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सरिय्या खालिद बिन वलीद (दूमतुल जन्दल)
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अंगूठाकार|सहाबा अरबी भाषा सुलेख
सरिय्या खालिद बिन वलीद (दूमतुल जन्दल) (अंग्रेज़ी: Expedition of Khalid ibn al-Walid (Dumatul Jandal) इस्लामिक अभियान है जिस में ख़ालिद बिन वलीद को इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद के आदेश पर चार सौ बीस घुड़सवारों के साथ दूमतुल जन्दल के ईसाई अरब राजा इखेदर को लाने के लिए खालिद को रज्जब 9 हिजरी में भेजा गया था।Abū Khalīl Shawqī Atlas of the Quran https://books.google.com/books?id=8BziirH6UKMC&pg=PA244 Dar-us-Salam 2003 978-9960-897-54-7 244
पैग़म्बर ने खालिद बिन वलीद से कहा, "तुम अकीदार को एक गाय का शिकार करते हुए पाओगे। यदि तुम उसके पास पहुँचे, तो उसे मत मारो, बल्कि उसे जीवित पकड़कर मेरे पास लाओ।" तो खालिद बिन वलीद ने इखेदर और उसके भाई हसन को चांदनी रात में शिकार करते पाया। चूंकि हसन ने खालिद बिन वलीद के साथ युद्ध शुरू कर दिया था। इसलिए, उसने उसे मार डाला, लेकिन इखेदर को गिरफ्तार कर लिया और उसे इस शर्त पर रिहा कर दिया कि वह मदीना बरगाह अल-अकदास में दिखाई देगा और सुलह करेगा। इसलिए वह मदीना आए और पैगंबर ﷺ ने उन्हें शांति प्रदान की।
इस्लामिक स्रोत
रज्जब 9 हिजरी में, अल्लाह के रसूल ने खालिद बिन वलीद (आरए) को चार सौ बीस घुड़सवारों के साथ दुमत अल-जंदल की ओर भेजा और कहा: "तुम अकीदार को जंगली सांडों का शिकार करते पाओगे।" इसलिए जब खालिद बिन वलीद वहां पहुंचे तो उन्होंने अकीदार और उसके साथियों को चांदनी रात में शिकार करते देखा और उन्होंने उसे घेर लिया। अकीदार का भाई हसन बिन अब्दुल मलिक वापस लड़ा और मारा गया, और उसके साथी भाग गए। इखदर ने खालिद बिन वालिद के साथ इस शर्त पर शांति स्थापित की कि जब तक वह ईश्वर के दूत से नहीं मिलेंगे, तब तक उनका जीवन सुरक्षित रहेगा और उन्होंने दो हजार ऊंट, आठ सौ घोड़े, चार सौ कवच और चार सौ भाले देने का वादा किया। इसलिए खालिद बिन वलीद ने बिना किसी लड़ाई के अपने किले पर कब्जा कर लिया और उस किले को अल्लाह के रसूल ﷺ की सेवा में प्रस्तुत कर दिया।
इब्न हजर अस्कलानी (मृत्यु 852 हिजरी) ने बजीर बिन बजरा की परंपरा से इब्न इशाक के संदर्भ में लिखा है कि जब अकीदार अल्लाह के रसूल की सेवा में आए, तो उन्होंने पैगंबर की प्रशंसा में कुछ कविताएं पढ़ीं। अल्लाह, उस पर शांति हो।
उसने कहा: "अल्लाह तुम्हारा चेहरा सलामत रखे" जिसके आशीर्वाद से अकीदार नब्बे साल से अधिक जीवित रहे, लेकिन उनका एक भी दांत नहीं चला। अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने उन्हें एक भरोसे का पत्र लिखा और उन्हें और उनके भाई मसाद को जजिया देने के लिए सहमत होने के बाद अपनी मातृभूमि, दुमत अल-जंदल में लौटने की अनुमति दी। इतिहासकार अल-वक़्दी ने इस ट्रस्ट डीड का पाठ दिया है और लिखा है कि उस समय अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मुहर नहीं लगी थी, इसलिए अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अल्लाह का आशीर्वाद उस पर हो) उस ट्रस्ट डीड पर अपना अंगूठा लगाया।المغازی: جلد 3، صفحہ 1025۔
