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मदालसा
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जून 2025
विश्वावसु गन्धर्वराज ऋतध्वज विक्रांत, सुबाहु और अरिमर्दन मदालसा
मदालसा विश्वावसु गन्धर्वराज की पुत्री तथा ऋतध्वज की पटरानी थी।कांतिभां एस प्रजापति Markandey Puran: Ek Parisheelan श्रीनिवास पब्लिकेशंसी https://www.google.co.in/books/edition/Markandeya_Purana/sDwqAQAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%B8%E0%A4%BE&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%B8%E0%A4%BE&printsec=frontcover 10 सितंबर 2011 इनका ब्रह्मज्ञान जगद्विख्यात है। पुत्रों को पालने में झुलाते-झुलाते इन्होंने ब्रह्मज्ञान का उपदेश दिया था।वे अनासक्त होकर अपने कर्तव्य का पालन करती जिसके फल स्वरुप उनके पुत्र बचपन से ही ब्रह्मज्ञानी हुए। आज भी वे एक आदर्श माँ हैं क्योंकि वैष्णव शास्त्रों में वर्णन आता हैं की पुत्र जनना उसीका सफल हुआ जिसने अपने पुत्र की मुक्ति के लिय उसे भक्ति और ज्ञान दिया।
मदालसा को हर (चुरा) ले जाने पर पातालकेतु तथा इनके पति ऋतध्वज से घोर संग्राम हुआ। अंत में पातालकेतु परास्त होकर मारा गया और ऋतध्वज ने इन्हें उसके बंधन से मुक्त किया।
मदालसा ज्ञानी थी। उसने अपने सभी पुत्रों को भी ज्ञानी बना दिया। अपने बच्चों को पालने में झुलाते समय वह गाया करती थी “शुद्धोऽसि बुद्धोऽसि निरंजनोऽसि संसारमायापरिवर्जितोऽसि - हे वत्स, तुम विशुद्ध हो, बुद्ध हो, निरंजन तथा जन्म-मरण के बन्धनों से मुक्त हो।” बच्चे माता के दुग्ध के साथ-साथ वेदान्त की इस शिक्षा को भी आत्मसात् कर समय आने पर सन्त हो गये।
सभी नारियों को मदालसा के पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए अपनी सन्तान को सत्य तथा न्याय के मार्ग के अनुगमन के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए।
राजा ऋतध्वज और मदालसा
विवाह के बाद मदालसा के गर्भ से क्रमश: विक्रांत, सुबाहु और अरिमर्दन नामक तीन पुत्र उत्पन्न हुए।महेश शर्मा पी. भल्ला Kya Kahate Hain Puran डायमंड पॉकेट बुक्स प्राइवेट लिमिटेड https://www.google.co.in/books/edition/%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE_%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%A4%E0%A5%87_%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%82_%E0%A4%AA/G4Y2DwAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%B8%E0%A4%BE&pg=PT147&printsec=frontcover 20 सितंबर 2017पुत्रों को पालने में झुलाते-झुलाते इन्होंने ब्रह्मज्ञान का उपदेश दिया था।मदालसा https://educalingo.com/hi/dic-hi/madalasa-1 11 जून 2022 यमुना तट पर पातालकेतु का छोटा भाई मायावी दानव तालकेतु रहता था। बातें बना कर ऋतध्वज से उन के गले का हार ले लिया और ऋतध्वज के पिता शत्रुजित से जा कर कहा की आपका पुत्र मेरे आश्रम के तपस्वियों की रक्षा करते हुए मारा गए। अपने पति की बात जानकर मदालसा की इस वेदना के कारण उसकी चलती-चलती श्वासें एक साथ रुक सी गई।रांगेय राघव प्राचीन प्रेम और नीति की कहानियाँ 1994 किताबघर प्रकाशन https://www.google.co.in/books/edition/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A5%80%E0%A4%A8_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%AE/_k40jq1_Md4C?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%B8%E0%A4%BE&pg=PA242&printsec=frontcover पति के वियोग में मदालसा ने अग्नि में कूदकर प्राण त्याग दिए।हरीश शर्मा Vedon Ki Kathayen 2010 विद्या विहारं https://www.google.co.in/books/edition/Vedon_Ki_Kathayen/ewBTDwAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%B8%E0%A4%BE&pg=PT138&printsec=frontcover
सन्दर्भ
बाहरी कडियाँ
महारानी मदालसा
मदालसा का अपने पुत्र को ब्रह्मज्ञान का उपदेश
श्रेणी:पौराणिक पात्र