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कोरबा
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कोरबा Korba कोरबा India Chhattisgarh 22.35 82.68 inline, title छत्तीसगढ़ में स्थिति देश प्रान्त छत्तीसगढ़ जिला कोरबा जिला 1206640 2011 भाषा प्रचलित हिन्दी, छत्तीसगढ़ी भारतीय मानक समय +5:30 पिनकोड 495677 (मुख्य डाकघर, कोरबा) दूरभाष कोड (0)7759 CG-12 लिंगानुपात 969 (प्रति 1000 पुरुष के अनुपात में स्त्री) www.korba.gov.in
कोरबा (Korba) भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा जिला में स्थित एक नगर है। यह जिला का मुख्यालय भी है।"Pratiyogita Darpan https://web.archive.org/web/20190702180520/https://books.google.com/books?id=7egDAAAAMBAJ 2 जुलाई 2019 ," July 2007
विवरण
कोरबा का नाम यहां की जनजाति पहाड़ी कोरवा के आधार पर रखा गया है। यह छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी (ऊर्जानगरी) भी कहलाती है, क्योंकि यहां छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कम्पनीज़ (पूर्ववर्ती नाम छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल) और एनटीपीसी के अलावा कई निजी कम्पनियों के विद्युत संयंत्र संचालित हैं। इसके अलावा कोरबा की पहचान एशिया के सबसे बड़े खुले कोयला खदान (ओपन कास्ट कोल माइन) गेवरा माइंस के कारण से भी है, जो कोल इण्डिया लिमिटेड की अनुषांगि कम्पनी साउथ ईस्टर्न कोल फिल्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा कोरबा कोयलांचल में संचालित अनेक अंडरग्राउंड और ओपनकास्ट माइन्स में से एक है। इसके अलावा यहां भारत का सबसे बड़ा एल्युमिनियम संयंत्र भारत एल्युमिनियम कंपनी (बालको) स्थित है, जिसे एनडीए शासनकाल में निजी हाथों में सौंप दिया गया था।
भूगोल
कोरबा की स्थिति 22.35 N 82.68 E पर है। यहाँ की औसत ऊँचाई २५२ मीटर (826 फीट) है।
अर्थव्यवस्था
कोरबा का अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी है यहाँ ४५ प्रतिशत उद्द्योग से और ५० प्रतिशत कृषि और ५ प्रतिशत अन्य साधनों से आय प्राप्त होती है यहाँ पर कृषि के लिए जल संसाधन अच्छी स्रोत है इसके साथ ही सिंचाई के लिए नहरे निकली गयी है
कालोनी
कोरबा शहर लगभग कालोनियों से भरा हुआ है यहाँ एन टी पी सी बालको एच टी पी पी एस ई सी एल की कालोनियों से बसा हुआ है साथ ही कालोनियों का परस्पर प्रेम सदभाव वाले माहौल देखने को भी मिलता है
प्रमुख आकर्षण
चैतुरगढ़
चैतुरगढ़ को लाफागढ़ के नाम से भी जाना जाता है। कोरबा जिला मुख्यालय से 70 कि॰मी॰ दूर पाली के पास 3060 मी. ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इसका निर्माण राजा पृथ्वी देव ने कराया था। यह एक किले जैसा लगता है। इसमें तीन प्रवेश द्वार हैं। इन प्रवेश द्वारों के नाम मेनका, हुमकारा और सिम्हाद्वार हैं।
चैतुरगढ़ का क्षेत्रफल 5 वर्ग कि॰मी॰ है और इसमें पांच तालाब हैं। इन पांच तालाबों में तीन तालाब सदाबहार हैं, जो पूरे वर्ष जल से भरे होते हैं। चैतुरगढ़ में महिषासुर मर्दिनी मन्दिर है। मन्दिर के गर्भ में महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसके बारह हाथ हैं। नवरात्रों में यहां पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। स्थानीय निवासी इस पूजा में बड़ी श्रद्धा से भाग लेते हैं।
मन्दिर के पास खूबसूरत शंकर गुफा भी है, जो लगभग 25 फीट लंबी है। गुफा का प्रवेश द्वार बहुत छोटा है। इसलिए पर्यटकों को गुफा में प्रवेश करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। मन्दिर और गुफा देखने के अलावा पर्यटक इसकी प्राकृतिक सुन्दरता की झलकियां भी देख सकते हैं। वह यहां पर वन्य पशु-पक्षियों को देख सकते हैं।
