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श्री गोपीगोविंद जी, काशी, वाराणसी
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श्री गोपीगोविंद जीhttp://pawanpath.up.gov.in/shri-gopi-govind/ श्री गोपीगोविंद,काशी ( प्राचीन विष्णु मंदिर)
अंगूठाकार|श्री गोपीगोविंद जी,काशी ( प्राचीन विष्णु मंदिर)
श्री गोपीगोविन्द मंदिर काशी के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है और इसे काशी का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है। काशी में विष्णु नरसिंह, केशव, माधव और गोविंद पंच रूप में विराजित हैं, गोपीगोविंद में विष्णु गोविंद स्वरूप और काशी के एक मातृ गोविंद स्वरूप में हैं। इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड के अध्याय 61 के श्लोक 19 में मिलता है। यह मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर से भी पुराना माना जाता है। गोपीगोविन्द तीर्थ में भगवान विष्णु गोपीगोविन्द रूप में विराजमान हैं। गोपीगोविन्द के उपासकों को भगवान विष्णु का सदा आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्कंद पुराण के भाग 4 (काशी खंड) के अध्याय 61 के श्लोक 19 में माधव ने घोषणा की: जो कोई पवित्र गोपीगोविन्द तीर्थ में शुद्ध भक्ति से गोपीगोविन्द रूप में मेरी उपासना करता है, वह मेरी माया के आवरण से सदा अछूता रहता है।https://varanasitemples.in/vishnu-temples/gopi-govind/ श्री गोपीगोविंद जी
॥ स्कन्दपुरापुराणम् /खण्डः _४_(काशीखण्डः )/अध्यायः _०६१ ॥
॥ माधव उवाच ॥
गोपी गोविंदतीर्थे तु गोपीगोविंदसंज्ञकम् ॥
समर्च्यमां नरो भक्त्या मम मायां न संस्पृशेत् ॥१९ ॥https://sites.google.com/view/gopreksheshwar/home स्कन्दपुरापुराणम् /खण्डः _४_(काशीखण्डः )/अध्यायः _०६१ ॥
माधव ने कहा : गोपीगोविन्द तीर्थ में भक्तिपूर्वकर्व गोपीगोविन्द नाम से मेरी पूजा करने से मनुष्य मेरी माया के स्पर्श से दूर रहता है ।
वाराणसी के प्रसिद्ध गोपीगोविंद घाट पर, गोप्रेक्षेश्वर महादेव मंदिर के भीतर स्थित, गोपीगोविंद तीर्थ अपने दर्शन मात्र से वृंदावन तीर्थ का फल प्रदान करता है। यह पवित्र स्थल, जहाँ स्वयं भगवान कृष्ण ने गौ-हत्या पाप से मुक्ति हेतु गोप्रेक्षेश्वर महादेव के दर्शन किए और अपनी गोपियों संग दिव्य रास लीला रचाई थी, 'काशी का वृन्दावन' कहलाता है।