Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

कटी पतंग

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

कटी पतंग कटी पतंग.jpg कटी पतंग का पोस्टर शक्ति सामंत शक्ति सामंत आर॰ डी॰ बर्मन वृजेन्द्र सिंह (संवाद) आशा पारेख, राजेश खन्ना, प्रेम चोपड़ा, बिन्दू, नासिर हुसैन गुलशन नन्दा 1971 गोविन्द दलवाड़ी वी॰ गोपी कृष्णा शक्ति फिल्म्स भारत हिन्दी कटी पतंग 1971 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। इसका निर्देशन और निर्माण शक्ति सामंत ने किया। यह बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी। फिल्म में आशा पारेख एक विधवा होने का नाटक करती है और राजेश खन्ना द्वारा निभाए गया किरदार उनका आकर्षक पड़ोसी होता है।100 साल का बॉलीवुड, फिर भी नहीं टूटा राजेश खन्ना का यह रिकॉर्ड https://hindi.news18.com/photogallery/entertainment/bollywood-these-were-the-fifteen-back-to-back-hit-films-of-rajesh-khanna-which-helped-him-to-get-superstar-title-1451148-page-8.html 22 फरवरी 2019 न्यूज़ 18 इंडिया 17 जुलाई 2017 https://web.archive.org/web/20190222151947/https://hindi.news18.com/photogallery/entertainment/bollywood-these-were-the-fifteen-back-to-back-hit-films-of-rajesh-khanna-which-helped-him-to-get-superstar-title-1451148-page-8.html 22 फ़रवरी 2019 dead यह फिल्म 1969 और 1971 के बीच राजेश खन्ना की लगातार 17 हिट फिल्मों में से एक है और चार फिल्मों में से दूसरी है जिसमें उनकी आशा के साथ जोड़ी बनाई गई थी। संक्षेप माधवी "मधु" (आशा पारेख) अपने मामा के साथ रहने वाली एक अनाथ है, जो किसी ऐसे व्यक्ति के साथ उसकी शादी की व्यवस्था करते हैं जिसे वह नहीं जानती। कैलाश (प्रेम चोपड़ा) के प्यार में अंधी होकर, वह शादी के दिन भाग जाती है। वह शबनम (बिन्दू) की बाहों में कैलाश को पाती है। दिल से पीड़ित, वह अपने मामा के पास लौट आती है, जिन्होंने अपमान से आत्महत्या कर ली। यह महसूस करते हुए कि उसके पास अब कोई नहीं है, माधवी शहर को छोड़ने का फैसला करती है। वह अपने बचपन की दोस्त पूनम से मिलती है, जो उसे एक दुर्घटना में अपने पति के असामयिक निधन के बारे में बताती है। वह अपने ससुराल वालों के साथ रहने के लिए अपने लड़के, मुन्ना के साथ जा रही है। वह उनसे पहले कभी नहीं मिली। रास्ते में, पूनम और मधु की ट्रेन पटरी से उतर जाती है और दोनों सरकारी अस्पताल में पहुँच जाती हैं। पूनम अपने पैर गंवा चुकी होती है। वह जानती है कि उसका अंत निकट है, इसलिए वह मधु से वादा करवाती है कि वह पूनम की पहचान अपना लेगी, मुन्ना को पालेगी और पूनम के ससुराल में जीवन जारी रखेगी। मधु के पास एक मरती हुई माँ की इच्छा को मानने के सिवा कोई चारा नहीं होता है। रास्ते में उसे कमल (राजेश खन्ना), लूटने के प्रयास से बचाता है और अगले दिन आसमान साफ ​​होने तक उसे आश्रय देता है। वह जल्द ही जान जाती है कि कमल वही आदमी है जिसके साथ उसकी शादी तय हुई थी। मधु शर्म से कमल का घर छोड़कर पूनम के ससुराल पहुँच जाती है। उसके ससुर दीनानाथ (नासिर हुसैन) और सास (सुलोचना) उसे स्वीकार करते हैं और उसे वहीं रहने देते हैं। कमल घर पर आता-जाता रहता है क्योंकि वह दीनानाथ के सबसे अच्छे दोस्त का बेटा है। जल्द ही, उसे पता चलता है कि उसे पूनम से प्यार हो गया है। कैलाश, दीनानाथ के घर आ जाता है। वह उनके पैसे के पीछे है और मधु की पहचान का खुलासा करने के बहुत करीब होता है। सफल होने के लिए, वह घर के सभी सदस्यों को प्रभावित