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411 समाचार
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चंद्रयान-4

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अक्टूबर 2026 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ( इसरो ) ने अपने अगले मून मिशन चंद्रयान-4 पर काम करना शुरू कर दिया है। पिछले मिशन से मुख्य अंतर यह होगा कि इस बार लैंडर को पुनः चंद्रमा से धरती पर वापस लाया जाएगा और इसके साथ ही चंद्रमा से सैंपल (मिट्टी) भी लाया जाएगा । चंद्रयान-4 चंद्रमा से नमूना वापसी इसरो https://www.isro.gov.in/ चंद्रयान रोवर: जाक्सालैंडर: इसरो 6000 किलोग्राम ≈ 350 kg (रोवर के साथ लैंडर) 2028 से पूर्व जीएसएलवी एलवीएम 3 सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन चंद्रयान अभियान चंद्रयान-३ खास बातें चंद्रयान-4 मिशन को मुख्य रूप से दो देश (भारत और जापान) मिलकर पूर्ण करेंगे । इसमें दोनों देशों की अलग अलग भूमिका होगी। हमारा देश भारत इस मिशन में सबसे महत्वपूर्ण भाग मून लैंडर का निर्माण करेगा जो चंद्रमा की सतह पर 350 किलोग्राम के रोवर को सॉफ्ट लैंडिंग कराएगा । पिछला रोवर चंद्रयान-3 मात्र 35 किलोग्राम का था । चंद्रयान-4 मिशन में रोवर का निर्माण जापान करेगा । यह रोवर आधुनिकता और टेक्नोलॉजी से पूर्ण होगा । यह चांद की सतह (लूनर सर्फेस) पर कई प्रकार के परिक्षण कार्य करेगा । भारत में पहली बार हमारे अब तक के सभी चंद्रयानों ने केवल एक तरफ का ही रास्ता तय किया है, अर्थात ये सभी यान केवल पृथ्वी से चांद पर गए है मगर वहां से वापस पृथ्वी पर नहीं आए हैं । लेकिन इस बार चंद्रयान-4 चंद्रमा से मिट्टी लेकर धरती पर वापस आएगा । क्या है चंद्रयान-4 हमारा देश भारत और टेक्नोलॉजी में सबसे आगे जापान यह दोनो देश मिलकर लूनर एक्सप्लोरेशन मिशन (LUPEX) पर काम कर रहे हैं और इसी मिशन को चंद्रयान-4 मिशन कहा जायेगा । श्रेणी:चंद्रयान परियोजना