कोसगाईगढ़
कोरबा-कटघोरा रोड पर फुटका पहाड़ की चोटी पर स्थित कोसगाईगढ़ बहुत खूबसूरत है। यह समुद्र तल से 1570 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। कोसागाईगढ़ में एक खूबसूरत किला है। इसका प्रवेश द्वार एक गुफा की भांति है और यह इतना संकरा है कि इसमें से एक बार में केवल एक व्यक्ति गुजर सकता है। किले के चारों तरफ घना जंगल है, जिसमें अनेक प्रजाति के वन्य पशु-पक्षियों को देखा जा सकता है। कोसगाईगढ़ में पर्यटक किले के अलावा भी अनेक ऐतिहासिक अवशेषों देख सकते हैं। यहां स्थित माता कोसगाई के मंदिर की अपनी महिमा है, मंदिर में माता की इच्छानुरुप छत नहीं बनाया गया है।
मड़वारानी
कोरबा जिला मुख्यालय से 22 कि॰मी॰ दूर कोरबा-चांपा रोड पर मड़वारानी मन्दिर स्थित है। यह मन्दिर एक चोटी पर बना हुआ है और मदवरानी देवी को समर्पित है। स्थानीय निवासी के अनुसार सितम्बर-अक्टूबर में नवरात्रों में यहां पर कल्मी के वृक्ष के नीचे ज्वार उगती है। नवरात्रों में यहां पर स्थानीय निवासियों द्वारा भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में स्थानीय निवासियों के साथ पर्यटक भी बड़े उत्साह से भाग लेते हैं।
सर्वमंगला मंदिर
कोरबा शहर से लगा हुआ दुर्गा देवी को समर्पित सर्वमंगला मन्दिर कोरबा के प्रमुख मन्दिरों में से एक है। इसका निर्माण कोरबा के जमींदर राजेश्वर दयाल के पूर्वजों ने कराया था। सर्वमंगला मन्दिर के पास त्रिलोकीनाथ मन्दिर, काली मन्दिर और ज्योति कलश भवन हैं। पर्यटक इन मन्दिरों के दर्शन भी कर सकते हैं। इन मन्दिरों के पास एक गुफा भी जो नदी के नीचे से होकर गुजरती है। कहा जाता है कि रानी धनराज कुंवर देवी इस गुफा का प्रयोग मन्दिरों तक जाने के लिए किया करती थी।
=== सतरेंगा == यह एक प्रकृतिक और मानव द्वारा निर्मित आकर्षित पिकनिक की जगह है यह स्थान कोरबा से 35km रूमगारा हवाई पट्टी के रास्ते जाने वाली जगह है . इस स्थान पर आप बोटिंग , अच्छे व्यंजन का लुत्फ़ उठा सकते है ,, यन्हा रुकने के लिए भी राज्यसरकार द्वारा निर्मित कॉटेज भी उपलब्ध है । यह एक अत्यधिक सुंदर स्थान है ।
आवागमन
रेल मार्ग
कोरबा तक जाने के लिए रेल मार्ग एक बेहतर जरिया हैं। एक्सप्रेस गाड़ियों में कोरबा-यशवंतपुर (वेनगंगा एक्सप्रेस), कोरबा-अमृतसर (छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस), कोरबा (बिलासपुर)-नागपुर (शिवनाथ एक्सप्रेस) और कोरबा-तिरुअनंतपुरम (कोचिन एक्सप्रेस) के अलावा कई लोकल ट्रेने बिलासपुर से कोरबा के लिए चलती हैं। हावड़ा-मुंबई रुट से अलग होने की वजह से कोरबा जाने वाले यात्रियों के लिए हावड़ा-मुंबई रूट पर चलने वाली कई ट्रेनों को निकटस्थ रेलवे स्टेशन चांपा में स्टापेज दिया जाता है।
वायु मार्ग
दिल्ली, प्रयागराज, जबलपुर और खजुराहो से बिलासपुर हवाई अड्डे तक प्रतिदिन वायु सेवा है। बिलासपुर से पर्यटक सड़क से आसानी से कोरबा तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा कोरबा के करीब बालको की हवाई पट्टी भी है, जहां छोटे विमान आसानी से उतर सकते हैं।
सड़क मार्ग
कोरबा सड़क मार्ग द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
इन्हें भी देखें
कोरबा ज़िला
सन्दर्भ
श्रेणी:कोरबा ज़िला
श्रेणी:छत्तीसगढ़ के नगर
श्रेणी:कोरबा ज़िले के नगर
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