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411 समाचार
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अब्दुलरज्जाक गुरनाह

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अब्दुलरज्जाक गुरनाह अब्दुलरज्जाक गुरनाह Abdulrazak Gurnah 2024 (cropped).jpg 1948 12 20 yes ज़ांज़ीबार सल्तनत (अब तंजानिया) उपन्यासकार, शिक्षाविद, साहित्यकार अंग्रेज़ी यूनाइटेड किंगडम, तंजानिया केंट विश्वविद्यालय (पीएच.डी.) पैराडाइज़ (1994),https://thebookerprizes.com/the-booker-library/books/paradise Paradise The Booker Prizes 1 जून 2026 बाय द सी (2001),https://thebookerprizes.com/the-booker-library/books/by-the-sea By the Sea The Booker Prizes 1 जून 2026 डेज़र्शन (2005),Gurnah Abdulrazak Desertion https://archive.org/details/desertion00gurn 2005 Pantheon Books आफ्टरलाइव्स (2020)https://www.theguardian.com/books/2020/sep/16/afterlives-by-abdulrazak-gurnah-review-living-through-colonialism Afterlives by Abdulrazak Gurnah review – living through colonialism The Guardian 16 सितम्बर 2020 1 जून 2026 साहित्य में नोबेल पुरस्कार (2021) अब्दुलरज्जाक गुरनाह (अंग्रेज़ी: Abdulrazak Gurnah; जन्म: 20 दिसंबर 1948) एक तंजानियाई मूल के ब्रिटिश उपन्यासकार और शिक्षाविद हैं। उनका जन्म ज़ांज़ीबार सल्तनत (जो अब तंजानिया का एक स्वायत्त हिस्सा है) में हुआ था। 1960 के दशक में ज़ांज़ीबार क्रांति के दौरान हुई भारी राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसा के बाद, उन्हें एक शरणार्थी के रूप में अपना देश छोड़कर यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) जाना पड़ा।https://www.bbc.com/news/entertainment-arts-58828947 Nobel Literature Prize 2021: Abdulrazak Gurnah named winner BBC News 7 अक्टूबर 2021 1 जून 2026 उनके उपन्यास मुख्य रूप से पूर्वी अफ्रीका में उपनिवेशवाद के विनाशकारी प्रभावों, विस्थापन, और शरणार्थियों के मार्मिक अनुभवों पर गहराई से प्रकाश डालते हैं। साहित्य जगत में उनके इसी अद्वितीय और करुणापूर्ण योगदान के लिए, वर्ष 2021 में उन्हें साहित्य के सर्वोच्च सम्मान नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।https://www.nobelprize.org/prizes/literature/2021/gurnah/facts/ The Nobel Prize in Literature 2021: Abdulrazak Gurnah Nobel Prize Outreach AB 1 जून 2026 प्रारंभिक जीवन और निर्वासन अब्दुलरज्जाक गुरनाह का जन्म 20 दिसंबर 1948 को हिंद महासागर में स्थित एक सांस्कृतिक रूप से विविध द्वीप, ज़ांज़ीबार में हुआ था। यह द्वीप सदियों से अफ़्रीकी, अरब, भारतीय और यूरोपीय संस्कृतियों का मिलन स्थल रहा है। गुरनाह की मातृभाषा स्वाहिली (Swahili) है, लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा और साहित्यिक लेखन के लिए अंग्रेज़ी भाषा को अपनाया। 1963 में ज़ांज़ीबार को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से शांतिपूर्ण तरीके से स्वतंत्रता मिली। हालाँकि, यह शांति अधिक समय तक नहीं टिक सकी। जनवरी 1964 में ज़ांज़ीबार क्रांति हुई, जिसमें अफ़्रीकी बहुसंख्यक वर्ग ने अरब और एशियाई मूल के नागरिकों के खिलाफ भारी विद्रोह कर दिया। इस क्रांति के दौरान व्यापक हिंसा, उत्पीड़न और नरसंहार हुए। इन हिंसक और असुरक्षित परिस्थितियों के कारण, गुरनाह को 1968 में मात्र 20 वर्ष की आयु में अपना घर और परिवार छोड़ना पड़ा। वे एक शरणार्थी के रूप में इंग्लैंड पहुँच गए। निर्वासन का यह दर्द उनके जीवन और उनके साहित्य दोनों का केंद्र बन गया।