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411 समाचार
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छत्तीसगढ़ की नदियाँ

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सितंबर 2024 छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, वन क्षेत्र, पर्वतों से संपन्न प्रदेश है। छत्तीसगढ़ में कई नदियाँ प्रवाहित होती हैं। कुछ प्रमुख नदियों के बारे में जानकारी महानदी प्रदेश के मध्य भाग से पादपाकार में प्रवाहित होने वाली प्रमुख अनुवर्ती नदी है। धमतरी जिले के सिहावा पर्वत के पूर्वी भाग से निकलती है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि महानदी के जल का स्त्रोत श्रृंगी पर्वत की ऊंची चोटी से है। अपने उद्गम स्थल से 27.3 कि.मी. उत्तर दिशा की ओर प्रवाहित होने के पश्चात् दुधावा के बाद पश्चिम दिशा की ओर मुड़कर प्रवाहित होने लगती है। इस समय यह नदी नीस चट्टान पर लाल रेतीली मिट्टी से प्रवाहित होती है। कांकेर के उत्तर-पूर्व से महानदी की प्रवाह दिशा उत्तर-पश्चिम हो जाती है। उत्तर-पूर्व में चारामा के पूर्व से नदी कांकेर जिले को पार करके पुनः धमतरी जिले में प्रवेश करती है। कुछ दूर बहने के बाद इसकी दिशा उत्तर-पूर्व की ओर हो जाती है। रूद्री और धमतरी के पूर्व में काली मिट्टी में प्रवाहित होती हुई आगे बढ़ती है इसके आगे जब नदी उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ती हुई कुरूद के पूर्वी भाग से गरियाबंद जिले के नवापारा-राजिम के मध्य से रायपुर जिला के पूर्वी भाग में प्रवेश करती है। इसकी सहायक नदी पैरी राजिम में महानदी के दाहिने तट से मिलती है। राजिम को 'छत्तीसगढ़ का प्रयाग' कहते है। आरंग के पूर्व में रायपुर और महासमुंद जिले को सीमा में उत्तर-पूर्व दिशा को और आगे बढ़ती है। इसके आगे नदी बलौदाबाजार के मैदानी भागों में प्रवेश करती है तथा लवन और कसडोल के मध्य से प्रवाहित होती हुई कटगी के उत्तर में जांजगीर-चांपा जिले में प्रवेश करती है। शिवरीनारायण के दक्षिण में जोंक नदी दक्षिण दिशा से आकर महानदी में मिल जाती है। महानदी के जांजगीर-चांपा और बलौदाबाजार जिलों की सीमा में 91.5 कि.मी. बहने पर हसदो नदी जांजगीर-चांपा जिले में उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होती हुई फेरा के समीप महानदी में मिल जाती है। महानदी की सहायक नदी मांड़ जांजगीर-चांपा जिले को पूर्वी किनारे पर उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर प्रवाहित होती हुई चन्द्रपुर के पास महानदी में मिल जाती है। इसके बाद 13 कि.मी. तक सारंगढ़ और रायगढ़ के मध्य बहती है। इसके आगे 8 कि.मी. जाने पर उड़ीसा के सम्बलपुर में पहुंच जाती है। महानदी अपवाह क्षेत्र के अन्तर्गत गरियाबन्द, बलौदाबाजार, रायगढ़, रायपुर, महासमुन्द, धमतरी, जांजगीर-चांपा एवं उत्तर कांकेर जिले के क्षेत्र आते है। शिवनाथ नदी महानदी की प्रमुख सहायक नदी राजनांदगांव की दक्षिण-पश्चिम सीमा के पास बानबरस के पठार के कोलगुल से 626.4 मीटर की ऊंचाई से निकलती है। यह नदी अपने प्रारम्भिक प्रवाह के समय लगभग 40.2 कि.