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भारतीय परमाणु परीक्षण
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thumbnail|rightभारतीय परमाणु आयोग ने पोखरण के मांडवा गांव में अपना पहला भूमिगत परिक्षण स्माइलिंग बुद्धा (पोखरण-१) १८ मई १९७४ को किया था।https://www.bbc.com/hindi/news/2011/05/110517_history_may18_sy इतिहास के पन्नों से... 21 मई 2018 https://web.archive.org/web/20180522090038/https://www.bbc.com/hindi/news/2011/05/110517_history_may18_sy 22 मई 2018 live हलांकि उस समय भारत सरकार ने घोषणा की थी कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यो के लिये होगा और यह परीक्षण भारत को उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिये किया गया है। बाद में ११ और १३ मई १९९८ को पाँच और भूमिगत परमाणु परीक्षण किये और भारत ने स्वयं को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया।https://scroll.in/article/810874/narasimha-rao-not-vajpayee-was-the-pm-who-set-india-on-a-nuclear-explosion-path Narasimha Rao, not Vajpayee, was the PM who set India on a nuclear explosion path 26 मई 2018 https://web.archive.org/web/20190530044127/https://scroll.in/article/810874/narasimha-rao-not-vajpayee-was-the-pm-who-set-india-on-a-nuclear-explosion-path 30 मई 2019 dead
भारत में परमाणु परीक्षण
भारत में ११ व १३ मई ९८ को बुद्ध-स्थल पर राजस्थान के पोखरण में दो तीन परमाणु विस्फोट होने से सारे विश्व में तहलका मच गया था। अब भारत भी परमाणु शक्तियों से संपन्न है। परीक्षण के इन धमाको से सारा संसार चकित रह गया। परीक्षण स्थल के आस-पास के मकानो में भी दरारें पड गई। किंतु राष्ट्र की इस महान उपलब्धि के सामने लोगों को अपने घरों के टूटने से इतनी चिंता नहीं हुई जितनी प्रसन्नता इस महान सफलता से हुई। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी २० मई को बुद्ध-स्थल पहुंचे। वही प्रधानमंत्री ने देश को एक नया नारा दिया'जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान'। सभी देशवासी प्रधान मंत्री के साथ-साथ गर्व से भर उठे। इन परीक्षणों का असर परमाणु संपन्न देशों पर बहुत अधिक हुआ। अमरीका, रूस, फ्रांस, जापान और चीन आदि देशों ने भारत को आर्थिक सहायता न देने की धमकी भी दी। किन्तु भारत इन धमकियों के सामने नहीं झुका।
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परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य
इन परीक्षणों को करने का मुख्य उद्देश्य विश्व को यह बता देना था कि पड़ोसी देशों की सामरिक योग्यता का वे मुँह तोड उत्तर देने में समर्थ थे। अपनी सुरक्षा ओर बचाव करने के लिए वे आत्मनिर्भर थे। भारत में इन परीक्षणों का विरोध करने वाले विकसित देश यह भुल गये थे कि भारत में १९७४ में एक और १९९८ में पाँच परमाणु परीक्षण हूए थे। जब कि इसके पहले पूरे विश्व में २०५२ परमाणु परीक्षण किये जा चुके थे। इन में से अमरीका ने सबसे अधिक ऐसे परीक्षण १९४५ से अब तक १०३२ किये हैं। इस के अतिरिक्त सोवियत संघ ने ७१५, फ्रांस ने २१०, ब्रिटेन ने ४५७ और चीन ने ४४ परमाणु परीक्षण किये हैं। पाकिस्तान ओर इजराइल के बारे में प्रायः कहा जाता है कि वे भी परमाणु परीक्षण की क्षमता रखते है और कभी भी उनकी ओर से परमाणु परीक्षण का समाचार मिल सकता है।
भारत के पांच परमाणु परीक्षण
