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नागार्जुनकोंडा
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नागार्जुनकोण्ड तेलंगाना राज्य के नलगोंडा ज़िले में स्थित एक ऐतिहासिक नगर है। हैदराबाद से 100 मील दक्षिण-पूर्व की ओर स्थित नागार्जुनकोंडा एक प्राचीन स्थान है।
यह बौद्ध महायान के प्रसिद्ध आचार्य नागार्जुन (द्वितीय शताब्दी) ई. के नाम पर प्रसिद्ध है।
प्रथम शताब्दी में यहाँ सातवाहन नरेशों का राज्य था।
'हाल' नामक सातवाहन राजा ने नागार्जुन के लिए श्री पर्वत शिखर पर एक विहार बनवाया था।
यह स्थान बौद्ध धर्म की महायान शाखा का भी काफ़ी समय तक प्रचार केन्द्र रहा।
सातवाहनों के पश्चात इक्ष्वाकु नरेशों ने यहाँ राज्य किया।
नागार्जुनकोंडा इक्ष्वाकु राजाओं के समय एक सुन्दर नगर था।
कृष्णा नदी के तट पर स्थित तथा चतुर्दिक पर्वत मालाओं से परिवृत्त यह नगर प्राकृतिक सौन्दर्य से समंवित होने के साथ ही दुर्भेद्य दुर्ग की भाँति सुरक्षित भी था।
यहाँ से नौ बौद्ध स्तूपों के अवशेष लगभग 50 वर्ष पूर्व उत्खनित किये गये थे।
ये इस नगर के प्राचीन गौरव एवं ऐश्वर्य के साक्षी हैं।
उत्खनन में प्राप्त यहाँ के अवशेषों में एक स्तूप, दो चैत्य और एक विहार हैं।
स्तूप के निकट बुद्ध के जीवन के दृश्यों को व्यक्त करने वाले चूने के पत्थर के टुकड़े मिले हैं।
हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान से नागार्गुनकोंडा का महत्त्व घटने लगा।
नागार्जुनकोंडा से प्राप्त अभिलेखों से यह ज्ञात होता है, कि पहली शताब्दी ई. में भारत का चीन, यूनानी जगत तथा लंका से सम्बन्ध स्थापित था।
नागार्जुनकोंडा के एक अभिलेख से स्थविरों के संघों का ज्ञान होता है, जिन्होंने कश्मीर, गांधार, चीन, किरात, तोसलि, यवन, ताम्रपर्णी द्वीपों में बौद्ध धर्म फैलाया था।
श्रेणी:आन्ध्र प्रदेश के नगर
श्रेणी:भारतीय उपमहाद्वीप में प्राचीन विश्वविद्यालय