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सर्बलोह ग्रंथ
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सरबलोह ग्रंथ (ਸਰਬਲੋਹ ਗ੍ਰੰਥ, = सर्वलोह ग्रन्थ ), जिसे 'मंगलाचरण पुराण' या 'श्री मंगलाचरण जी' भी कहा जाता है, सिखों का एक उत्कृष्ट ग्रंथ है। इसमें 6,500 से अधिक काव्य श्लोक शामिल हैं।Mann JaGurinder Singh nak Mar 1, 2007 El sijismo Ediciones Akal 76 ध्यातव्य है कि सर्बलोह ग्रंथ, गुरु ग्रंथ साहिब और दशम ग्रंथ से एक अलग धार्मिक ग्रन्थ है। इसे गुरु गोविंद सिंह और अन्य कवियों के लेखन का समामेलन माना जाता है। 'सर्बलोह' का शाब्दिक अर्थ है गढ़ा हुआ लोहा।नाभा कान्ह सिंह गुर शब्द रत्नाकर महानकोश ਸਰਬਲੋਹ पंजाबी सुदर्शन प्रेस ਸੰ. ਸਰ੍ਵਲੋਹ. ਵਿ- ਸਾਰਾ ਲੋਹੇ ਦਾ
इस ग्रन्थ में खालसा महिमा मौजूद है।Singh Janak Jul 22, 2010 World Religions and the New Era of Science https://archive.org/details/worldreligionsne0000sing Xlibris Corporation yes January 2018 इस ग्रंथ का कोई भी भजन या रचना दैनिक सिख अनुष्ठान और अमृत संस्कार में इस्तेमाल नहीं की गई है।
इस ग्रन्थ की कोई पूर्ण टिप्पणी या विवरण उपलब्ध नहीं है और यह अभी भी अनुसंधान के अधीन है।Singh Dayal Sarabloh Granth Steek Buddha Dal Panjvaan Takht Printing Press, Bagheechi Baba Bamba Singh Ji, Lower Mall Road, Patiala Intro-ਠ पूर्ण ग्रन्थ को सबसे पहले जत्थेदार संता सिंह निहंग ने बुद्ध दल प्रिंटिंग प्रेस, पटियाला में छापा था।
जो शब्द अक्सर हम सुनते हैं कि...
खालसा मेरउ रूप है खास । खलसे मह हौं करौं निवास।
खालसा मेरउ मुख है अंग। खालसे के हौं बसत सद संग।
यह शब्द श्री सरब्लोह प्रकाश ग्रंथ साहिब में से है।
इन्हें भी देखें
गुरु ग्रंथ साहिब
दशम ग्रंथ
सिख धर्म
सिख गुरु
सन्दर्भ