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411 समाचार
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नागभट्ट प्रथम

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नागभट्ट प्रथम (मृत्यु ७८० ई) भारत के उत्तरी भाग में गुर्जर-प्रतिहार राजवंश के संस्थापक राजा थे।K.K.Menon पुष्यभूति साम्राज्य के हर्षवर्धन के बाद पश्चिमी भारत पर उसका शासन था। उनका राज्य अवन्ति (या मालवा) क्षेत्र पर था। उसकी राजधानी कन्नौज थी। उसने सिन्ध के अरबों को पराजित किया थानागभट्ट प्रथम : अरब आक्रमण को पराजित करने वाला गुर्जर योद्धा और काठियावाड़, मालवा, गुजरात तथा राजस्थान के अनेक क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया था। सम्राट मिहिर भोज भी नागभट्ट प्रथम के ही वंशज थे।Pushpendra Singh Parihar कुचामन किले का निर्माण नागभट्ट प्रथम ने करवाया था। Om Prakash Dikshit p. 3-5 नागभट्ट प्रथम को राष्ट्रकूट नरेश दन्तिदुर्ग ने पराजित किया था। अरब आक्रमण नागभट्ट प्रथम के वंशज मिहिर भोज के ग्वालियर शिलालेख के अनुसार, नागभट्ट ने एक म्लेच्छ आक्रमण को निष्फल कर दिया। इन म्लेच्छों को अरब मुस्लिम आक्रमणकारियों के रूप में पहचाना जाता है। 9वीं शताब्दी के मुस्लिम इतिहासकार अल-बालाधुरी उज़ैन ( उज्जैन ) के अरब हमलों को संदर्भित करते हैं; यह नागभट्ट के साथ उनके संघर्ष का संदर्भ प्रतीत होता है। आक्रमण का नेतृत्व उमय्यद खलीफा हल हकम और गवर्नर जुनैद के अधिकारियों ने किया था। अल-बालाधुरी इन आक्रमणकारियों द्वारा कई अन्य स्थानों पर विजय का उल्लेख करते हैं, लेकिन उज्जैन के बारे में, उन्होंने केवल उल्लेख किया कि शहर पर हमला किया गया था। यह एक अनकही स्वीकारोक्ति प्रतीत होती है कि आक्रमण असफल रहा। अर्ध-पौराणिक गुहिल शासक बप्पा रावल जब 7वीं-8वीं सदी की दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति, उमय्यद खलाफत की विशाल सेना को भारत की धरती पर गाजर-मूली की तरह काट दिया गया था। जब दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अरबों के कदमों में था 7वीं सदी के उत्तरार्ध और 8वीं सदी की शुरुआत में अरबी खलाफत का परचम पूरे स्पेन, उत्तरी अफ्रीका, मध्य एशिया और पूरे पारस (ईरान) पर फहरा रहा था। इस तबाही ने पुरानी शक्तियों को कमजोर कर दिया, लेकिन यही तबाही भारत के तीन महान जननायकों के उदय का कारण बनी। उत्तर-पश्चिम से (मालवा/जालोर) नागभट्ट प्रथम । मेवाड़ (राजस्थान) से बप्पा रावल । दक्षिण (गुजरात) से अवनिजानाश्रय पुलकेशी । 738 ईस्वी में जब अरबी सेना दक्षिण भारत की ओर कदम बढ़ा रही थी, तो गुजरात के नवसारी के पास भारतीय संयुक्त सेना ने अरबों को चारों तरफ से घेर लिया। यह युद्ध इतिहास के सबसे भयानक पैदल और घुड़सवार संघर्षों में से एक था। नागभट्ट प्रथम और बप्पा रावल की सेनाओं ने अरबों के अग्रिम मोर्चे को छिन्न-भिन्न कर दिया, जबकि अवनिजानाश्रय पुलकेशी के चालुक्य वीरों ने उन्हें दक्षिण की ओर से घेरकर ऐसा प्रहार किया कि अरब सेना की रीढ़ टूट गई। हजारो अरबी सैनिक मारे गए और बची-खुची सेना बदहवास होकर सिंध की ओर भागी। ने भी अरब आक्रमण को निष्फल कर दिया था। इतिहासकार आर.वी. सोमानी का मानना ​​है कि वह नागभट्ट द्वारा गठित एक अरब-विरोधी संघ का हिस्सा था।History Of Pratihar Dynasty इन्हें भी देखें राजस्थान का युद्ध अरबों का सिन्ध पर आक्रमण मिहिरकुल का ग्वालियर शिलालेख सन्दर्भ श्रेणी:गुर्जर-प्रतिहार राजवंश श्रेणी:8वीं सदी के भारतीय सम्राट