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411 समाचार
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सती प्रथा

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सती कुछ पुरातन भारतीय समुदायों में प्रचलित एक ऐसी धार्मिक प्रथा थी, जिसमें किसी पुरुष की मृत्त्यु के बाद उसकी पत्नी उसके अंतिम संस्कार के दौरान उसकी चिता में स्वयमेव प्रविष्ट होकर आत्मत्याग कर लेती थी। 1829 में अंग्रेजों द्वारा भारत में इसे गैरकानूनी घोषित किए Thelallantop शिव के अपमान से पड़ी सती प्रथा की ... - TheLallantop.com http://www.thelallantop.com/bherant/the-origin-of-the-practice-of-sati-lies-in-the-puranas/ 5 जून 2016जाने के बाद से यह प्रथा प्रायः समाप्त हो गई थी । वास्तव मैं सती होने के इतिहास के बारे मे पूर्ण सत्यात्मक तथ्य नही मिले हैं। यह वास्तव मैं राजाओ की रानियों अथवा उस क्षेत्र की महिलाओं का इस्लामिक आक्रमणकारियों के आक्रमण के समय यदि उनके रक्षकों की हार हो जाती तो अपने आत्मसम्मान को बचने के लिए स्वयं दाह कर लेतीं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण चित्तौड़ की महारानी पद्मिनी का आता हैं। इस प्रथा का अन्त राजा राममोहन राय ने अंग्रेज के गवर्नर लार्ड विलियम बैंटिक की सहायता से की । प्राचीन सन्दर्भ इस प्रथा को इसका यह नाम देवी सती के नाम से मिला है जिन्हें दक्षायनी के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवी सती ने अपने IBN Khabar आज भी मौजूद है 'सती प्रथा'– IBN Khabar http://khabar.ibnlive.com/news/city-khabrain/8486.html 5 जून 2016अगस्त 2024 InternetArchiveBot पिता दक्ष द्वारा अपने पति महादेव शिव के तिरस्कार से व्यथित हो यज्ञ की अग्नि में कूदकर आत्मदाह कर लिया था। सती शब्द को अक्सर अकेले या फिर सावित्री शब्द के साथ जोड़कर किसी "पवित्र महिला" की व्याख्या करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। सती प्रथा के कारण प्राचीन काल में सती प्रथा का एक यह भी कारण रहा था। आक्रमणकारियों द्वारा जब पुरुषों की हत्या कर दी जाती थी, उसके बाद उनकी पत्नियाँ अपनी अस्मिता व आत्मसम्मान को महत्वपूर्ण समझकर स्वयमेव अपने पति की चिता के साथ आत्मत्याग करने पर विवश हो जाती थी। कालांतर में महिलाओं की इस स्वैच्छिक विवशता का अपभ्रंश होते-होते एक सामाजिक रीति जैसी बन गयी, जिसे सती प्रथा के नाम से जाना जाने लगा। सती प्रथा का अन्त ब्रह्म समाज के संस्थापक राजा राममोहन राय ने सती प्रथा के विरुद्ध समाज को जागरूक किया। जिसके फलस्वरूप इस आन्दोलन को बल मिला और तत्कालीन अंग्रेजी सरकार को सती प्रथा को रोकने के लिये कानून बनाने पर विवश होना पड़ा था। अन्तत: उन्होंने सन् 1829 में सती प्रथा रोकने का कानून पारित किया। इस प्रकार भारत से सती प्रथा का अन्त हो गया। हैदरबाद के छठे निज़ाम- महबूब अली खान ने स्वयं 12 नवंबर,1876 को एक चेतावनी घोषणा जारी किया और कहा, अब यह सूचित किया गया है कि यदि भविष्य में कोई भी इस दिशा में कोई कार्रवाई करता है, तो उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ेगा। अगर तलुकादार, नवाब, जगदीड़, ज़मीनदार और अन्य इस मामले में लापरवाही और लापरवाही पाए जाते हैं, सरकार द्वारा उनके खिलाफ गंभीर कार्रवाई की जाएगी "https://m.dailyhunt.in/news/india/english/deccan+chronicle-epaper-deccanch/letters+leave+a+rich+legacy+of+rulers-newsid-89750998 Letters leave a rich legacy of rulers en इन्हें भी देखें बाल विवाह दहेज प्रथा डाकन प्रथा बलि प्रथा सन्दर्भ श्रेणी:सामाजिक प्रथा श्रेणी:हिन्दू धर्म की आलोचना