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दिगम्बर बड़गे
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अक्टूबर 2012
thumb|right|200px|गन्धी-ह्त्या के अभियुक्तों का सामूहिक चित्र। खड़े हुए : शंकर किस्तैया, गोपाल गोडसे, मदनलाल पाहवा, दिगम्बर बड़गे. बैठे हुए: नारायण आप्टे, विनायक दामोदर सावरकर, नाथूराम गोडसे, विष्णु रामकृष्ण करकरे
दिगम्बर बड़गे (திகம்பர் பேட்ஜ்) हिन्दू महासभा के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे। जब इन पर गान्धी-ह्त्या के मामले में मुकदमा चलाया गया तो ये सरकारी गवाह बन गये और उन्होंने मामले में सभी अभियुक्तों के नाम बता दिये जिसके चलते मामला शीघ्रता से सुलझ गया।
अदालत में जब गान्धी-ह्त्या का अभियोग चला तो मदनलाल पाहवा ने उसमें स्वीकार किया कि जो भी लोग इस षड्यन्त्र में शामिल थे पूर्व योजनानुसार उसे केवल बम फोडकर सभा में गड़बड़ी फैलाने का काम करना था, शेष कार्य अन्य लोगों के जिम्मे था। जब उसे छोटूराम ने जाने से रोका तो उसने जैसे भी उससे बन पाया अपना काम कर दिया। उस दिन की योजना भले ही असफल हो गयी हो परन्तु इस बात की जानकारी तो सरकार को हो ही गयी थी कि गान्धी की हत्या कभी भी कोई कर सकता है फिर उनकी सुरक्षा की चिन्ता आखिरकार किन्हें करनी चाहिये थी?
सन्दर्भ
Manohar Malgaonkar, The Men Who Killed Gandhi, Madras, Macmillan India (1978) ISBN 0-333-18228-6
बाहरी कड़ियाँ
पहले भी हुआ था बापू को मारने का प्रयास
श्रेणी:महात्मा गांधी की हत्या