करता है, लेकिन पूनम उससे नाराजगी जताती है। दीनानाथ को जल्द ही पूनम की असली पहचान का पता चलता है और वह उससे सच पूछते हैं। जब उन्हें पता चलता है कि वास्तव में मामला क्या है, तो वह माधवी को स्वीकार करते हैं और उसे अपनी संपत्ति का संरक्षक बनाते हैं जो मुन्ना को विरासत में मिलेगी। उस रात, कैलाश द्वारा दीनानाथ को जहर दिया जाता है। श्रीमती दीनानाथ, पूनम पर जो कुछ भी हुआ उसके लिए आरोप लगाती हैं और उसे जेल में डाल दिया जाता है। अब शबनम दीनानाथों के जीवन में प्रवेश करती है और दावा करती है कि वह असली पूनम है। गुस्से में श्रीमती दीनानाथ उसे वापिस भेज देती है। कमल, मधु की सच्चाई पता लगने पर उसे नापसंद करने लगता है। हालांकि, उसे अंततः सच्चाई का एहसास होता है और शबनम और कैलाश को उनके बुरे इरादों के लिए गिरफ्तार करा देता है और माधवी को मुक्त कर दिया जाता है। जब कमल मधु को खोजता है, तो उसे पता चलता है कि वह बिना किसी को बताये चली गई है। वह कमल के लिए एक पत्र छोड़ जाती है, जिसमें लिखा होता है कि वह उसके जीवन से बाहर जा रही है और इसलिए, उसे खोजने की कोशिश नहीं की जाये। कमल उसे खोजना शुरू करता है और उसे एक चट्टान से कूदने की कोशिश करते हुए पाता है और एक गाना गाकर उसे रोकता है। वे गले लगते। मुख्य कलाकार आशा पारेख — माधवी "मधु" / पूनम राजेश खन्ना — कमल सिन्हा प्रेम चोपड़ा — कैलाश बिन्दू — शबनम "शब्बो" नासिर हुसैन — दीवान दीनानाथ सुलोचना लाटकर — श्रीमती दीनानाथ मदन पुरी — कमल के पिता डेज़ी ईरानी — रमैया हनी ईरानी — मनोरमा 'मुन्नी' सत्येन कप्पू — डा. काशीनाथ संगीत राजेश खन्ना के लिए किशोर कुमार द्वारा गाए गए गाने फिल्म की सफलता का कारण थे, जबकि मुकेश ने भी उनके लिए एक गीत गाया था - एक दुर्लभ संयोजन। गीत गायक आर॰ डी॰ बर्मन आनन्द बक्शी प्यार दीवाना होता है किशोर कुमार 4:44 ये शाम मस्तानी किशोर कुमार 4:37 ये जो मोहब्बत है किशोर कुमार 4:08 जिस गली में तेरा घर मुकेश 4:01 आज ना छोड़ेंगे किशोर कुमार, लता मंगेश्कर 5:15 ना कोई उमंग है लता मंगेश्कर 4:21 मेरा नाम है शबनम आशा भोंसले, आर॰ डी॰ बर्मन 3:15 नामांकन और पुरस्कार प्राप्तकर्ता और नामांकित व्यक्तिपुरस्कार वितरण समारोहश्रेणीपरिणाम शक्ति सामंत फिल्मफेयर पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार राजेश खन्ना फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार आशा पारेखआशा पारेख का जन्‍मदिन आज, जानें उनकी जिंदगी से जुड़ी ये खास बातें https://www.prabhatkhabar.com/news/bollywood/asha-parekh-birthday-special-asha-parekh-interesting-facts-asha-parekh-personal-life/1211040.html प्रभात खबर 22 फरवरी 2019 2 अक्टूबर 2018 https://web.archive.org/web/20190223020328/https://www.prabhatkhabar.com/news/bollywood/asha-parekh-birthday-special-asha-parekh-interesting-facts-asha-parekh-personal-life/1211040.html 23 फ़रवरी 2019 dead फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार गुलशन नन्दा फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ कथा पुरस्कार किशोर कुमार ("ये जो मोहब्बत है") फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक पुरस्कार आनंद बख्शी ("ना कोई उमंग है") फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ गीतकार पुरस्कार सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ 0065936 कटी पतंग श्रेणी:1971 में बनी हिन्दी फ़िल्म श्रेणी:आर॰ डी॰ बर्मन द्वारा संगीतबद्ध फिल्में