Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

शाहनामा

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

thumb|right|शाहनामा Tahmasbi, समकालीन कला संग्रहालय, तेहरान शाहनामा या शाहनामे (شاهنامه) फ़ारसी भाषा का एक महाग्रंथ है जिसके रचायिता फ़िरदोसी हैं। इसमें ईरान पर अरबी फ़तह (सन् 636) के पूर्व के शासकों का चरित लिखा गया है। ख़ोरासान के महमूद ग़ज़नी के दरबार में प्रस्तुत इस किताब को फ़िरदौसी ने 30 साल की मेहनत के बाद सन् 1010 में तैयार किया था। इसमें मुखयतः दोहे हैं, जो दो मुख्य भागों में विभक्त हैं - मिथकीय (या कवि-कल्पित) और ऐतिहासिक सासानी शासकों से मेल खाते। कहा जाता है कि महमूद गज़नवी ने फिरदौसी को यह वचन दिया था कि वह 'शाहनामा' के हर शब्द के लिए एक दीनार देगा। वर्षों की मेहनत के बाद जब 'शाहनामा' तैयार हो गया और फिरदौसी उसे लेकर महमूद गज़नबी के दरबार में गया तो सम्राट ने उसे प्रत्येक शब्द के लिए एक दीनार नहीं बल्कि एक दिरहम का भुगतान करा दिया। कहा जाता है इस पर नाराज होकर फिरदौसी लौट गया और उसने एक दिरहम भी नहीं लिया। यह वायदा ख़िलाफ़ी कुछ ऐसी थी जैसे किसी कवि के प्रति शब्द एक रुपये देने का वचन देकर प्रति शब्द एक पैसा दिया जाये। फिरदौसी ने गुस्से में आकर महमूद गज़नबी के खिलाफ़ कुछ पंक्तियां लिखी। वे पंक्तियां इतनी प्रभावशाली थी कि पूरे साम्राज्य में फैल गयीं। कुछ साल बाद महमूद गज़नवी से उसके विश्वासपात्र मंत्रियों ने निवेदन किया कि फिरदौसी को उसी दर पर भुगतान कर दिया जाये जो तय की गयी थी। सम्राट के कारण पूछने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि हम लोग साम्राज्य के जिस कोने में जाते हैं हमें वे पंक्तियां सुनने को मिलती हैं जो फिरदौसी ने आपके विरुद्ध लिखी हैं और हमारा सिर शर्म से झुक जाता है। उसे निर्धारित दर पर पैसा दे दिया जायेगा तो हमें बड़ा नैतिक बल मिलेगा।' सम्राट ने आदेश दे दिया। दीनारों से भरी गाड़ी जब फिरदौसी के घर पहुंची तो घर के अंदर से फिरदौसी का जनाज़ा निकल रहा था। पूरी उम्र गरीबी, तंगी और मुफ़लिसी में काटने के बाद फिरदौसी मर चुका था। कहते हैं कि फिरदौसी की एकमात्र संतान उसकी लड़की ने भी यह धन लेने से इंकार कर दिया था। इस तरह सम्राट कवि का कर्जदार रहा और आज भी है। शायद यही वजह है कि आज फिरदौसी का शाहनामा जितना प्रसिद्ध है उतनी ही या उससे ज्यादा प्रसिद्ध वे पंक्तियां है जो फिरदौसी ने महमूद गज़नबी की आलोचना करते हुए लिखी थीं। फिरदौसी का 'शाहनामा' दरअसल ईरान का इतिहास ही नहीं ईरानी अस्मिता की पहचान है। उसमें प्राचीन ईरान की उपलब्धियों का बखान है। सम्राटों का इतिहास है। प्राचीन फ़ारसी ग्रंथों को नया रूप देकर उनको शामिल किया गया है। मिथक और इतिहास के सम्मिश्रण से एक अद्भुत प्रभाव उत्पन्न हुआ है। प्रेम, विद्रोह, वीरता, दुष्टता, मानवीयता, युद्ध, साहस के ऐसे उत्कृष्ट उदाहरण हैं जिन्होंने 'शाहनामा' को ईरानी साहित्य की अमर कृति बना दिया है। ईरानी साहित्य में 'शाहनामा' जितनी तरह से जितनी बार छपा है उतना और कोई पुस्तक नहीं छपी है। फिरदौसी ने रुस्तम और सोहराब जैसे पात्र निर्मित किए हैं जो मानव-स्मृति का हिस्सा बन चुके हैं। https://web.archive.org/web/20110107212532/http://rachanakar.blogspot.com/2007/06/blog-post_07.html 7 जनवरी 2011 | accessdate=12 जुलाई, 2008 शाहनामा को तीन भागों में बाँटा जा सकता है। पहला वह जो लोक-साहित्य पर आधारित है, दूसरा वह जो काल्पनिक गाथाओं पर आधारित है और तीसरा वह जो ईरान का इतिहास है। इस महाकाव्य में फ़िरदौसीको अमर बनाने वाली कालजयी रचनाएँ हैं जो आज बार-बार पढ़ी और गाई जाती हैं। जिसमें दास्तान-ए-बीज़न व मनीज़ा, सियावुश व सुदाबे, रुदाबे व ज़ालज़र, रुस्तम व सोहराब, शतरंज की पैदाइश, शाह बहराम के क़िस्से, सिकन्दर व कैद, हिन्दी, ज़हाक़ व कावेह आहंगर इत्यादि उल्लेखनीय हैं। शाहनामा में फ़िरदौसी ने लिखा है कि- बसी रंजो बुर्दम दर इन साल सी अजम ज़िंदा करदम बेदिन पारसी अर्थात् तीस वर्ष की अनथक कोशिशों से मैंने यह महाकाव्य रचा है और फ़ारसी ने अजम (गूँगा) को अमर बना दिया है। फ़िरदौसी आगे कहते हैं- न मीरम अज़ इन पस, कि मन ज़िंदेअम कि तुख़्मे सुख़्न रा पराकन्दे अम यानी मैं कभी मरूँगा नहीं, क्योंकि मैंने फ़ारसी शायरी के जो बीज बिखेरे हैं, वे दुनिया के रहने तक लहलहाते रहेंगे और मैं उनके कारण सदा जीवित रहूँगा।फिरदौसी शाहनामासितंबर 2026 InternetArchiveBot सन्दर्भ इन्हें भी देखें फिरदौसी राजतरंगिणी महाभारत इलियड बाहरी कड़ियाँ फिरदौसी शाहनामासितंबर 2026 InternetArchiveBot (प्रस्तुति : नासिरा शर्मा) श्रेणी:फ़ारसी साहित्य