411 REFERENCE · Wikipedia
सीतापुर
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
सीतापुर Sitapur Sitapur Jn Railway Station Outside View 1.jpg सीतापुर जंक्शन रेलवे स्टेशन सीतापुर India Uttar Pradesh 27.57 80.66 inline, title उत्तर प्रदेश में स्थिति देश प्रान्त उत्तर प्रदेश ज़िला सीतापुर ज़िला तहसील 138 177234 2011 भाषाएँ प्रचलित हिन्दी भामस +5:30 पिनकोड 261001 दूरभाष कोड UP-34
सीतापुर (Sitapur) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के सीतापुर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।"Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716"Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC 23 अप्रैल 2017," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975
विवरण
उत्तर प्रदेश राज्य के अवध क्षेत्र में लखनऊ एवं शाहजहांपुर मार्ग के मध्य में सरायन नदी के किनारे पर स्थित है। यह जिला सदैव धार्मिक सहिष्णुता और गंगा जमुनी तहज़ीब को शिखर पर ले जाने वाले जिलों में शुमार किया जाता है। सीतापुर नगर में भारत का प्रसिद्ध नेत्र अस्पताल है। सीतापुर गुड़, गल्ला, दरी की बड़ी मंडी है। यहाँ एक बहुत बड़ा आँख का अस्पताल जिसकी स्थापना प्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ महेश प्रसाद मेहरे ने की थी, सैनिक छावनी तथा उत्तर एवं पूर्वोत्तर रेलवे के जंक्शन हैं, प्लाईवुड और तीन बड़े शक्कर के मिल हैं। आजकल ये जनपद औद्योगिक बिन्दु से महुत महत्वपूर्ण नहीं है । इस ज़िले में 5 चीनी मिले , चावल व आटा मिलें कार्यरत हैं। यह जनपद मुख्य रूप से सूती व ऊनी दरियों के लिये प्रसिद्ध है । लहरपुर और खैराबाद विशेष रूप से इसके उत्पादन एवं निर्यात के लिए प्रसिद्ध हैं । यहाँ बनने वाली सूती और ऊनी दरियां देश ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध हैं। सीतापुर अपनी मूँगफलियों के लिए भी प्रसिद्ध है।
इतिहास
यदि सीतापुर के प्राचीन इतिहास को देखें तो संपूर्ण ज़िला गुप्त काल तथा गुप्त प्रभावित मूर्तियों तथा इमारतों से भरा हुआ था। मनवाँ, हरगाँव, बड़ा गाँव, नसीराबाद आदि पुरातात्विक महत्व के स्थान हैं। विजयेन्द्र कुमार माथुर ने लेख किया है। हट, ऊजठ (AS, p.104) उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले में स्थित है। 9वीं शताब्दी ईस्वी के एक मंदिर के अवशेष यहाँ से उत्खनन द्वारा प्राप्त हुए हैं। उत्तर प्रदेश शासन ने ऊजठ में विस्तृत रूप से खुदाई की थी। 'नैमिषारण्य' और 'मिश्रिख' पवित्र तीर्थ स्थल हैं। यह सूफियों एवं पैगंबरों की धरती है। इस पावन धरती पर ऋषि वेद व्यास द्वारा पुराणों की रचना की गई । हिन्दू मतानुसार , "पाँच धाम यात्रा" तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक नीमसार अथवा नैमिषारण्य के दर्शन नहीं कर लिए जाते । नैमिषारण्य सीतापुर का एक प्राचीन धार्मिक स्थल है। हज़रत मखदूम साहब, खैराबाद और हज़रत गुलज़ार शाह , बिसवां की दरगाह सामाजिक समरसता की मिसालें हैं ।
प्रारंभिक मुस्लिम काल के लक्षण केवल भग्न हिन्दू मंदिरों और मूर्तियों के रूप में ही उपलब्ध हैं। इस युग के ऐतिहासिक प्रमाण शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित कुओं और सड़कों के रूप में दिखाई देते हैं। उस युग की मुख्य घटनाओं में से एक तो खैराबाद के निकट हुमायूँ और शेरशाह के बीच युद्ध और दूसरी राजा सुहेलदेव और सैयद सालार मसूद ग़ाज़ी के बीच बिसवां और तंबौर के युद्ध हैं। सीतापुर के निकट स्थित खैराबाद मूलत: प्राचीन हिन्दू तीर्थ मानसछत्र था। मुस्लिम काल में खैराबाद, सिधौली के निकट बाड़ी, बिसवाँ इत्यादि इस ज़िले के प्रमुख नगर थे। ब्रिटिश काल (1856) में खैराबाद को छोड़कर ज़िले का केंद्र सीतापुर नगर में बनाया गया। सीतापुर का तरीनपुर मोहल्ला प्राचीन स्थान है, इसका प्राचीन नाम छीतापुर पडा,इसका प्रथम उल्लेख राजा टोडरमल के बंदोबस्त में छितियापुर के नाम से आता है। बहुत दिन तक इसे छीतापुर कहा जाता रहा, जो गाँवों में अब भी प्रचलित हैं। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में सीतापुर का प्रमुख हाथ था। बाड़ी के निकट सर हीपग्रांट तथा फैजाबाद के मौलवियों के बीच निर्णंयात्मक युद्ध हुआ था।
17वीं तथा 18वीं शताब्दी में यह स्थान वस्त्र उद्योग के लिए ख्यात था । ईस्ट इंडिया कंपनी ने खैराबाद और दरियाबाग में बनने वाले हैंडलूम कपड़ों का निर्यात करना प्रारंभ कर दिया । बिसवाँ क्षेत्र मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए मशहूर था । यह जनपद दरवाज़ों पर उभरी नक्काशी के लिए भी जाना जाता था। सीतापुर जिले की ही भूमि से 'सुदामा चरित्र' लिखने वाले महाकवि नरोत्तमदास, 'कुरीति गढ़ संग्राम' रचित करने वाले प्रसिद्ध संत एवं कवि रामआसरे दास नाई , महान क्रांतिकारी और 1857 के गदर के लिए बहादुर शाह जफर को फतवा जारी करने वाले अल्लामा फजले हक खैराबादी, प्रसिद्ध उर्दू विद्वान काज़ी अब्दुल सत्तार, प्रसिद्ध क्रांतिकारी इंद्रदेव सिंह, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य नरेंद्र देव एवं बाबू कन्हैया लाल महेंद्र, उर्दू विद्वान एवं कवि जान निसार अख्तर, फिल्म निर्देशक वजाहत मिर्ज़ा, परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडे, एवं प्रसिद्ध अवधी कवि बलभद्र प्रसाद दीक्षित जैसे महाज्ञानियो, महापुरुषों ने इस पावन सीतापुर की धरती पर जन्म लिया।
आवागमन
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 यहाँ से गुज़रता है और इसे कई स्थानों से जोड़ता है।
इन्हें भी देखें
सरायन नदी
सीतापुर ज़िला
सन्दर्भ
श्रेणी:सीतापुर ज़िला
श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नगर
श्रेणी:सीतापुर ज़िले के नगर
*