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शिर्क
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शिर्क का शाब्दिक अर्थ हिस्सेदार या साझेदार है।अर्थ यह हुआ कि किसी और को अल्लाह के समान ईश्वर मानना, या किसी को ईश्वर की प्रकृति,अस्तित्व और गुणों के साथ जोड़ना, यह विश्वास करना कि वह इस गुण में भी अल्लाह जैसा है।شرک 2023-01-04 https://ur.wikipedia.org/w/index.php?title=%D8%B4%D8%B1%DA%A9&oldid=5275944 آزاد دائرۃ المعارف، ویکیپیڈیا ur 2023-12-14 इस्लाम में बहुदेववाद पाप है। तौहीद: एक अल्लाह को मानना इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। शिर्क एक अक्षम्य अपराध है। इस्लाम के विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार, अल्लाह अपने उपासकों के किसी भी गलत काम को मृत्यु के बाद अपने फैसले के अनुसार माफ कर सकता है, भले ही वह अल्लाह ताला से माफी न मांगे, लेकिन शिर्क के अपराधी को कभी माफ नहीं करता।শির্ক (ইসলাম) 2023-09-01 https://bn.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A6%B6%E0%A6%BF%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E2%80%8C%E0%A6%95_(%E0%A6%87%E0%A6%B8%E0%A6%B2%E0%A6%BE%E0%A6%AE)&oldid=6903883 উইকিপিডিয়া bn 2023-12-14https://www.britannica.com/topic/shirk Shirk Encyclopædia Britannica Kamoonpuri, S: "Basic Beliefs of Islam" pages 42–58. Tanzania Printers Limited, 2001.
क़ुरआन में
अल्लाह की बन्दगी करो। उसके अतिरिक्त तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण आ चुका है। [क़ुरआन 7:73]
अल्लाह इसके क्षमा नहीं करेगा कि उसका साझी ठहराया जाए। किन्तु उससे नीचे दर्जे के अपराध को जिसके लिए चाहेगा, क्षमा कर देगा और जिस किसी ने अल्लाह का साझी ठहराया, तो उसने एक बड़ा झूठ घड़ लिया - 4:48
हदीस में
सहीह हदीसों में आता है कि नबी से पूछा गया, “महापाप क्या है?” आप ने फ़रमाया : तुम किसी को अल्लाह का समकक्ष ठहराओ, जबकि उसी ने तुमको पैदा किया। (सहीह बुख़ारी, 4477 तथा सहीह मुस्लिम, 86)
एक दूसरी सहीह हदीस में नबी ने फ़रमाया“क्या मैं हुम लोगों को बताऊँ कि महापाप क्या है? लोगों ने कहा, “हाँ / ऐ अल्लाह के रसूल/ आपने फ़ममाया, अल्लाह के साथ किसी को साझी बनाना, माता-पिता की आज्ञा न मानना, और झूठी गवाही देना / “ (सहीह बुख़ारी, 2654 तथा सहीह मुस्लिम, 87)
एक और सहीह हदीस में नबी ने फ़रमाया“ सात तबाह करने वाली चीज़ों से बचे रहो /” लोगों ने पूछ, “वो क्या हैं?” फ़रमाया, अल्लाह के साथ किसी को साझी बनाना, जादू करना, किसी की नाहक़ हत्या करना, ब्याज खाना, अनाथ का धन खाना,जिहाद में मुंह मोड़कर भागना, और मोमिन पाकदामन स्मत्रोरियों पर मिध्यारोप लगाना (सहीह बुख़ारी, 2766 तथा सहीह मुस्लिम 89) https://archive.org/details/1.2_20211230_202112/page/638/mode/2up शिर्क प्रोफेसर जियाउर्रहमान आज़मी कुरआन मजीद की इन्साइक्लोपीडिया 20 दिसम्बर 2021 www.archive.org पृष्ठ ६४०
प्रकार
अरब के मजहब के अनुसार शिर्क मुख्यतः तीन प्रकार का होता है। अर्थात्:
अल्लाह के साथ साझीदार जोड़ना (अत-तौहीदुर रुबूबियाह के विपरीत)। उदाहरण के लिए: यह विश्वास करना कि अल्लाह की पत्नियाँ, बेटे, बेटियाँ हैं।
