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देवास
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देवास
22.58
76.06
मध्य प्रदेश
देवास
महापौर
श्रीमती गीता दुर्गेश अग्रवाल
विधायक
श्रीमती राजमाता गायत्री राजे पंवार
सांसद
महेन्द्र सोलंकी http://164.100.47.194/Loksabha/Members/MemberBioprofile.aspx?mpsno=4910 संग्रहीत प्रति 22 फ़रवरी 2017 https://web.archive.org/web/20161220154406/http://164.100.47.194/Loksabha/Members/MemberBioprofile.aspx?mpsno=4910 20 दिसंबर 2016 dead
५३५
२०११
३,४५०००
९१-७२७२
४५५००१
एमपी 41
http://dmcdewas.org:89/index.php
देवास भारत के मध्य प्रदेश राज्य के मालवा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक शहर है। यह पूर्व में सीनियर (बड़ी पाती) और जूनियर (छोटी पाति) नामक दो 15-तोपों की सलामी वाली रियासतों की राजधानी था, जो पवार वंश द्वारा शासित थीं। मराठा साम्राज्य में इस वंश का अतुलनीय योगदान रहा है; इन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर छत्रपति शाहू महाराज के काल तक मुगलों, निजामों और पुर्तगालियों के विरुद्ध कई महत्वपूर्ण युद्ध लड़े। इनके शौर्य और निष्ठा के लिए इन्हें 'सेना सप्त सहस्री' और 'विश्वास राव' जैसे प्रतिष्ठित खिताबों से नवाजा गया। वर्ष 1728 में पेशवा बाजीराव प्रथम के साथ मालवा विजय में योगदान देते हुए तुकोजी राव (सीनियर) और जीवाजी राव (जूनियर) ने यहाँ शासन की नींव रखी। यहाँ की टेकरी पर चामुंडा माता और तुलजा भवानी माता के प्रसिद्ध मंदिर हैं और वर्तमान में यह एक प्रमुख औद्योगिक नगर है।
लोक मान्यता है कि यहाँ देवी माँ के दो स्वरूप अपनी जागृत अवस्था में हैं। इन दोनों स्वरूपों को छोटी माँ और बड़ी माँ के नाम से जाना जाता है। बड़ी माँ को तुलजा भवानी और छोटी माँ को चामुण्डा देवी का स्वरूप माना गया है। यहाँ के पुजारी बताते हैं कि बड़ी माँ और छोटी माँ के मध्य बहन का रिश्ता था। एक बार दोनों में किसी बात पर विवाद हो गया। विवाद से क्षुब्द दोनों ही माताएँ अपना स्थान छोड़कर जाने लगीं। बड़ी माँ पाताल में समाने लगीं और छोटी माँ अपने स्थान से उठ खड़ी हो गईं और टेकरी छोड़कर जाने लगीं।
माताओं को कुपित देख माताओं के साथी (माना जाता है कि बजरंगबली माता का ध्वज लेकर आगे और भेरूबाबा माँ का कवच बन दोनों माताओं के पीछे चलते हैं) हनुमानजी और भेरूबाबा ने उनसे क्रोध शांत कर रुकने की विनती की। इस समय तक बड़ी माँ का आधा धड़ पाताल में समा चुका था। वे वैसी ही स्थिति में टेकरी में रुक गईं। वहीं छोटी माता टेकरी से नीचे उतर रही थीं। वे मार्ग अवरुद्ध होने से और भी कुपित हो गईं और जिस अवस्था में नीचे उतर रही थीं, उसी अवस्था में टेकरी पर रुक गईं।http://hindi.webdunia.com/religious-journey-articles/%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-108040600001_1.htm संग्रहीत प्रति 22 फ़रवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170222194741/http://hindi.webdunia.com/religious-journey-articles/%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%AD%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80-108040600001_1.htm 22 फ़रवरी 2017 dead
