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411 समाचार
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मुगल साम्राज्य की सेना

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मुग़ल साम्राज्य मुग़ल सेना سپاه هندوستان Farrukhsiyar Procession in front of the Great Mosque of Delhi.png 1556 1806 मुगल सम्राट सेना प्रधान बादशाह मुग़ल सम्राट 15–25 वर्ष 9,11,400–40,39,097 पैदलRoy 2011 29 3,42,696 घुड़सवारRoy 2011 29 कुल 44 लाख–26 अरब 12,07,18,76,840 दामRoy 2011 29 मुग़ल साम्राज्य की सेना वह सैन्य बल थी जिसके द्वारा मुग़ल सम्राटों ने अपने साम्राज्य की स्थापना तथा उसका विस्तार किया। यद्यपि, स्वयं मुग़लों की भाँति, इसका उद्गम मध्य एशिया की अश्वारोही सेनाओं में निहित था, तथापि इसका मूलभूत स्वरूप एवं संरचना तृतीय सम्राट अकबर द्वारा स्थापित की गई थी। नियमित सेना का नियोजन एवं रणक्षेत्र में प्रेषण मुख्य रूप से मनसबदार अधिकारियों द्वारा किया जाता था। १७वीं शताब्दी के समय, यह सेना पृथ्वी की विशालतम सेना बन गई,Developing cultures: case studies Lawrence E. Harrison, Peter L. Berger Routledge 2006 158 https://books.google.com/books?id=RB0oAQAAIAAJ 978-0-415-95279-8 जिसमें ९,११,४०० से ४०,४९,०९७ पदाति (ज़ात) तथा ३,४२,६९६ से १,५०,००,००० अश्वारोही (सवार) सम्मिलित थे।Roy 2011 29 अथवा, अबुल फ़ज़ल की जनगणना के अनुसार, सेना का आकार अनुमानतः ४४ लाख था, जिसमें पाँच लाख से भी कम प्रशिक्षित अश्वारोही थे;Barua 2005 47Andrew de la Garza 2016 4889–90 जबकि आधुनिक भारतीय इतिहासकारों का अनुमान २.६ करोड़ का है।Eraly 2007 300 मुग़लों ने उत्कृष्ट अभियांत्रिकी एवं सैन्य-सम्भार निपुणता का प्रयोग करते हुए भारत पर अपना आधिपत्य स्थापित किया,Abdul Sabahuddin Rajshree Shukla 2003 199। सैन्य-शक्ति प्रक्षेपण की दृष्टि से इतिहासकारों ने मुग़ल सेना की तुलना रोमन साम्राज्य की सेना अथवा संयुक्त राज्य सशस्त्र बल से की है।Robert S. Ehlers Jr Sarah K. Douglas Daniel P.M. Curzon Technology, Violence, and War: Essays in Honor of Dr. John F. Guilmartin, Jr. 2019 BRILL 978-9004393301 93,98 https://books.google.com/books?id=yheJDwAAQBAJ&pg=PR6 19 July 2024Stephen Peter Rosen Stephen Peter Rosen Societies and Military Power India and Its Armies May 15, 2019 Cornell University Press 9781501744792 https://books.google.com/books?id=9OyYDwAAQBAJ 14 March 2024 En276158 सम्भार-तंत्रीय श्रेष्ठता के सन्दर्भ में, मुग़ल विक्टोरिया कालीन ब्रिटिश सेना के समकक्ष थे।Jeremy Black Jeremy Black (historian) Logistics: The Key to Victory Pen and Sword Military 2021 978-1399006026 4 August 2024 https://books.google.com/books?id=xydCEAAAQBAJ Ancient Rome or British army... logistics had to support operations in a variety... faced problem transporting artillery... इतिहासकार स्टीफ़न मोरिलो का मत है कि पाश्चात्य विद्वत-समाज ने सामान्यतः मुग़ल जैसे एशियाई साम्राज्यों के विनाशकारी परिमाण की उपेक्षा की है, जो कि रोमन साम्राज्य से भिन्न नहीं था।John D. Hosler John D. Hosler Alfred J. Andrea Stephen Holt Seven Myths of Military History (Myths of History: A Hackett Series) 2022 Hackett Publishing Company, Inc 978-1647920449 40 En ब्रिटिश इतिहासकार जेरेमी ब्लैक का मत था कि नादिर शाह के भारत आक्रमण के उपरांत हुए पतन तक मुग़ल सेना के संघर्ष, १७वीं शताब्दी में एशियाई सैन्य विकास को प्रतिबिम्बित करते थे। ब्लैक का यह मूल्यांकन उन अन्य इतिहासकारों के दृष्टिकोण के विपरीत था, जिनका मानना था कि १७वीं शताब्दी के समय एशियाई साम्राज्यों की सेनाएँ यूरोप की सैन्य क्रान्ति से प्रभावित थीं।