अल्लाह की इबादत में शामिल होना (अत-तौहीद अल-उलुहिय्याह के विपरीत)।
अल्लाह के गुणों के साथ जुड़ना (तौहिदुल अस्मा वास-सिफत के विपरीत)। उदाहरण के लिए: यह सोचना कि पैगम्बर, रसूल और अवलिया स्वयं ही ग़ैब को जानते हैं, क्योंकि ग़ैब का ज्ञान केवल अल्लाह ही जानता है।
मूर्तिपूजा
इस्लाम में मूर्तिपूजा को शिर्क में शामिल किया गया है। इब्न कासिर के अनुसार, प्रत्येक पूज्य मूर्ति में एक महिला शैतान जिन्न होती है, मूर्ति पूजक मुख्य रूप से इसी महिला जिन्न की पूजा करते हैं।At-tahreek Monthly प्रश्न (28/268): एक विद्वान का कहना है कि हर मूर्ति के साथ एक नग्न महिला जिन्न होती है। अतः जो लोग मूर्ति पूजा करते हैं, वे मूलतः उस नग्न जिन्न की पूजा कर रहे हैं। क्या दावा सही है?- https://at-tahreek.com/article_details/7748 मासिक अत-तहरीक. धर्म, समाज और साहित्य पर शोध पत्रिका 19 अप्रैल 2025 en
मक्का की विजय के बाद, मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आदेश पर खालिद इब्न वालिद ने प्रसिद्ध 'अल-उज़्ज़ा' की मूर्ति को नष्ट कर दिया, और उसमें से एक नग्न महिला को निकलते देखा जिसके बाल काले-काले थे।नसाई कुबरा हा/11547, तबकात इब्न साद 2/145-46
अल्लाह कहता है,,
إِنْ يَدْعُوْنَ مِنْ دُونِهِ إِلاَّ إِنَاثًا وَإِنْ يَدْعُوْنَ إِلاَّ شَيْطَانًا مَرِيْدًا ‘वे अल्लाह के अलावा औरतों को पुकारते हैं। बल्कि, वे विद्रोही शैतान को बुलाते हैं’ (निसा 4/117)।
यहाँ - 3 (महिला) से तात्पर्य उन मूर्तियों या देवियों से है जिनके नाम महिलाएँ थीं। उदाहरण के लिए - उज़्या, मनात, नायला आदि। अथवा इससे फ़रिश्तों का बोध होता है। क्योंकि - अरब के मुश्रिक लोग फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ मानते थे और उनकी पूजा करते थे। मूर्तियों, स्वर्गदूतों या किसी अन्य सत्ता की पूजा करना वस्तुतः शैतान की पूजा करना है। क्योंकि यह शैतान ही है जो लोगों को अल्लाह से दूर कर देता है और उन्हें दूसरों के आश्रयों और ढांचों में सजदा करने पर मजबूर कर देता है। इसकी चर्चा अगले श्लोक में की गई है। [तफ़सीर: अहसनुल बयान]
उमर इब्न खत्ताब रदियल्लाहु अन्हु ने कहा
"मुश्रिकों के त्यौहारों के दिनों में उनके पूजा स्थलों में प्रवेश न करें। क्योंकि उस समय अल्लाह का प्रकोप उन पर उतरना शुरू हुआ”इमाम इब्न अल-क़य्यिम रहिमहुल्लाह ने इस परंपरा को अपने 'अहकामुल जिम्मा' (1/723-724), सहीह सनद में बैहाक़ी से वर्णित किया है।
जादू टोना
जादू-टोना और काले जादू में शिर्क शामिल है।
ज्योतिष शास्त्र
भाग्य बताना और ज्योतिष विद्या शिर्क हैं।
सर्वेश्वरवाद
इस्लाम की नज़र में सर्वेश्वरवाद शिर्क है।
वहादतुल उज़ूद
सुन्नी दृष्टिकोण के अनुसार, सूफी सिद्धांत वहदत अल-उजुद में शिर्क शामिल है, जो सृष्टि और निर्माता को एक इकाई के रूप में देखता है। सुन्नी दृष्टिकोण के अनुसार, यह प्राचीन भारत-यूरोपीय धर्मों की सर्वेश्वरवादी अवधारणाओं और हिंदू धर्म के अद्वैतवादी वेदवाद से निकला है।
इन्हें भी देखें
हराम
शहादा
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
तौहीद शिर्क और रेसालत का माना व मफहूम हिंदी पुस्तक
श्रेणी:इस्लाम
श्रेणी:अरबी शब्द और वाक्यांश
श्रेणी:गैर-मुस्लिम