मी. तक पूर्व दिशा की ओर प्रवाहित होती है और अम्बागढ़ चौकी के पास उत्तर दिशा की ओर मुड़ जाती है। घुमाना नदी प्रवाहित होकर उत्तर से बहती हुई शिवनाथ नदी में मिल जाती है। डोंगरगांव और राजनांदगांव के पूर्व की ओर प्रवाहित होती हुई दुर्ग जिला में प्रवेश करती है। खरखरा नदी शिवनाथ में आकर मिल जाती है। इसी के आगे तान्दुला नदी भी खारून नदी में मिल जाती है। ये दोनों नदियाँ खारून की प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। धमधा के पूर्व तथा बेमेतरा के दक्षिण भाग से रायपुर ओर बेमेतरा जिले की. सीमा के सहारे-सहारे आगे बढ़ती है। सिमगा से 8 कि.मी. पहले सोमनाथ नामक स्थान पर खारून नदी शिवनाथ में मिल जाती है। नांदघाट के पास हाँप नदी शिवनाथ में मिलकर प्रवाहित होती है। सोमनाथ में संगम के बाद बेमेतरा और रायपुर जिले की सीमा में बहने के बाद यह बिलासपुर और रायपुर जिले की सीमा में प्रवाहित होती हुई शिवरीनारायण के पूर्व में यह नदी महानदी में मिलकर प्रवाहित होने लगती है। बहुत सी सहायक नदियाँ पश्चिम में मैकल श्रेणी से निकलकर शिवनाथ के उत्तर-पश्चिम भाग में आकर मिल जाती है। सोनबरसा, आमनेर, नानकट्टी, मनियारी तथा लीलागर नदियाँ प्रवाहित होकर शिवनाथ में मिल जाती है। यह नदी खरखरा, तान्दुला, खारून, हाप, मनियारी और लीलागर आदि नदियों से जल ग्रहण करती हैं। शिवनाथ नदी राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा की सीमा में प्रवाहित होती है। जल ग्रहण की दृष्टि से शिवनाथ बड़ी नदी है। बालौदाबाजार जिले में सिमगा और तरेंगा के पास पथरीला है। नदी को चौड़ाई अधिकांश भागों में 1.2 कि.मी. है। अनेक स्थानों पर तट की ऊंचाई 7 से 17 मी. के मध्य है। ऊपरी भागों में भारी या लगातार वर्षा से बाढ़ आ जाती है जिसके कारण नदी के मोड़ों में पानी भर जाता है। संगम के पास भी गांव तथा खेतों में बाढ़ का पानी भर जाता है। हसदेव नदी इस नदी का प्रवाह क्षेत्र कोरबा और जांजगीर-चांपा जिलों में है। यह नदी कोरिया जिले के बैकुंठपुर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित पहाड़ी के सोनहत पठार से निकलती है। प्रारंभ में यह नदी S की आकृति में दक्षिण-पश्चिम भाग में प्रवाहित होती हुई कोरबा जिले में प्रवेश करती है। पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होती हुई हसदो की सहायक टेन नदी हसदो के बांयी ओर से मिल जाती है। टेन और अहिरन दोनों पहाड़ी नदियां है जो हसदो के बांयी ओर से मिलती है। कटघोरा अहिरन नदी के किनारे स्थित है। अहिरन नदी को 'जटाशंकरी' भी कहा जाता है। हसदो नदी जांजगीर-चांपा जिले के दक्षिण भाग में शिवरीनारायण से 23 कि.मी. आगे महुआडीह और केरा के पास महानदी में मिल जाती है। नदी का उत्तरी भाग सकरी और गहरी है किन्तु बांगों के पास टेन नदी के मिल जाने से वहां की घाटी चौड़ी हो गई है। कटघोरा से कोरबा तक नदी में ढाल बहुत कम है। यह नदी पथरीली चट्टानों तथा घने जंगलों के मध्य से होकर गुजरती है। हसदो नदी घाटी पर मनेन्द्रगढ़, बैकुण्ठपुर रोड में 7 कि.मी. की दूरी पर अमृतधारा जलप्रपात है। बैकुण्ठपुर से 40 कि.