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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

नारायण राजवंश

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right|thumb|300px|काशीराज का ध्वज right|thumb|काशीराज का दुर्ग (रामनगर दुर्ग) सामने से thumb|काशी नरेश राजा छेत सिंह (१७७०–१७८१) नारायण वंश १००० ई से १९४८ तक बनारस पर शासन करने वाला वंश था। यह भूमिहार ब्राह्मण परिवार था। रामनगर किला तथा इसका संग्रहालय १८वीं शताब्दी से ही काशीनरेश का निवास तथा इस राजवंश के इतिहास का निक्षेपस्थल रहा है। आज भी काशीनरेश बनारस के लोगों के लिये श्रद्धेय हैं। बनारस के लोग काशीनरेश को शिव का अवतार मानते हैं। काशीनरेश ही काशी के सभी प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों के मुख्य संरक्षक तथा आवश्यक अंग होते हैं। इन्हें भी देखें रामनगर किला- इस किले का निर्माण बनारस रियासत के शासक काशी नरेश महाराजा बलवंत सिंह ने सन् १७५० ईस्वी में करवाया था। महाराजा बलवंत सिंह के बाद उनके पुत्र काशी नरेश महाराजा चेत सिंह ने इस किले में रहते हुए सन् १७८१ ईस्वी तक बनारस रियासत/ काशी राज्य पर शासन किया। सावन के अंतिम सोमवार एवं १६ अगस्त सन् १७८१ के दिन शिवालय घाट के युद्ध में काशी नरेश महाराजा चेत सिंह की सेना से पराजित होकर वारेन हेस्टिंग्स चुनार भाग गया था। शिवालय घाट के युद्ध के दौरान काशी राज्य के सैनिकों ने वारेन हेस्टिंग्स के २०५ सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। इस युद्ध में काशी नरेश महाराजा चेत सिंह के अंगरक्षक बाबू नन्हकू सिंह समेत अनेक स्थानीय योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए थे। वारेन हेस्टिंग्स ने लगभग १५ दिनों के बाद बनारस पर दूबरा हमला कर दिया। काशी नरेश महाराजा चेत सिंह की सेना ने अंग्रेजों की सेना का बहादुरी से सामना किया एवं हेस्टिंग्स के १३३ सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। इस युद्ध के दौरान बाबू बोधि सिंह समेत अनेक काशीवासी वीरगति को प्राप्त हो गए। इस युद्ध में काशी नरेश महाराजा चेत सिंह को भारी नुक्सान उठाना पड़ा। सारण के महाराजा फतेह बहादुर शाही के अलावा किसी भी अन्य स्थानीय राजा से मदद नहीं मिलने एवं शस्त्र सामग्री की कमी के कारण उन्हें बनारस से पलायन करके हमेशा के लिए ग्वालियर जाना पड़ा। अन्ततः हेस्टिंग्स ने बनारस पर कब्जा कर लिया। हेस्टिंग्स ने काशी नरेश महाराजा चेत सिंह के एक रिश्तेदार को बनारस का नया राजा घोषित करके उन्हें रामनगर किले के साथ साथ काशी नरेश की सभी संपत्तियों को सौंप दिया। इसप्रकार, काशी नरेश महाराजा चेत सिंह के रिस्तेदार बनारस रियासत के शासक बन गए जबकि काशी नरेश महाराजा बलवंत सिंह के दोनों पुत्र - काशी नरेश महाराजा चेत सिंह एवं कुंअर सुजान सिंह सपरिवार आजीवन ग्वालियर में ही रहें। वर्तमान समय में भी उनके वंशज परिवार ग्वालियर में निवासरत है। रामनगर, वाराणसी काशी का इतिहास वाराणसी का इतिहास सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ रामनगर की रामलीला का अलग ही अंदाज श्रेणी:वाराणसी