Jeremy Black Jeremy Black (historian) A Military Revolution?: Military Change and European Society 1550–1800 (Studies in European History, 14) https://archive.org/details/militaryrevoluti0000blac 1991 Red Globe Press 978-0333519066 59 En यह काल अत्यधिक व्ययकारी दक्कन युद्धों के समकालिक था, जिसने मुग़ल सेना को अत्यधिक क्षति पहुँचाई। इरफ़ान हबीब तथा फ़रहत हसन जैसे इतिहासकारों का मत है कि दक्षिण एशियाई संघर्षों में मुग़ल अश्वारोही सेना अतुलनीय थी।Hassan Farhat State and Locality in Mughal India Power Relations in Western India, C.1572-1730 2004 Cambridge University Press 978-0-521-84119-1 https://books.google.com/books?id=4TbxNT70UPEC 8 July 2023 En Hardcover Others suggest that it was not artillery but cavalry that made the Mughals invincible in theFarhat Hasan State and Locality in Mughal India: Power Relations in Western India, C.1572-1730; Issue 61 of University of Cambridge Oriental Publications, ISSN 0068-6891 2004 Cambridge University Press 0521841194 21 https://books.google.com/books?id=4TbxNT70UPEC 25 July 2024 अनुशासन तथा आघात-आक्रमण में इसकी श्रेष्ठता इसकी सफलता का मुख्य आधार थी।William Irvine Sarkar Sir Jadunath Later Mughals 2007 University of Minnesota 978-969-35-1924-2 669 https://books.google.com/books?id=VOk2AQAAMAAJ&q=mughal%20superior%20heavy%20cavalry%20charge%20babur 8 July 2023 EnJohn F. Richards The Mughal Empire 1993 Cambridge University Press 978-0-521-56603-2 160 https://books.google.com/books?id=HHyVh29gy4QC 8 July 2023 En Paperback Part 1, Volume 5 १६वीं-१७वीं शताब्दी तक, मुग़ल अश्वों का आयात मुख्यतः अरब, ईरान, तुर्की एवं मध्य एशिया से किया जाता था।Kumari Deepti HORSE TRADE Proceedings of the Indian History Congress 2017 78 351–360 26906103 https://www.jstor.org/stable/26906103 10 December 2021 आग्नेयास्त्र-युद्ध प्रणाली (बारूद-युक्त) के अंगीकरण के कारण, इतिहासकार मार्शल हॉजसन तथा उनके सहयोगी विलियम एच. मैक्नील ने मुग़लों को "बारूदी साम्राज्य" की संज्ञा दी।Hodgson 1974 II:405-06 मुग़ल सेना अन्य अस्त्र-शस्त्रों के साथ-साथ भारी तोपों, हल्के तोपख़ाने, हस्तगोलों, रॉकेटों,Alfred W. Crosby Throwing Fire Projectile Technology Through History April 8, 2002 Cambridge University Press 978-0-521-79158-8 https://books.google.com/books?id=vyFxldb2GJQC 6 December 2023 En Hardcover133Will Slatyer The Life/Death Rhythms of Capitalist Regimes - Debt Before Dishonour Timetable of World Dominance 1400-2100 February 20, 2015 Partridge Publishing Singapore 978-1-4828-2961-7 https://books.google.com/books?id=tprrCQAAQBAJ 6 December 2023 En rockets were upgraded versions of Mughal rockets utilised during the Siege of Jinji by the progeny of the Nawab of Arcot तथा भारी मोर्टार का प्रयोग करती थी।Eric G. L. Pinzelli Masters of Warfare Fifty Underrated Military Commanders from Classical Antiquity to the Cold War 2022 Pen & Sword Books 9781399070157 140–142 https://books.google.com/books?id=W62ZEAAAQBAJ 14 April 2024 En भारी तोपें अत्यधिक व्ययसाध्य तथा स्थानांतरण की दृष्टि से कठिन होती थीं, और उन्हें हाथियों तथा बैलों द्वारा खींचकर ले जाना पड़ता था। मुग़ल नौसैन्य बल को 'अमला-ए-नव्वारा' नाम दिया गया था। ढाका में, मुग़ल नौसैनिक बेड़े में ७६८ पोत सम्मिलित थे, जिनमें पुर्तगाली मूल के ९३३ विदेशी नाविक तथा ८,११२ अग्न्यायुध (तोपख़ाना) कर्मी थे।Permanent Delegation of Bangladesh to UNESCO Mughal Forts on Fluvial Terrains in Dhaka https://whc.unesco.org/en/tentativelists/6675/ UNESCO 19 April 2024 Dhaka, District- Dhaka, Narayanganj, Munshiganj En 2023 वे युद्धपोतों तथा परिवहन पोतों के बेड़ों का संचालन करते थे।