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बंसी लाल
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चौधरी बंसीलाल (26 अगस्त 1927-28 मार्च 2006)(चौधरी बंसी लाल) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे। उनका जन्म हरियाणा के भिवानी जिले के गोलागढ़ गांव के जाट परिवार में हुआ था। उन्होंने 4 अलग-अलग अवधियों: 1968-72 ,1972-75, 1986-87 एवं 1996-99 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। बंसीलाल को 1975 में आपातकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी का एक करीबी विश्वासपात्र माना जाता था। उन्होंने दिसंबर 1975 से मार्च 1977 तक रक्षा मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी एवं 1975 में केंद्र सरकार में बिना विभाग के मंत्री के रूप में उनका एक संक्षिप्त कार्यकाल रहा। उन्होंने रेलवे और परिवहन विभागों का भी संचालन किया। लगातार सात बार राज्य विधानसभा के लिए चुने गए, पहली बार 1967 में. उन्होंने 1996 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा विकास पार्टी की स्थापना की।। बंशीलाल एक विकास पुरुष माने जाते है, और अपने तानाशाही व्यक्तित्व के लिए भी जाने जाते है।
शिक्षा
बंसीलाल ने पंजाब यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज, जालंधर में अध्ययन किया। 1972 में, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने उन्हें क्रमशः विधिशास्त्र एवं विज्ञान की मानद उपाधि से विभूषित किया।
राजनीतिक जीवन
एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में, वे 1943 से 1944 तक लोहारू राज्य में परजा मंडल के सचिव थे।
बंसी लाल 1957 से 1958 तक- बार एसोसिएशन भिवानी के अध्यक्ष थे। वह 1959 से 1962 तक जिला कांग्रेस कमेटी हिसार के अध्यक्ष थे और बाद में वे कांग्रेस कार्यकारिणी समिति तथा कांग्रेस संसदीय बोर्ड के सदस्य बने।
वे 1958 से 1962 के बीच पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति के सदस्य थे।
वे 21 दिसंबर 1975 से 24 मार्च 1977 तक केंद्रीय रक्षा मंत्री रहे|
वे 1980-82 के बीच संसदीय समिति और सरकारी उपक्रम समिति के सदस्य रहे |
1982-84 के बीच प्राक्कलन समिति(Estimates Committee) के भी अध्यक्ष थे।
31 दिसम्बर 1984 को वे रेल मंत्री और बाद में परिवहन मंत्री बने।
दिसंबर 1975 से 20 दिसंबर 1975 तक केंद्र सरकार में बिना विभाग के मंत्री थे |
वे सात बार 1967 ,1968 ,1972 ,1986 ,1991 ,1996 ,2000 में हरियाणा विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए |
वह दो बार 1960 से 2006 और 1976 से 1980 तक राज्य सभा के सदस्य थे। वे तीन बार 1980 से 1984, 1985 से 1986 और 1989 से 1991 तक लोक सभा के सदस्य थे।
1996 में कांग्रेस से अलग होने के बाद, बंसीलाल ने हरियाणा विकास पार्टी की स्थापना की एवं शराबबंदी के उनके अभियान ने उन्हें उसी वर्ष विधान सभा चुनाव में सत्ता में स्थापित कर दिया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री
बंसीलाल 1968, 1972 1986 और 1996 में में चार बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। वे भगवत दयाल शर्मा एवं राव बीरेंद्र सिंह के बाद हरियाणा के तीसरे मुख्यमंत्री थे। वे 31 मई 1968 को पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने और उस पद पर 13 मार्च 1972 तक बने रहे। 14 मार्च 1972 को, उन्होंने दूसरी बार राज्य में शीर्ष पद धारण लिया और 30 नवम्बर 1975 तक पद पर बने रहे। उन्हें 5 जून 1986 से 19 जून 1987 तक एवं 11 मई 1996 से 23 जुलाई 1999 तक तीसरी और चौथी बार मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।