मी. की दूरी पर गवरघाट जलप्रपात है। अरपा नदी इसका उद्गम जिला गौरेला पेण्ड्रा मरवाही के पठार की पहाड़ी से हुआ है। इसका उद्गम गौरेला विकासखंड के ग्राम खोडरी के समीप है या पेंड्रा विकासखंड के ग्राम अमरपुर के समीप, इस पर मतभेद है। धरातल पर भौगोलिक रूप से इसका उद्गम ग्राम खोडरी के समीप दिखता है। अरपा नदी छत्तीसगढ़ के शहर बिलासपुर की जीवन रेखा है। यह महानदी की सहायक नदी है। यह खोडरी, बेलगहना, बिलासपुर होते हुए प्रवाहित होती है और बरतोरी के निकट ठाकुर देवा नामक स्थान पर शिवनाथ नदी में मिल जाती है। इसकी लम्बाई 147 किलोमीटर है। रेणुका नदी यह सरगुजा,जिला(अंबिकापुर)के मतरिंगा पहाड़ी से निकलती है। बलरामपुर जिला से होते हुए सोन नदी में मिल जाती है,यह नदी सरगुजा की जीवन रेखा कहलाती है इस नदी पर यूपी के मिर्ज़ापुर जिला में सरदार वल्लभपंत सागर बांध बनाया गया है। रेणुका,गोबरी,दबरिया,घुंघुता आदि इसकी सहायक नदियां है। रेणुका नदी पर रकशगंडा जलप्रपात है। इसके अलावा इस नदी के किनारे महेशपुर(सरगुजा) प्राचीन स्थल स्थित है। रेणुका नदी को रिहंद नदी,रेड नदी अरण्य नदी आदि नामों से भी जाना जाता है। खारुन नदी खारून नदी का उद्गम पूर्वी बालोद के चोरहानाला के दक्षिण-पूर्व में पटेचुआ से हुई है। यह नदी प्रारंभ में उत्तर-पूर्व दिशा से आगे बढ़ती हुई बालोद और धमतरी की सीमा के सहारे उत्तर दिशा की ओर बढ़ती है। धमतरी में भखारा के पश्चिम भाग से खारून नदी बहती है अभनपुर के पश्चिम भाग में पाटन और परसदा के मध्य बेमेतरा और बलौदाबाजार सीमा में प्रवेश करती है और मगरघटा, कुम्हारी, भिभौरी होती हुई सोमनाथ नामक स्थान पर पहुंचती है। खारून नदी में जल की मात्रा पर्याप्त होती है। इसकी घाटी पर्याप्त चौड़ी है। इसकी तल चट्टानी है। यह नदी ग्रेनाइट और चूना पत्थर की चट्टानों पर लाल-पीली, रेतीली और जलोढ़ मिट्टी में प्रवाहित होती है। मनियारी नदी यह नदी बिलासपुर के उत्तर-पश्चिम में लोरमी पठार से निकलती है। इसका उद्गम स्थल मुखण्डा पहाड़ बेलपान के कुण्ड तथा लोरमी का पहाड़ी क्षेत्र है। यह दक्षिणी-पूर्वी भाग में बिलासपुर तथा मुंगेली तहसील की सीमा बनाती हुई प्रवाहित होती है। आगर, छोटी नर्मदा तथा घोंघा इसकी सहायक नदियां हैं। इस नदी पर खारंग मनियारी जलाशय का निर्माण किया गया है, जिससे मुंगेली तहसील के 42.510 हेक्टेअर क्षेत्र में सिंचाई की जाती है। इस नदी की कुल लंबाई 134 किलोमीटर है। लीलागर नदी इस नदी का उद्गम कोरबा की पूर्वी पहाड़ी से हुआ है। यह कोरबा क्षेत्र से निकलकर दक्षिण में बिलासपुर और जांजगीर तहसील की सीमा बनाती हुई शिवनाथ नदी में मिल जाती है। इस नदी की कुल लंबाई 135 किलोमीटर और प्रवाह क्षेत्र 2.333 वर्ग किलोमीटर है। इन्द्रावती नदी इन्द्रावती गोदावरी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह बस्तर की जीवनदायिनी नदी है। यह इस संभाग की सबसे बड़ी नदी है। इसका उद्गम उड़ीसा राज्य में कालाहाण्डी जिले के युआमल नामक स्थान में डोगरला पहाड़ी से हुआ है। यह आंध्रप्रदेश में जाकर गोदावरी नदी में मिल जाती है। जगदलपुर शहर इसी नदी के तट पर बसा हुआ है। इस नदी का प्रवाह क्षेत्र 26.620 वर्ग किलोमीटर है और लम्बाई 372 किलोमीटर है। डंकिनी और शंखिनी नदी - ये दोनों इन्द्रावती की सहायक नदियां है। कोटरी नदी यह इन्द्रावती की सबसे बड़ी सहायक नदी है। इसका उद्गम