Roy Atulchandra Naval Strategy of the Mughals in Bengal Proceedings of the Indian History Congress 1961 24 170–175 44140736 https://www.jstor.org/stable/44140736 23 May 2023 मानसबदारी मनसबदारों के अतिरिक्त दाखिली और अहदी होते थे। दाखिली पूरक सिपाही थे, जो मनसबदारों के कमान में रखे जाते थे तथा उनका खर्च राज्य से मिलता था। अहदी प्रतिष्ठा वाले सिपाही थे। वे एक विशेष प्रकार के अश्वारोही थे, जो साधारणत बादशाह के शरीर के आसपास रहते थे तथा किसी और के अधीन नहीं थे मनसबदारी प्रथा भ्रष्टाचार से मुक्त न थी। आधुनिक शब्दों में मुगल सेना के ये भाग थे- 1 घुड़सवार, 2 पैदल, 3 गोलंदाज 4 जलसेना। इन सब विभागों में घुड़सवार सबसे अधिक महत्वपूर्ण था। पैदल सेना में अधिकतर साधारण नगरवासी तथा किसान थे। सेना की सामरिक शक्ति के अंग के रूप में यह विभाग महत्वहीन था। बाबर, हुमायूँ तथा अकबर ने युद्धों में देश के भीतर बनी बंदूकों का और बाहर से मंगायी गयी बन्दूकों का भी, व्यवहार किया। किन्तु तोपें आलमगीर के राज्यकाल में पेहले की अपेक्षा अत्यधिक पूर्ण तथा बहुसंख्यक थीं। गोलंदाज फौज का पूरा खर्च राज्य देता था। आधुनिक अर्थ में कोई प्रबल जलसेना नहीं थी। किन्तु अबुल फजल एक जलसेना- विभाग का वर्णन करता है, जिसके कर्त्तव्य थे- 1 नदी में आवागमन के लिए हर प्रकार की नावें बनाना, 2 लड़ाई के हाथियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए मजबूत नावों को तैयार करना, 3 कुशल नाविकों की भर्ती करना, 4 नदियों की देखभाल करना 5 नदी सम्बन्धी चुगियाँ और कर लगाना, वसूल करना तथा माफ करना। बंगाल के तट की मूगों तथा अराकानी समुद्री लुटेरों से रक्षा करने के लिए सात सौ अडसठ सशस्त्र जहाजों तथा नावों का एक बेडा ढाके में रहता था। परन्तु मुगलों की समुद्र- सेना की व्यवस्था काफी मजबूत नहीं मालूम पड़ती। यद्यपि मुगल सेना अयोग्य नहीं थी, फिर भी वह दोष रहित नहीं थी प्रथमत: वह राष्ट्रीय सेना नहीं थी, बल्कि विभिन्न तत्वों का सम्मिश्रण थी, जिसमें प्रत्येक तत्व अपने विचित्र तरीकों तथा युद्धकौशल का अनुसरण करने की चेष्टा करता था इस प्रकार यद्यपि समय बीतने के साथ इसकी संख्या में वृद्धि होती गयी, किन्तु यह कष्टकर हो गयी तथा इस पर नियंत्रण रखना अथवा इसका प्रबन्ध करना कठिन हो गया दूसरे, सिपाही सीधे बादशाह के प्रति वफादारी नहीं रखते थे, बल्कि अपने निकटस्थ भतीं करने वालों तथा उच्च अधिकारियों से उनका अधिक घनिष्ठ सम्बन्ध था। इन अधिकारियों के भीषण द्वेष एवं घोर प्रतिद्वंद्विता के कारण प्राय: आक्रमण में सफलता की सम्भावना नष्ट हो जाती थी। अन्ततः पड़ाव में तथा आक्रमण के समय मुगल सेना के वैभव तथा प्रदर्शन के कारण अधिकतर इसकी कार्यक्षमता नष्ट हो जाती थी कभी-कभी अकबर इस प्रचलन को छोड़ सका था। परन्तु सामान्यतः शाही सेना एक भारी चलायमान शहर के समान दिखाई पड़ती थी तथा शाही दरबार के सभी अति व्ययी साजसामानों के बोझ से दब जाती थी। इसमें हाथियों तथा ऊँटों पर सवार अन्त:पुर का एक भाग तथा इसके सेवक रहते थे; भ्रमणशील दरबार रहता था, गायकों की वीथी, दफ्तर, कारखाने तथा बाजार रहते थे हाथियों तथा ऊँटों पर कोष रहता था सैकड़ों बैलगाड़ियों पर फौजी भंडार रहता था। खच्चरों की एक फौज शाही साज-सामान और अन्य सामग्री का परिवहन होती थी। मनसबदारों के अतिरिक्त सैनिकों का एक अन्य प्रकार था जो दखिली कहा जाता था ये सैनिक भी मनसबदारों के अंतर्गत ही नियुक्त किये जाते थे। अहदी सैनिक अहदी सैनिक- वैसे सैनिक जो राजा की व्यक्तिगत सेवा में थे। मुगल घुड़सवार एशिया में प्रसिद्ध माना जाता था। औरंगजेब के समय तोपखाने सबसे सशक्त थे। आइन-ए- अकबरी से ज्ञात होता है कि बंगाल की खाड़ी में पुर्तगीजों के दमन के लिए नाविक बेडे भी रखे जाते थे। पियादगानों पैदल सैनिकों को कहा जाता था इन्हें विशेष कार्यों के लिए नियुक्त किया जाता था। सन्दर्भ श्रेणी:मुग़ल साम्राज्य