बंसीलाल राज्य विधानसभा के लिए सात बार चुने गए, पहली बार 1967 में कुछ समय के लिए चुने गए। 1966 में हरियाणा के गठन के बाद राज्य का अधिकांश औद्योगिक और कृषि विकास, विशेष रूप से बुनियादी ढांचे का निर्माण लाल की अगुआई के कारण ही हुआ।
साठ के दशक के अंत में और सत्तर के दशक में मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान वे हरियाणा में सभी गांवों में बिजलीकरण के लिए जिम्मेदार थे। वे राज्य में राजमार्ग पर्यटन के अग्रदूत थे - यह वह मॉडल था जिसे बाद में कई राज्यों के द्वारा अपनाया गया। कई लोगों द्वारा उन्हें एक "लौह पुरुष" माना जाता है जो हमेशा वास्तविकता के करीब थे और जिन्होंने समुदाय के उत्थान में गहरी दिलचस्पी ली।
बंसीलाल ने 2005 में विधानसभा चुनावों में भाग नहीं लिया लेकिन उनके पुत्र सुरेंद्र सिंह एवं रणबीर सिंह महेन्द्रा राज्य विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए. सुरेन्द्र सिंह की 2005 में उत्तर प्रदेश में सहारनपुर के पास एक हेलीकाप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई।
आपात स्थिति में भूमिका
जब निवर्तमान प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के द्वारा 1975 में आपातकाल लगाया गया तो बंसीलाल सुर्खियों में आए। वे 1975 में आपातकाल के विवादास्पद दिनों में इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी के एक करीबी विश्वासपात्र थे। संजय गांधी के साथ उन्हें आपातकाल के दौरान विभिन्न कदमों के लिए जिम्मेदार कहा जाता था।
वे 21 दिसम्बर 1975 से 24 मार्च 1977 तक रक्षा मंत्री और 1 दिसम्बर 1975 से 20 दिसम्बर 1975 तक केंद्र सरकार में बिना विभाग के मंत्री रहे।
दूर-दूर तक यात्रा करने वाले व्यक्ति
बंसीलाल ने म्यानमार, अफगानिस्तान, पूर्व सोवियत संघ, मॉरिशस, तंजानिया, जाम्बिया, सेशेल्स, यूनाइटेड किंगडम, कुवैत, ग्रीस, पश्चिम जर्मनी, नीदरलैंड, बेल्जियम, फ्रांस एवं इटली सहित कई देशों की यात्रा की।
मृत्यु
बंसीलाल की 28 मार्च 2006 को नई दिल्ली में मृत्यु हो गई। वे कुछ समय से बीमार थे।
राजनीतिक विरासत
उनके छोटे बेटे सुरेंद्र सिंह जिनकी 2005 में एक विमान हादसे में मृत्यु हो गई थी पत्नी किरण चौधरी उनकी परम्परागत सीट तोशाम से 2006 के उपचुनाव व 2009 के आम चुनाव में विजयी हो हरियाणा की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री बनी । किरण चौधरी 2014 में विजयी हो हरियाणा प्रतिपक्ष की नेता बनी व 2019 के आम चुनाव में भी इसी सीट से कांग्रेस की विधायक है। चौ बंसीलाल की पौत्री व सुरेंद्रसिंह व किरण की पुत्री स्वाति चौधरी2009 के लोकसभा चुनाव में भिवानी - महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से कांग्रेस पार्टी की सांसद निर्वाचित हुई थी, हालांकि वो इस सीट से 2014 व 2019 में मोदी लहर के चलते इस सीट से परिवार के पुराने राजनीतिक प्रतिद्वंदी धरमवीर से चुनाव हार गई।
चौधरी बंसी लाल के बड़े बेटे चौधरी रणबीर सिंह महेंद्र, मुंढाल निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा (2005) सदस्य रहे है। चौधरी रणबीर सिंह बीसीसीआई (BCCI) के एक एक पूर्व अध्यक्ष भी हैं एवं चौधरी बंसीलाल के ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते, उन्हें स्वाभाविक रूप से चौधरी बंसीलाल की राजनीतिक विरासत के अग्रदूत के रूप में देखा जाता है।
सन्दर्भ
http://feeds.indiasnews.net/?rid=a59d5dacd3468c64&cat=701ee96610c884a6&f=1
https://web.archive.org/web/20070930055747/http://www.hindustantimes.com/news/181_1661407,000900010006.htm
http://www.indiaserver.com/thehindu/1999/06/28/stories/05282511.htmजून 2020 InternetArchiveBot
लाल, बंसी गोलगढ़ 30 मार्च 2006 नई दिल्ली
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