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अर्जुन मुंडा
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अर्जुन
अर्जुन मुंडा Shri Arjun Munda.jpg properties references P569 properties linked references linked P137 properties linked references linked P19 properties linked references linked P1477 properties linked references linked P27 properties linked references linked P69 properties linked references linked P108 properties linked references linked P2048 properties linked references linked P2048 properties linked references linked P26 properties linked references linked P856 properties linked references linked P22 properties linked references linked P25 properties references P20 properties references P570 properties references P102 properties references P1196 properties references P509 properties linked references linked P172 properties linked references linked P106 properties linked references linked P40 properties linked references linked P166 properties linked references linked P2218 properties linked references linked P551
अर्जुन मुंडा झारखंड प्रान्त के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। महज 35 वर्ष की आयु में मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले अर्जुन मुंडा के नाम देश में सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है।
स्वर्गीय गणेश मुंडा के पुत्र 5 जून 1968 को घोड़ाबाँधा जमशेदपुर में जन्में श्री मुंडा फरवरी 2005 में झारखंड में दूसरी बार मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए। मध्य वर्गीय परिवार से आनेवाले श्री मुंडा बिहार औऱ झारखंड विधानसभा में खरसाँवा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका राजनीतिक जीवन 1980 से शुरू हुआ।.उस वक्त अलग झारखंड आंदोलन का दौर था। अर्जुन मुंडा ने राजनीतिक पारी की शुरुआत झारखंड मुक्ति मोर्चा से की। .आंदोलन में सक्रिय रहते हुए अर्जुन मुंडा ने जनजातीय समुदायों और समाज के पिछड़े तबकों के उत्थान की कोशिश की। 1995 में वे झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार के रूप में खरसावां विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर बिहार विधानसभा पहुँचे। बतौर भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी 2000 और 2005 के चुनावों में भी उन्होंने खरसावां से जीत हासिल की। वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य का गठन होने के बाद अर्जुन मुंडा बाबूलाल मरांडी के कैबिनेट में समाज कल्याण मंत्री बनाये गये। वर्ष 2003 में विरोध के कारण बाबूलाल मरांडी को मुख्यमंत्री के पद से हटना पड़ा. यहीं वक्त था कि एक मजबूत नेता के रूप में पहचान बना चुके अर्जुन मुंडा पर भारतीय जनता पार्टी आलाकमान की नज़र गई। 18 मार्च 2003 को अर्जुन मुंडा झारखंड के दूसरे मुख्यमंत्री चुने गये। उसके बाद 12 मार्च 2005 को दुबारा उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लेकिन निर्दलीयों से समर्थन नहीं जुटा पाने के कारण उन्हें 14 मार्च 2006 को त्यागपत्र देना पड़ा. इसके बाद मुंडा झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। . वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया। पार्टी के भरोसे पर अर्जुन मुंडा खरा उतरे..उन्होंने लगभग दो लाख के मतों के अन्तर से जीत हासिल की। वे भारतीय जनता पार्टी के दमदार औऱ भरोसेमन्द नेताओं में से एक हैं।.उनकी खूबियों को देखते हुए पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी है। 11 सितम्बर 2010 को वे तीसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने। अर्जुंन मुंडा ने झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में तीन बार कार्य किया है। वे वर्तमान में झारखंड के जमशेदपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद हैं।अर्जुन मुंडा को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें 2005 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।https://www.prabhatkhabar.com/state/jharkhand/ranchi/union-minister-arjun-munda-statement-more-achievements-in-last-9-years-than-in-70-years-jbj 70 सालों की तुलना में पिछले 9 वर्षों में मिलीं अधिक उपलब्धियां, जानें ऐसा क्यों बोले अर्जुन मुंडा
सन्दर्भ
श्रेणी:दलित
श्रेणी:जमशेदपुर
श्रेणी:झारखंड
श्रेणी:1968 में जन्मे लोग
श्रेणी:जीवित लोग
श्रेणी:भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री
श्रेणी:मोदी मंत्रिमंडल
श्रेणी:जमशेदपुर के लोग
श्रेणी:आदिवासी लोग