इस तरह आज भी माताएँ अपने इन्हीं स्वरूपों में विराजमान हैं। यहाँ के लोगों का मानना है कि माताओं की ये मूर्तियाँ स्वयंभू हैं और जागृत स्वरूप में हैं। सच्चे मन से यहाँ जो भी मन्नत माँगी जाती है, हमेशा पूरी होती है। इसके साथ ही देवास के संबंध में एक और लोक मान्यता यह है कि यह पहला ऐसा शहर है, जहाँ दो वंश राज करते थे- पहला होलकर राजवंश और दूसरा पँवार राजवंश। बड़ी माँ तुलजा भवानी देवी होलकर वंश की कुलदेवी हैं और छोटी माँ चामुण्डा देवी पँवार वंश की कुलदेवी।
टेकरी में दर्शन करने वाले श्रद्धालु बड़ी और छोटी माँ के साथ-साथ भेरूबाबा के दर्शन अनिवार्य मानते हैं। नवरात्र के दिन यहाँ दिन-रात लोगों का ताँता लगा रहता है। इन दिनों यहाँ माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
इतिहास
अंगूठाकार|देवास कलेक्टरेट (पहले देवास जूनियर का लक्ष्मी निवास पैलेस)। देवास के नागरिकों के कड़े विरोध के बावजूद इसे मार्च 2023 में स्थानीय प्रशासन द्वारा अवैध रूप से ध्वस्त कर दिया गया था।
देवास का इतिहास मराठा साम्राज्य की सैन्य और प्रशासनिक शक्ति का एक अनूठा उदाहरण है। पवार वंश की ऐतिहासिक सेवा का आरंभ छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से ही हो गया था, जहाँ उन्होंने दक्कन के विभिन्न अभियानों में सक्रिय योगदान दिया। छत्रपति शाहू महाराज के काल में, इस परिवार ने साम्राज्य के विस्तार के लिए मुगलों, निजामों और पुर्तगालियों के विरुद्ध कई महत्वपूर्ण युद्धों का नेतृत्व किया। उनकी वीरता और स्वराज्य के प्रति निष्ठा को देखते हुए, उन्हें 'सेना सप्त सहस्री' (Sena Sapt Sahasri) और 'विश्वास राव' (Vishwas Rao) जैसे उच्च वंशानुगत खिताबों से सम्मानित किया गया था।Dewas 2026-01-01 https://en.wikipedia.org/w/index.php?title=Dewas&oldid=1330573473 Wikipedia en 2026-01-01
वर्ष 1728 में, पेशवा बाजीराव प्रथम के नेतृत्व में मालवा के निर्णायक अभियान के दौरान, तुकाजी राव (सीनियर) और जीवाजी राव (जूनियर) ने इस क्षेत्र में मराठा शक्ति को स्थापित करने में प्रमुख भूमिका निभाई। इस विजय के परिणामस्वरुप देवास रियासत की नींव पड़ी। भाइयों के बीच क्षेत्र के विभाजन के बाद, उनके वंशजों ने 'बड़ी पाती' (Senior Branch) और 'छोटी पाति' (Junior Branch) के रूप में शासन किया। 1841 के उपरांत ये दोनों पूर्णतः अलग रियासतें बन गईं, हालांकि उनकी भौगोलिक सीमाएँ एक-दूसरे में इस प्रकार उलझी हुई थीं कि देवास शहर की मुख्य सड़क के दोनों किनारे अलग-अलग प्रशासन के अधीन थे।http://archive.org/details/dli.ministry.08803 Western States Gazetteers: Malwa C.E. Luard 1908 Bombay, British India Press
देवास बाद में ब्रिटिश भारत की दो रियासतों की राजधानी भी बना था ।
1901 में वरिष्ठ शाखा की जनसंख्या 62,312 थी, जबकि कनिष्ठ शाखा की जनसंख्या 54,904 थी।
