dagger of Islam Laffin John 1979 Sphere 978-0-7221-5369-7 en
दोनों की फाँसी जेद्दाह महल के पास दी गई थी, न कि दीरा चौक (Deera Square) में, जहाँ सामान्यतः सऊदी अरब में सार्वजनिक मृत्युदंड दिया जाता है।
सन्दर्भ
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