Abdulrazak Gurnah Is Awarded the Nobel Prize in Literature https://www.nytimes.com/2021/10/07/books/nobel-prize-literature-abdulrazak-gurnah.html The New York Times 7 अक्टूबर 2021 1 जून 2026 अकादमिक करियर इंग्लैंड आने के बाद, गुरनाह ने क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कैंटरबरी में अपनी प्रारंभिक उच्च शिक्षा पूरी की। इसके बाद, उन्होंने केंट विश्वविद्यालय से अपनी शिक्षा जारी रखी, जहाँ से उन्होंने 1982 में पश्चिम अफ़्रीकी साहित्य पर शोध करते हुए अपनी पीएचडी (पीएच.डी.) की उपाधि प्राप्त की।https://www.britannica.com/biography/Abdulrazak-Gurnah Abdulrazak Gurnah: British author Encyclopedia Britannica 1 जून 2026 उनका अकादमिक करियर भी उनके लेखन की तरह ही प्रभावशाली रहा है। 1980 से 1983 तक, उन्होंने नाइजीरिया के बायेरो विश्वविद्यालय में व्याख्याता के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे केंट विश्वविद्यालय लौट आए, जहाँ उन्होंने अंग्रेजी विभाग में प्रोफेसर के रूप में कई दशकों तक छात्रों का मार्गदर्शन किया। वे मुख्य रूप से उत्तर-औपनिवेशिक साहित्य के विशेषज्ञ माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, गुरनाह अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक पत्रिका वासाफिरी के एक प्रमुख योगदानकर्ता और संपादक भी रहे हैं। अपनी सेवानिवृत्ति के बाद से वे अंग्रेजी और उत्तर-औपनिवेशिक साहित्य के 'एमेरिटस प्रोफेसर' हैं।https://www.kent.ac.uk/english/people/3371/gurnah-abdulrazak Professor Abdulrazak Gurnah: Emeritus Professor of English and Postcolonial Literatures University of Kent 1 जून 2026 साहित्यिक विषय और लेखन शैली गुरनाह ने अपना लेखन कार्य 21 वर्ष की आयु में इंग्लैंड में निर्वासन के दौरान शुरू किया था। उनके लेखन के मुख्य विषय स्मृति, पहचान का संकट, घर से दूर होने का मनोवैज्ञानिक दर्द, और उपनिवेशवाद के बाद पूर्वी अफ़्रीकी समाजों में आए जटिल बदलाव हैं। वे अपनी कहानियों में प्रवासन के दर्द को बिना किसी अतिशयोक्ति के, अत्यंत यथार्थवादी और संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका गद्य शांत, विचारशील और ऐतिहासिक रूप से सटीक होता है। प्रमुख कृतियाँ और उनका महत्व गुरनाह ने अब तक कई शानदार उपन्यास लिखे हैं, जिनमें से कुछ सबसे प्रमुख निम्नलिखित हैं: पैराडाइज़ - 1994: यह गुरनाह का सबसे प्रसिद्ध उपन्यास है जिसे बुकर पुरस्कार (Booker Prize) के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था।https://thebookerprizes.com/the-booker-library/authors/abdulrazak-gurnah Abdulrazak Gurnah - The Booker Prizes The Booker Prizes 1 जून 2026 इसकी कहानी प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पूर्वी अफ्रीका की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह यूसुफ नामक एक युवा लड़के की कहानी है, जिसे उसके पिता के कर्ज के बदले एक अमीर व्यापारी के पास गिरवी रख दिया जाता है। यह उपन्यास अफ़्रीकी समाज पर यूरोपीय उपनिवेशवाद के शुरुआती प्रभावों को अत्यंत सूक्ष्मता से दर्शाता है। बाय द सी - 2001: इस उपन्यास को भी बुकर पुरस्कार की लॉन्गलिस्ट में शामिल किया गया था। यह सालेह उमर नामक एक बुजुर्ग शरणार्थी की कहानी है, जो ज़ांज़ीबार से भागकर फर्जी वीज़ा पर ब्रिटेन पहुँचता है। यह किताब ब्रिटेन की कठोर शरणार्थी नीतियों और एक प्रवासी के अकेलेपन का मार्मिक चित्रण करती है। डेज़र्शन - 2005: यह उपन्यास 