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माघ मेला, उत्तरकाशी
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जनवरी 2021
माघ मेला उत्तरकाशी इस जनपद का काफी पुराना धार्मिक/सांस्कृति तथा व्यावसायिक मेले के रूप में प्रसिद्ध है। इस मेले का प्रतिवर्ष मकर संक्राति के दिन पाटा-संग्राली गांवों से कंडार देवता के साथ -साथ हरि महाराज का ढोल खण्डद्वारी माता नाग देवता नाग्नी माता अन्य देवी देवताओं की डोलियों का उत्तरकाशी पहुंचने पर शुभारम्भ होता है। यह मेला 14 जनवरी मकर संक्राति से प्रारम्भ हो 21 जनवरी तक चलता है। इस मेले में जनपद के दूर दराज से धार्मिक प्रवृत्ति के लोग जहाँ गंगा स्नान के लिये आते हैं। वहीं सुदूर गांव के ग्रामवासी अपने-अपने क्षेत्र के ऊन एवं अन्य हस्तनिर्मित उत्पादों को बेचने के लिये भी इस मेले में आते हैं। इसके अतिरिक्त प्राचीन समय में यहाँ के लोग स्थानीय जडी-बूटियों को भी उपचार के लिये लाते थे किन्तु वर्तमान समय में इस पर प्रतिबन्ध लगने के कारण अब मात्र ऊन आदि के उत्पादों का ही यहाँ पर विक्रय होता है।
वर्तमान काल मे यहाँ आने वाले व्यापारियों में मुस्लिमों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से बढ़ी है, जो कि स्थानीय लोगों एवं उत्तराखंड की संस्कृति के ध्वज्वाहक लोगों के लिए चिंता का सबब सा बना हुआ है।
मूल आधार
पहुंचें उत्तरकाशी माघ मेले का महत्व मात्र जनपद उत्तरकाशी तक ही सीमित नहीं है बल्कि इस मेले का धार्मिकता के आधार पर भी अन्य जनपदों/प्रदेश स्तर पर पहचान एवं आस्था है, इसका मुख्य कारण इस मेले का काशी विश्वनाथ जी की नगरी में हिन्दू धर्म के आधार पर महात्म्य माह माघ में होना है।
वर्तमान स्वरूप
वर्तमान समय में यह मेला धार्मिक/ सांस्कृतिक एवं विकास मेले के अतिरिक्त पर्यटक मेले के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। इसका मुख्य कारण वर्तमान विभाग द्वारा यहाँ के पर्यटक स्थलों के विकास एवं प्रचार/प्रसार की मुख्य भूमिका रही है। चूंकि यह मेला माह जनवरी में आयोजित होता है जिसके कारण उस समय पहाडों में अत्यधिक बर्फ रहती है पर्यटन विभाग द्वारा दयारा बुग्याल को स्कीइंग सेंटर के रूप में विकसित/प्रचारित करने के कारण इस क्षेत्र में काफी पर्यटकों का आवागमन होता है। भविष्य में इस प्रकार के आयोजनों से माघ मेले में देशी/विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की पूरी आशा है।
माघ मेला उत्तरकाशी का यदि सम्यकरूप से प्रचार-प्रसार किया जाय एवं इसे महोत्सव का रूप दिया जाय तो निसन्देह जहाँ एक ओर इससे पर्वतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार होगा वहीं देशी-विदेशी पर्यटकों के आवागमन में वृद्धि के साथ पर्यटन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
कैसे पहुंचें
उत्तरकाशी राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवस्थित है तथा चार धाम यात्रा मार्ग पर पडता है एवं राज्य के अन्य मुख्य शहरों से सड़क मार्ग से जुडा है। बस, टैक्सी तथा अन्य स्थानीय यातायात की सुविधायें उपलब्ध है।
निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश 145 किमी0
निकटतम हवाई अड्डा जौलीग्रांट 162 किमी0
श्रेणी:गढ़वाल