देवास जूनियर (छोटी पाति) और देवास सीनियर (बड़ी पाती) दरबार में कई सरदार, मानकरी, ठाकुर, जागीरदार और इस्तमुरादार थे।
1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, देवास के दोनों महाराजा (छोटी पाति और बड़ी पाती) भारत में शामिल हो गए, और उनके राज्य मध्य भारत में एकीकृत हो गए, जो 1950 में भारत का एक राज्य बन गया। बाद में, 1956 में, मध्य भारत को मध्य प्रदेश राज्य में मिला दिया गया।
कैसे पहुंचे
पाठ=देवास जूनियर स्टेट के तीन महाराजाओं की एक दुर्लभ तस्वीर।|अंगूठाकार|देवास जूनियर स्टेट के तीन महाराजाओं की एक दुर्लभ तस्वीर।(बाएं से दाएं - महाराजा सदाशिव राव पवार, महाराजा यशवंत राव पवार और महाराजा मल्हार राव पवार)
हवाई मार्ग- यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा 'मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी' कहे जाने वाले इंदौर शहर में स्थित है।
सड़क मार्ग - यह शहर राष्ट्रीय राजमार्ग आगरा-मुंबई से जुड़ा हुआ है। यह मार्ग माता की टेकरी के नीचे से ही गुजरता है। इसके निकटतम बड़ा शहर इंदौर है, जो यहाँ से मात्र 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौर से आप बस या टैक्सी लेकर देवास जा सकते हैं। माता के मन्दिर में दूर दुर से लोग आते है और सभी की मुरादे यहां पूरी होती है।
"नवरात्री" में यहाँ आना शुभ माना जाता है।
रेलमार्ग - देवास शहर भारत के सभी प्रमुख शहरों से रेलमार्गो के द्वारा जुड़ा हुआ है
देवास जिले के मुख्य नगर - देवास, हाटपिपलिया, बागली, कन्नौद, हतनोरी, खातेगांव, सतवास, कांटाफोड, नेमावर, उदयनगर, पुंजापुरा, सोनकच्छ।
पर्यटन स्थल
पहाडी पर स्थित मां चामुण्डा (छोटी माता) एवं तुलजा भवानी (बडी माता) माता का मंदिर अत्यन्त प्रसिद्ध है, इस स्थान को टेकरी भी कहा जाता है। टेकरी की ऊंचाई ३०० फिट है।http://dic.mp.nic.in/dewas/Dewas/html/rel.htm संग्रहीत प्रति 1 मार्च 2017 https://web.archive.org/web/20170513221902/http://dic.mp.nic.in/dewas/Dewas/html/rel.htm 13 मई 2017 dead अंगूठाकार|देवास रेल्वे स्टेशन
टेकरी की तलहटी पर मौजुद शीलनाथ धूनी गोरखनाथ सम्प्रदाय के संत शीलनाथ महाराज के अनुयायियों के लिये श्रद्धेय स्थान है।
पंवार छत्री एवं मीठा तालाब - मीठा तालाब के पास मौजुद पंवार छत्रीयां इतिहास में देवास नगर में मराठा साम्राज्य की उपस्थिती दर्शाति है।
ग्राम रोजड़ी में स्थित तजकेश्वर घाट
जनसंख्या
भारत की जनगणना की अनंतिम रिपोर्ट के अनुसार, 2011 में देवास की जनसंख्या 289,550 है। 2024 में देवास शहर की वर्तमान अनुमानित जनसंख्या 409,000 है | https://www.census2011.co.in/census/city/297-dewas.html Dewas Population 2024
बाहरी कड़ियाँ
बैंक नोट प्रैस
देवास मे नोट छापने का कारखाना है ।यह पर 100, 200,500,2000 रुुपये के नोट छापे जाते है ।
देवास का इतिहास-भाग-1 (वेब दुनिया पर देवास ब्लाग)
देवास माता टेकरी - जहाँ विराजी हैं चामुण्डा और तुलजा भवानी (वेबदुनिया)
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