खालिद सैन्य नेत्तृव
ख़ालिद बिन वलीद
वर्ष लड़ाई/युध्द नेतृत्व/विवरण23 मार्च 625हुद की लड़ाई 629 ग़ज़वा ए मूताखालिद बिन वालिद ने विशाल रोम सेना के सामने एक छोटी सी मुस्लिम सेना का नेत्तृव किया और रोमन सेना को बुरी तरह पराजित कर विजय प्राप्त की ।अप्रैल 633 चेन्स की लड़ाईखालिद बिन वालिद की फारसी साम्राज्य के विरुध्द पहली लड़ाई थीमई 633 बलाजा की लड़ाई खालिद बिन वालिद निर्णाक पैंतरेबाजी का उपयोग कर फारसी साम्राज्य की बड़ी ताकतों को हरा दिया ।मई 633 उल्लेश की लड़ाई नबम्वर 633 जुमाइल की लड़ाई फारसी साम्राज्य को पराजित करके मेसोपोटामिया, इराक पर विजय प्राप्त की ।जनवरी 634 फिराज की लड़ाई इस लड़ाई में खालिद बिन वालिद ने फारसी साम्राज्य और ईसाई अरबो की बड़ी संयुक्त सेना को हरा दिया था ।जून–जूलाई 634 बोसरा की लड़ाई खालिद बिन वालिद के नेत्तृव में अरब मुस्लिम सेना ने रोमन और ईसाई अरबों की एक विशाल सेना को हरा कर सीरिया के छोटे से शहर वोसरा जीता,जूलाई 634 अजंदायन की लड़ाई मुस्लिम सेना खालिद बिन वालिद के नेत्तृव तथा रोमन सेना हरक्यूलस के नेत्तृव में एक बड़ी लड़ाई हुई थी जिसमें मुस्लिम सेना ने विजय प्राप्त की ।635 फाल्ह की लड़ाई खालिद बिन वालिद ने रोमन साम्राज्य को हरा कर रोमन साम्राज्य से फिलिस्तीन, जार्डन और सीरिया को जीता जिसका नेत्तृव हरक्यूलस ने किया था ।अगस्त 636 यर्मोक का युद्ध खालिद बिन वालिद के नेत्तृव में रोमन साम्राज्य को अरब मुस्लिम सेना ने बुरी तरह पराजित किया ।637 आयरन ब्रिज की लड़ाई हरक्यूल्स को पराजित किया , अन्तिम लड़ाई थी खालिद बिन वालिद ने जिसमें रोमन सेना को हराकर उत्तरी सीरिया तथा दक्षिण तुर्की पर विजय प्राप्त की ।637 हजिर की लड़ाई खालिद बिन वालिद के नेत्तृव में मुस्लिम सेना ने सीरिया में स्थित वाईजेंटाईन चौकी किन्नासरीन से रोमन सेना को भगाया !
सराया और ग़ज़वात
अरबी शब्द ग़ज़वा Ghazwa https://en.wiktionary.org/wiki/ghazwa इस्लाम के पैग़ंबर के उन अभियानों को कहते हैं जिन मुहिम या लड़ाईयों में उन्होंने शरीक होकर नेतृत्व किया,इसका बहुवचन है गज़वात, जिन मुहिम में किसी सहाबा को ज़िम्मेदार बनाकर भेजा और स्वयं नेतृत्व करते रहे उन अभियानों को सरियाह(सरिय्या) या सिरया कहते हैं, इसका बहुवचन सराया है।siryah https://en.wiktionary.org/wiki/siryah#English
ग़ज़वात और सराया की तफसील, पुस्तक: मर्दाने अरब, पृष्ट ६२] https://archive.org/details/mardane-arab-hindi-volume-no.-1/page/n32/mode/1up
इन्हें भी देखें
ख़ालिद बिन वलीद
सरिय्या खालिद बिन वलीद (बनू जज़िमा)
सरिय्या खालिद बिन वलीद (नख़ला)
मुहम्मद की सैन्य उपलब्धियाँ
मुहम्मद के अभियानों की सूची
ग़ज़वा ए दूमतुल जन्दल
सन्दर्भ
श्रेणी:मुहम्मद
श्रेणी:इस्लाम
श्रेणी:इस्लाम का इतिहास
श्रेणी:अरब इतिहास
श्रेणी:मुस्लिम विजय
बाहरी कड़ियाँ
शमशीरे बेनियाम (तारीखी नावल)