भारत के कुल पांच मुख्य परमाणु परीक्षण है। उन को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बाँटा जा सकता है। ये चार तरह के परमाणु परीक्षण किये हैं -
(१) विखण्डनीय बम या फिशन डिवाइस बम: यह परमाणु बम बनाये जाने के लिए किया गया सामान्य परीक्षण था जिसकी क्षमता सन १९७४ में किये गये परीक्षण के समान अर्थात् १५ किलो टन थी।
(२) कम क्षमता वाला विस्फोट या लो यील्ट डिवाइस: इसकी क्षमता १० किलो टन से नीचे अर्थात् इकाई किलो टन क्षमता तक ही सीमित मानते है। इस परीक्षण का एक उद्देश्य ऐसे आंकडे प्राप्त करना था जिस से आगे जाकर प्रयोगशाला में कम्प्यूटर आधारित परीक्षण किये जा सकें।
(३) हाइड्रोजन बम परीक्षा या थर्मो न्यूक्लियर डिवाइस: इसे आज सुपर बम भी कहा जाता है। इसकी विनाशक क्षमता सामान्य परमाणु बम की तुलना में सौ से हजार गुणा तक अधिक है। परमाणु बम की विस्फोटक क्षमता को किलो टन में मापते है जबकि हाइड्रोजन बम की क्षमता को मेगावाट में नापते है।
(४) सब किलो टन परिक्षण भारत में १३ मई को पुनः दो परिक्षण किये गये। ये परिक्षण सब किलोटन या एक किलोटन से कम क्षमता वाले थे। इस परिक्षण के बाद यह दावा किया गया है कि इन से भारत में कम्प्यूटर अनुकरण एवं प्रयोगशालाओं में किये जाने वाले अपक्रान्तिक परिक्षण की क्षमता प्राप्त करली है।
परमाणु हथियारों का विनाश असम्भव
आज विश्व में लगभग ६० हजार परमाणु हथियार हैं जिन को नष्ट करने में कम से कम २० से २५ वर्ष लगेंगे। निरस्त्रीकरण के फलस्वरुप केवल १० हजार परमाणु हथियार ही नष्ट हो सके। इस से स्प्ष्ट है कि परमाणु हथियारों का खतरा तो बना ही रहेगा। इसलिए भारत ने अपनी आत्मरक्षा के लिए यह प्रयास किया है।
भारत में परमाणु बम का परीक्षण https://web.archive.org/web/20210521063854/https://www.besthindinews.com/2016/01/india-hydrogen-bomb-test-created-same-situation-like-north-korea.html 21 मई 2021
जब चीन और अमेरिका जैसे देशों के पास हाइड्रोजन बम हो गए तो इन्होने एक संगठन बनाकर दुनिया पर दादागिरी दिखानी शुरू कर दी और दूसरे देशों द्वारा शुरू किये गए परमाणु कार्यक्रमों का विरोध शुरू कर दिया। चीन ने भारत पर दादागिरी दिखानी शुरू कर दी जिससे भारत को भी हाइड्रोजन बम बनाने का दबाव पड़ा। इसके बाद भारत ने सीक्रेट मिशन के तहत परमाणु बम बनाना शुरू किया और 11 मई 1998 में अटल विहारी वाजपयी की सरकार में हाइड्रोजन बम का सफल परीक्षण किया। भारत सरकार ने किसी भी देश को इस परीक्षण की खबर तक नहीं लगने दी और जैसे ही परीक्षण किया गया, पूरी दुनिया में कोहराम मच गया।
उस समय भारत की भी इसी तरह से आलोचना हो रही थी जिस तरह से आज उत्तर कोरिया की हो रही है। यूनाइटेड नेशन ने भारत पर सभी तरह के आर्थिक प्रतिबन्ध लगा दिए जिसका खामियाजा अटल बिहारी वाजपेयी को भुगतना पड़ा और भारत के आर्थिक विकास को काफी नुकसान हुआ लेकिन उसका फायदा यह हुआ कि चीन ने हम पर दादागिरी दिखानी बंद कर दी। आज भारत चीन से भी तेज गति से विकास कर रहा है।
भारत के अलावा पाकिस्तान और इजराइल भी हाइड्रोजन बम रखने का दावा करते हैं लेकिन इजराइल ने आज तक किसी भी परमाणु बम का परीक्षण नहीं किया है और पाकिस्तान के परीक्षण में वो धार नहीं थी जो एक हाइड्रोजन बम में होनी चाहिए।
इन्हें भी देखें
स्माइलिंग बुद्धा (या, पोखरण-१)
पोखरण-2
परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण
भारत में सामूहिक विनाश के हथियार
सन्दर्भ
श्रेणी:भारत
श्रेणी:परमाणु परीक्षण