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ब्याज व्याप्ति अनुपात
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ब्याज व्याप्ति अनुपात अथवा टाइम्स ब्याज अर्जित अनुपात (Times interest earned) किसी कम्पनी की साख को निरूपित करने वाला एक व्यावसायिक अथवा आर्थिक आँकड़ा है। इससे कंपनी की उपलब्ध कमाई के साथ, ब्याज भुगतान की क्षमता का मापन किया जाता है।
परिभाषा
इसकी गणना ब्याज और कर पूर्व आय अथवा ब्याज, कर, विमूल्यन और ऋण परिशोधन से पहले की कमाई (ईबीआईटीडीए) में ब्याज व्यय का भाग देकर की जा सकती है:
टाइम्स ब्याज अर्जित अनुपात ब्याज, कर, विमूल्यन और ऋण परिशोधन से पहले की कमाई ब्याज व्ययब्रैग स्टीवन New Financial Leadership Manual - Appendix B: Performance Measurement Checklist (Pages: 456-464) जॉन विली एंड सन्स 10.1002/9781118268360.app2 free
जब ब्याज समावेशन अनुपात इकाई से कम होता है तब कंपनी अपने ब्याज और कर पूर्व आय से ऋण भुगतान के लिए आवश्यक पर्याप्त नकदी का उत्पादन नहीं कर रही है। ऐसी स्थिति में अन्तर को निबटाने के लिए कंपनी को या तो रोकड़ शेष का उपभोग करना होता है या फिर और ऋण लेना पड़ता है। अक्सर यह अनुपात 1.5 से कम होने पर कम्पनी के लिए इसे चेतावनी का संकेत माना जाता है।Agrarstrategien in verschiedenen Wirtschaftssystemen: ein Vergleich https://books.google.de/books?id=-VdbitquQR8C&pg=PA124 2024-02-01 Egger Urs 1989 124 Verl. d. Fachvereine 978-3-7281-1662-8 Zürich
ब्याज समावेशन अनुपात कंपनी की उस अवस्था को प्रस्तुत करता है जिसके अनुसार ब्याज और कर घटाने से पूर्व कंपनी संचित ब्याज को कितनी बार भुगतान कर सकती है। इसे सामान्यतः 'टाइम्स इंटरेस्ट अर्नड' अर्थात समय आधारित ब्याज अर्जित भी कहते हैं। इसमें केवल ब्याज का भुगतान ही शामिल किया जाता है, मूलधन का भुगतान इसमें शामिल नहीं होता।https://www.icicidirect.com/ilearn/stocks/articles/interest-coverage-ratio Interest Coverage Ratio - Definition, Calculation, and Importance - ICICI Direct ICICI Direct 2024-02-01 इस अनुपात की गणना तिमाही या वित्तीय वर्ष के पदों में की जाती है।
घरेलू अथवा निजी
निजी अथवा व्यक्तिगत मामलों में यह अनुपात अलग रूप में गिना जाता है।
प्रभाव
ब्याज समावेशन अनुपात कंपनी की बाज़ार में सेहत का मापक है जो उसके ऋण समझौतों और बॉण्ड को प्रभावित कर सकता है। इसमें ऋणी ऋणदाता को एक सीमा से अधिक ब्याज दर तक नहीं जाने गारंटी देता है। यदि उपरी सीमा पार की जाती है तो इसे समझौते का उल्लंघन माना जाता है, जो कुछ समय तक उपचार अवधि अर्थात सेहत सुधार अवधि में गिना जाता है। इस अवधि में उधार लेने वाले से सुधार अपेक्षित होता है। हालांकि इसके बाद भी सुधार नहीं होने की स्थिति में ऋणदाता अधिक अधिकार प्राप्त कर लेता है जिसमें वो समझौता खत्म कर सकता है।https://surveysparrow.com/blog/what-is-times-interest-earned-ratio/ Times Interest Earned Ratio: Definition, Formula, and Example 2021-05-17 सर्वेस्पेरो en 2024-02-01
सन्दर्भ
श्रेणी:वित्त