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कपालभाति (हठयोग)
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कपालभाति योग में षट्कर्म (हठ योग) की एक विधि (क्रिया) है। संस्कृत में कपाल का अर्थ होता है माथा या ललाट और भाति का अर्थ है तेज। इस विधि (क्रिया) का नियमित अभ्यास करने से मुख पर आंतरिक प्रभा (चमक) से उत्पन्न तेज रहता है। कपाल भाति बहुत ऊर्जावान उच्च उदर श्वास विधि (क्रिया) है।
कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति यानी स्वच्छता। अर्थात 'कपाल भाति' वह विधि (क्रिया) है जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है। वैसे इस विधि (क्रिया) के अन्य लाभ भी है। लीवर किडनी गैस आदि के लिए बहुत लाभ कारी है मैं इसे केवल खाली पेट ही करता हूँ।
विधि
कपाल भाति करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें। इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से साँस को यथासंभव बाहर फेंकें। साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें। तत्पश्चात तुरन्त नाक के दोनों छिद्रों से साँस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते है। इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैे, किन्तु एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें। क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं।
कम से कम ५ मिनट एवं अधिकतम ३० मिनट।
लाभ
इसके नियमित अभ्यास से शरीर की अनावश्यक चर्बी घटती है। हाजमा ठीक रहता है। भविष्य में कफ से संबंधित रोग व साँस के रोग नहीं होते। प्राय: दिन भर सक्रियता बनी रहती है। रात को नींद भी अच्छी आती है। अस्थमा(दमा) का रोग जड़ से नष्ट होते हैं I
सावधानियाँ
हृदय रोगों, हाई ब्लड प्रेशर और पेट में गैस आदि शिकायतों में यह क्रिया धीरे धीरे करना चाहिये (60 बार एक मिनट में ) है।
धूल-धुआं-दुर्गन्ध, बन्द व गर्म वातावरण में यह विधि (क्रिया) न करें
मासिक चक्र के समय और गर्भावस्था के दौरान इसे न करें।
बुखार, दस्त, अत्यधिक कमजोरी की स्थिति में इसे न करें।
कब्ज़ की स्थिति में इसे न करें। गुनगुने पानी में नींबू डालकर पेट साफ करें और फिर इसके बाद ही इसे करें।
बाहर की ओर निकले हुए पेट को शीघ्र घटाने के चक्कर में अनेक लोग दिन में कई बार इसे करते हैं, जो हानिप्रद है।
खाना खाने के बाद 4घंटे तक कपाल भाति न करें।
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