दुर्ग जिले से हुआ है। इसका अप्रवाह क्षेत्र दक्षिण-पश्चम सीमा पर राजनांदगांव की उच्च भूमि पर है। डंकिनी नदी किलेपाल एवं पाकनार की डांगरी-डोंगरी से तथा शंखिनी नदी बैलाडीला की पहाड़ी के 4,000 फीट ऊंचे नंदीराज शिखर से निकलती है। इन दोनों नदियों का संगम दन्तेवाड़ा में होता है। उद्गम - मोहला तहसील ( राजनांदगांव ) बाघ नदी यह नदी चित्रकूट प्रपात के निकट इन्द्रावती नदी से मिलती है। --गुडरा नदी== यह नदी छोटे-डोंगर की चट्टानों के बीच अबूझमाड़ की बनों से घिरी हुई पहाड़ियों से प्रवाहित होती है। मारी नदी यह नदी दक्षिण-पश्चिम दिशा में भैरमगढ़ से निकलकर बीजापुर की ओर प्रवाहित होती है। इसे मोरल नदी भी कहते हैं। सबरी नदी यह दन्तेवाड़ा के निकट बैलाडीला पहाड़ी से निकलती है और कुनावरम् (आन्ध्रप्रदेश) के निकट गोदावरी नदी में मिल जाती है। बस्तर जिले में इसका प्रवाह क्षेत्र 180 किलोमीटर है। तांदुला नदी शिवनाथ की सहायक तान्दुला नदी कांकेर के उत्तरी भाग भानुप्रतापपुर की पहाड़ियों से निकलती है। यहां उत्तर की ओर बहने के बाद बालोद जिले के दक्षिण भाग में डौंडी के पास प्रवाहित होती हुई, दल्ली राजहरा के पूर्वी भाग में प्रवाहित होती है। यहां बालोद और आदमाबाद स्थित हैं जहां तान्दुला बांध बनाया गया है। तान्दुला जलाशय का क्षेत्रफल 1761.3 हेक्टेयर है। इस बांध से शिवनाथ तथा खारून दोआब के मैदान की सिंचाई की जाती है। अधिकांश भाग रेतीली है और किनारे के भू-भाग अपेक्षाकृत नीची है। इसी घाटी में गहरी काली मिट्टी पाई जाती है। पैरी नदी यह महानदी की सहायक नदी है। भातृगढ़ पहाड़ी, तहसील बिंद्रानवागढ़, जिला गरियाबंद से निकलकर महानदी में राजिम में आकर मिलती है। इसकी प्रमुख सहायक नदी सोंढूर है जो कि नरियल पानी से निकलती है| पैरी नदी पर सिकासार परियोजना(1995)और सोंढूर नदी पर सोंढूर परियोजना (1979-80) संचालित है| इसकी लम्बाई 90 किलोमीटर है तथा प्रवाह क्षेत्र 3,000 वर्ग मीटर है। जोक नदी यह नदी रायपुर के पूर्वी क्षेत्र का जल लेकर शिवरीनारायण जांजगीर चाम्पा ठीक विपरीत दक्षिणी तट पर महानदी में मिलती है। इसकी रायपुर जिले में लम्बाई 90 किलोमीटर है तथा इसका प्रवाह क्षेत्र 2,480 वर्ग मीटर है। माण्ड नदी यह नदी मैनपाट के उत्तर-पूर्वी ढाल से जो अम्बिकापुर से (24 कि.मी.) दक्षिण-पूर्व से निकलती है। सरगुजा जिले के दक्षिण-पूर्व में 42 कि.मी. प्रवाहित होकर रायगढ़ की पश्चिमी सीमा में प्रवाहित होती हुई धरमजयगढ़, छाल और खरसिया होती हुई दक्षिण दिशा की ओर बहती है। मांड नदी के खरसिया के पूर्वी भाग से होती हुई चंवर ढाल को पार करके रायगढ़ बेसिन होती हुई जांजगीर-चांपा जिले की दक्षिण-पूर्वी सीमा को पार करके चन्द्रपुर के पास महानदी में मिल जाती है। यह नदी उद्गम के समय मैनपाट और दक्षिण-पूर्वी पाट के मध्य एक सकरी घाटी में बहती है। उदयपुर पठार में पहुंचकर छुरी हिल्स और उदयपुर के मध्य एक तंग घाटी में प्रवाहित होती है। मांड नदी के चांदा-डोंगर तथा भारी-डोंगर के बीच स्थित गुरदा के संकरे दरें को पार करने के पहले इस नदी में दाहिनी ओर से कोइरजा तथा चिन्दई नाले और बाई ओर से कुरकुट नदी आकर मिलती है।इसकी लम्बाई 155 किलोमीटर है। *