1899 और 1950 के दशक के बीच ज़ांज़ीबार में दो अलग-अलग पीढ़ियों की त्रासद प्रेम कहानियों के माध्यम से साम्राज्यवादी इतिहास और व्यक्तिगत नियति के टकराव को दर्शाता है। आफ्टरलाइव्स - 2020: उनका यह नवीनतम उपन्यास जर्मन औपनिवेशिक शासन के दौरान अफ़्रीकी लोगों के जीवन और प्रथम विश्व युद्ध में अफ़्रीकी सैनिकों (जिन्हें 'अस्कारी' कहा जाता था) के अनुभवों को प्रस्तुत करता है। यह पूर्वी अफ्रीका के उस भूले हुए इतिहास को उजागर करता है जिसे पश्चिमी साहित्य ने अक्सर अनदेखा किया है।https://www.theguardian.com/books/2021/oct/07/abdulrazak-gurnah-wins-the-2021-nobel-prize-in-literature Abdulrazak Gurnah wins the 2021 Nobel prize in literature The Guardian 7 अक्टूबर 2021 1 जून 2026 नोबेल पुरस्कार (2021) 7 अक्टूबर 2021 को, स्वीडिश अकादमी ने साहित्य जगत को चौंकाते हुए अब्दुलरज्जाक गुरनाह को साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की। नोबेल समिति ने उनके लेखन की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें "उपनिवेशवाद के प्रभावों और संस्कृतियों एवं महाद्वीपों के बीच की खाई में शरणार्थियों के भाग्य की करुणापूर्ण और समझौताहीन पड़ताल के लिए" दिया जा रहा है।https://www.nobelprize.org/prizes/literature/2021/press-release/ Press release: The Nobel Prize in Literature 2021 Nobel Prize Outreach AB 7 अक्टूबर 2021 1 जून 2026 इस पुरस्कार के साथ ही, वे प्रसिद्ध लेखक वोले सोयिंका के बाद साहित्य का नोबेल जीतने वाले पहले अश्वेत अफ़्रीकी लेखक बन गए। गुरनाह ने इस पुरस्कार को पूर्वी अफ़्रीकी साहित्य और शरणार्थियों के संघर्षों को वैश्विक मंच पर मान्यता मिलने के रूप में देखा। कृतियों की सूची अब्दुलरज्जाक गुरनाह द्वारा अंग्रेजी में लिखित प्रमुख उपन्यासों और उनके प्रकाशन वर्ष की सूची इस प्रकार है: उपन्यास: मेमोरी ऑफ़ डिपार्चर, 1987Gurnah Abdulrazak Memory of Departure 1987 Jonathan Cape पिलग्रिम्स वे, 1988Gurnah Abdulrazak Pilgrims Way 1988 Jonathan Cape डॉटि, 1990Gurnah Abdulrazak Dottie 1990 Jonathan Cape पैराडाइज़, 1994https://thebookerprizes.com/the-booker-library/books/paradise Paradise The Booker Prizes 1 जून 2026 एडमायरिंग साइलेंस, 1996Gurnah Abdulrazak Admiring Silence https://archive.org/details/admiringsilence00abdu 1996 The New Press बाय द सी, 2001https://thebookerprizes.com/the-booker-library/books/by-the-sea By the Sea The Booker Prizes 1 जून 2026 डेज़र्शन, 2005Gurnah Abdulrazak Desertion https://archive.org/details/desertion00gurn 2005 Pantheon Books द लास्ट गिफ्ट, 2011Gurnah Abdulrazak The Last Gift https://archive.org/details/lastgift0000gurn 2011 Bloomsbury Publishing ग्रेवल हार्ट, 2017Gurnah Abdulrazak Gravel Heart https://archive.org/details/gravelheart0000gurn 2017 Bloomsbury Publishing आफ्टरलाइव्स, 2020https://www.theguardian.com/books/2020/sep/16/afterlives-by-abdulrazak-gurnah-review-living-through-colonialism Afterlives by Abdulrazak Gurnah review – living through colonialism The Guardian 16 सितम्बर 2020 1 जून 2026 इन्हें भी देखें बुकर पुरस्कार शरणार्थी सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ियाँ NobelPrize.org पर अब्दुलरज्जाक गुरनाह श्रेणी:1948 में जन्मे लोग श्रेणी:ज़ांज़ीबार श्रेणी:जीवित लोग श्रेणी:नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार