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411 समाचार
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पृथ्वीराज चौहान

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पृथ्वीराज चव्हाण thumb पृथ्वीराज चौहान अजमेर के राजा 1178–1192 चौहान वंश सोमेश्वर गोविन्दाराज चतुर्थ हिन्दू धर्म पृथ्वीराज तृतीय (शासनकाल: 1178–1192) जिन्हें आम तौर पर पृथ्वीराज चौहान कहा जाता है, https://books.google.co.in/books?id=m3DjCgAAQBAJ&printsec=frontcover&dq=prithviraj+chauhan+rajput&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjPq_X50PHwAhWFbisKHWSqDTkQ6AEwAHoECAkQAw#v=onepage&q=prithviraj%20chauhan%20rajput&f=false . The Last Hindu Emperor: Prithviraj Cauhan and the Indian Past, 1200–2000 Cynthia Talbot Cambridge University Press 2016 चौहान वंश के राजा थे। उन्होंने वर्तमान उत्तर-पश्चिमी भारत में पारम्परिक चौहान क्षेत्र सपादलक्ष पर शासन किया। उन्होंने वर्तमान राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से पर भी नियन्त्रण किया। उनकी राजधानी अजयमेरु (आधुनिक अजमेर) में स्थित थी, हालाँकि मध्ययुगीन लोक किंवदन्तियों ने उन्हें भारत के राजनीतिक केंद्र दिल्ली के राजा के रूप में वर्णित किया है जो उन्हें पूर्व-इस्लामी भारतीय शक्ति के प्रतिनिधि के रूप में चित्रित करते हैं। शुरुआत में पृथ्वीराज ने कई पड़ोसी हिन्दू राज्यों के खिलाफ़ सैन्य सफलता हासिल की। विशेष रूप से वह चन्देल राजा परमर्दिदेव के ख़िलाफ़ सफल रहे थे। उन्होंने ग़ौरी राजवंश के शासक मोहम्मद ग़ौरी के प्रारम्भिक आक्रमण को भी रोका। हालाँकि, 1192 में तराइन की दूसरी लड़ाई में ग़ौरी ने पृथ्वीराज को हराया और कुछ ही समय बाद उन्हें मार डाला। तराइन में उनकी हार को भारत की इस्लामी विजय में एक ऐतिहासिक घटना के रूप में देखा जाता है और कई अर्ध-पौराणिक लेखनों में इसका वर्णन किया गया है। इनमें सबसे लोकप्रिय पृथ्वीराज रासो है, जो उन्हें "राजपूत" राजा के रूप में प्रस्तुत करता है। https://books.google.co.in/books?id=m3DjCgAAQBAJ&printsec=frontcover&dq=prithviraj+chauhan+rajput&hl=en&sa=X&ved=2ahUKEwjPq_X50PHwAhWFbisKHWSqDTkQ6AEwAHoECAkQAw#v=onepage&q=prithviraj%20chauhan%20rajput&f=false . The Last Hindu Emperor: Prithviraj Cauhan and the Indian Past, 1200–2000 Cynthia Talbot Cambridge University Press 2016 जानकारी के स्रोत पृथ्वीराज के शासनकाल के दौरान के शिलालेख संख्या में कम हैं और स्वयं राजा द्वारा जारी नहीं किए गए हैं।Cynthia Talbot 2015 38 उनके बारे में अधिकांश जानकारी मध्ययुगीन पौराणिक वृत्तान्तों से आती है। तराइन की लड़ाई के मुसलमान खातों के अलावा हिन्दू और जैन लेखकों द्वारा कई मध्ययुगीन महाकाव्य में उनका उल्लेख किया गया है। इनमें पृथ्वीराज विजय, हम्मीर महावाक्य और पृथ्वीराज रासो शामिल हैं। इन ग्रन्थों में स्तुतिपूर्ण सम्बन्धी विवरण हैं और इसलिए यह पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं हैं।R. B. Singh 1964 162 पृथ्वीराज विजय पृथ्वीराज के शासनकाल से एकमात्र जीवित साहित्यिक पाठ है। पृथ्वीराज रासो जिसने पृथ्वीराज को एक महान राजा के रूप में लोकप्रिय किया को राजा के दरबारी कवि चंद बरदाई द्वारा लिखा कहा जाता है। हालांकि, यह अतिरंजित लेखनों से भरा है जिनमें से कई इतिहास के उद्देश्यों के लिए बेकार हैं।R. B. Singh 1964 162 पृथ्वीराज का उल्लेख करने वाले अन्य वृत्तान्त और ग्रन्थों में प्रबन्ध चिन्तामणि, प्रबन्ध कोष और पृथ्वीराज प्रबन्ध शामिल हैं। उनकी मृत्यु के सदियों बाद इनकी रचना की गई थी और इसमें अतिशयोक्ति और काल दोष वाले उपाख्यान हैं।R. B. Singh 1964 162 पृथ्वीराज का उल्लेख जैनों की एक पट्टावली में भी किया गया है जो एक संस्कृत ग्रन्थ है। इसमें जैन भिक्षुओं की जीवनी है। जबकि इसे 1336 में पूरा कर लिया था लेकिन जिस हिस्से में पृथ्वीराज का उल्लेख है वह 1250 के आसपास लिखा गया था। चन्देला कवि जगनिका का आल्हा-खण्ड (या आल्हा रासो) भी चन्देलों के खिलाफ पृथ्वीराज के युद्ध का अतिरंजित वर्णन प्रदान करता है।R. B. Singh 1964 167 प्रारम्भिक जीवन पृथ्वीराज का जन्म चौहान राजा सोमेश्वर और रानी कर्पूरादेवी के घर हुआ था। पृथ्वीराज और उनके छोटे भाई हरिराज दोनों का जन्म गुजरात में हुआ था जहाँ उनके पिता सोमेश्वर को उनके रिश्तेदारों ने चालुक्य दरबार में पाला था।Dasharatha Sharma 1959 69 पृथ्वीराज गुजरात से अजमेर चले गए जब पृथ्वीराज द्वितीय की मृत्यु के बाद उनके पिता सोमेश्वर को चौहान राजा का ताज पहनाया गया। सोमेश्वर की मृत्यु 1177 (1234 (वि.स.) में हुई थी। जब पृथ्वीराज लगभग 11 वर्ष के थे। पृथ्वीराज, जो उस समय नाबालिग थे ने अपनी माँ के साथ राजगद्दी पर विराजमान हुए। इतिहासकार दशरथ शर्मा के अनुसार, पृथ्वीराज ने 1180 (1237 वि॰स॰) में प्रशासन का वास्तविक नियंत्रण ग्रहण किया। दिल्ली में अब खण्डहर हो चुके किला राय पिथौरा के निर्माण का श्रेय पृथ्वीराज को दिया जाता है। पृथ्वीराज रासो के अनुसार दिल्ली के शासक अनंगपाल तोमर ने अपने दामाद पृथ्वीराज को शहर दिया था और जब वह इसे वापस चाहते थे तब हार गए थे। यह ऐतिहासिक रूप से गलत है चूँकि पृथ्वीराज के चाचा विग्रहराज चतुर्थ द्वारा दिल्ली को चौहान क्षेत्र में ले लिया गया था।R. B. Singh 1964 162 इसके अलावा ऐतिहासिक साक्ष्य बताते हैं कि अनंगपाल तोमर की मृत्यु पृथ्वीराज के जन्म से पहले हो गई थी। उनकी बेटी की पृथ्वीराज से शादी के बारे में दावा बाद की तारीख में किया गया है। ग़ोरी से युद्ध तराईन का प्रथम युद्ध तराईन का द्वितीय युद्ध पृथ्वीराज के पूर्ववर्तियों ने 12वीं शताब्दी तक भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों पर कब्जा करने वाले मुस्लिम राजवंशों के कई हमलों का सामना किया था। 12वीं शताब्दी के अंत तक ग़ज़नी आधारित ग़ोरी वंश ने चौहान राज्य के पश्चिम के क्षेत्र को नियंत्रित कर लिया था। 1175 में जब पृथ्वीराज एक बच्चा था, मोहम्मद ग़ोरी ने सिंधु नदी को पार किया और मुल्तान पर कब्जा कर लिया। 1178 में उसने गुजरात पर आक्रमण किया, जिस पर चालुक्यों (सोलंकियों) का शासन था। चौहानों को ग़ोरी आक्रमण का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि गुजरात के चालुक्यों ने 1178 में कसरावद के युद्ध में मोहम्मद को हरा दिया था।Dasharatha Sharma 1959 80–81 अगले कुछ वर्षों में मोहम्मद ग़ोरी ने पेशावर, सिंध और पंजाब को जीतते हुए, चौहानों के पश्चिम में अपनी शक्ति को मजबूत किया। उन्होंने अपना अड्डा ग़ज़नी से पंजाब कर दिया और अपने साम्राज्य का विस्तार पूर्व की ओर करने का प्रयास किया। इससे उन्हें पृथ्वीराज के साथ संघर्ष में आना पड़ा।R. B. Singh 1964 183–84 मध्यकालीन मुस्लिम लेखकों ने दोनों शासकों के बीच केवल एक या दो लड़ाइयों का उल्लेख किया है। तबक़ात-ए-नासिरी और तारिख-ए-फ़िरिश्ता में तराइन की दो लड़ाइयों का ज़िक्र है। जमी-उल-हिकाया और ताज-उल-मासीर ने तराइन की केवल दूसरी लड़ाई का उल्लेख किया है जिसमें पृथ्वीराज की हार हुई थी। हालांकि, हिन्दू और जैन लेखकों का कहना है कि पृथ्वीराज ने मारे जाने से पहले कई बार मोहम्मद को हराया था। जैसे कि हम्मीर महाकाव्य दावा करता है कि दोनों के बीच 9 लड़ाइयाँ हुई , पृथ्वीराज प्रबन्ध में 8 का जिक्र है, प्रबन्ध कोष 21 लड़ाइयों का दावा करता है जबकि प्रबन्ध चिंतामणि 22 बतलाता है।R. B. Singh 1964 186–88 जबकि यह लेखन संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, यह संभव है कि पृथ्वीराज के शासनकाल के दौरान ग़ोरियों और चौहानों के बीच दो से अधिक मुठभेड़ हुईं। तराईन का प्रथम युद्ध 1190–1191 के दौरान, मोहम्मद ग़ौर ने चौहान क्षेत्र पर आक्रमण किया और तबरहिन्दा या तबर-ए-हिन्द (बठिंडा) पर कब्जा कर लिया। उन्होंने इसे 1,200 घुड़सवारों के समर्थन वाले ज़िया-उद-दीन, तुलक़ के क़ाज़ी के अधीन रखा। जब पृथ्वीराज को इस बारे में पता चला, तो उसने दिल्ली के गोविंदराजा सहित अपने सामंतों के साथ तबरहिन्दा की ओर प्रस्थान किया। तबरहिन्दा पर विजय प्राप्त करने के बाद मुहम्मद की मूल योजना अपने घर लौटने की थी लेकिन जब उन्होंने पृथ्वीराज के बारे में सुना, तो उन्होंने लड़ाई का फैसला किया। वह एक सेना के साथ चल पड़े और तराईन में पृथ्वीराज की सेना का सामना किया।Dasharatha Sharma 1959 82 आगामी लड़ाई में, पृथ्वीराज की सेना ने निर्णायक रूप से ग़ोरियों को हरा दिया।Dasharatha Sharma 1959 82-84 तराईन का द्वितीय युद्ध मोहम्मद ग़ोरी ने ग़ज़नी लौटने का फैसला किया और अपनी हार का बदला लेने के लिए तैयारी की। तबक़ात-ए नसीरी के अनुसार, उन्होंने अगले कुछ महीनों में 1,20,000 चुनिंदा अफ़गान, ताजिक और तुर्क घुड़सवारों की एक सुसज्जित सेना इकट्ठा की। इसके बाद उन्होंने जम्मू के विजयराजा द्वारा सहायता से मुल्तान और लाहौर होते हुए चौहान राज्य की ओर प्रस्थान किया।Dasharatha Sharma 1959 84 पड़ोसी हिन्दू राजाओं के खिलाफ अपने युद्धों के परिणामस्वरूप पृथ्वीराज के पास कोई भी सहयोगी नहीं था। फिर भी उन्होंने ग़ोरियों का मुकाबला करने के लिए एक बड़ी सेना इकट्ठा करने में कामयाबी हासिल की। मोहम्मद ने अपने ग़ज़नी स्थित भाई ग़ियास-उद-दीन से राय-मशविरा लेने के लिये समय लिया।Dasharatha Sharma 1959 85 फिर उन्होंने अपने बल का नेतृत्व किया और चौहानों पर हमला किया। उन्होंने पृथ्वीराज को निर्णायक रूप से हराया। पृथ्वीराज ने एक घोड़े पर भागने की कोशिश की लेकिन सरस्वती किले (संभवतः आधुनिक सिरसा) के पास उसे पकड़ लिया गया। इसके बाद, ग़ोरी ने कई हजार रक्षकों की हत्या करने के बाद अजमेर पर कब्जा कर लिया। कई और लोगों को गुलाम बना लिया और शहर के मंदिरों को नष्ट कर दिया।Dasharatha Sharma 1959 87 मृत्यु अधिकांश मध्ययुगीन स्रोतों में कहा गया है कि पृथ्वीराज को चौहान राजधानी अजमेर ले जाया गया जहाँ मोहम्मद ने उसे ग़ोरियों के अधीन राजा के रूप में बहाल करने की योजना बनाई थी। कुछ समय बाद, पृथ्वीराज ने मोहम्मद के खिलाफ विद्रोह कर दिया जिसके उपरान्त उन्हें मार दिया गया।Dasharatha Sharma 1959 87 पृथ्वीराज रासो का दावा है कि पृथ्वीराज को एक कैदी के रूप में ग़ज़नी ले जाया गया और अंधा कर दिया गया। यह सुनकर, कवि चंद बरदाई ने गज़नी की यात्रा की और मोहम्मद ग़ोरी को चकमा दिया जिसमें पृथ्वीराज ने मोहम्मद की आवाज़ की दिशा में तीर चलाया और उसे मार डाला। कुछ ही समय बाद, पृथ्वीराज और चंद बरदाई ने एक दूसरे को मार डाला।Cynthia Talbot 2015 13–20 यह एक काल्पनिक कथा है, जो ऐतिहासिक साक्ष्य द्वारा समर्थित नहीं है: पृथ्वीराज की मृत्यु के बाद मोहम्मद ग़ोरी ने एक दशक से अधिक समय तक शासन करना जारी रखा।Dasharatha Sharma 1959 87 पृथ्वीराज की मृत्यु के बाद, ग़ोरियों ने उनके पुत्र गोविंदराज को अजमेर के सिंहासन पर राजा नियुक्त किया। 1192 में, पृथ्वीराज के छोटे भाई हरिराज ने गोविन्दराज को हटा दिया और अपने पैतृक राज्य का एक हिस्सा वापस ले लिया। गोविंदराजा रणस्तंभपुरा (आधुनिक रणथंभौर) चला गया जहाँ उसने शासकों की एक नई चौहान शाखा स्थापित की (ग़ोरी के आधिपत्य में)। बाद में हरिराज को ग़ोरियों के जनरल कुतुब-उद-दीन ऐबक ने हराया था।Dasharatha Sharma 1959 100–01 विरासत पृथ्वीराज को 14वीं और 15वीं शताब्दी के प्रारंभिक संस्कृत विवरण औसत दर्जे के असफल राजा के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो केवल एक विदेशी राजा के खिलाफ अपनी हार के लिए यादगार था।Cynthia Talbot 2015 32 जैन लेखकों द्वारा लिखे गए प्रबन्ध-चिंतामणि और पृथ्वीराज-प्रबन्ध उन्हें एक अयोग्य राजा के रूप में चित्रित करते हैं, जो स्वयं अपने पतन के लिए ज़िम्मेदार था। प्रसिद्ध ग्रन्थ पृथ्वीराज रासो जिसको राजपूत दरबारों द्वारा बड़े पैमाने पर संरक्षण दिया गया था, पृथ्वीराज को एक महान नायक के रूप में चित्रित करता है।Cynthia Talbot 2015 32 पृथ्वीराज के वंश को बाद के काल में राजपूत वंशों में से एक के रूप में वर्गीकृत किया गया था, हालाँकि उनके समय में "राजपूत" पहचान मौजूद नहीं थी।Cynthia Talbot 2015 33, 121 समय के साथ, पृथ्वीराज को एक देशभक्त हिन्दू योद्धा के रूप में चित्रित किया गया जिसने मुस्लिम दुश्मनों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।Cynthia Talbot 2015 24 16वीं शताब्दी की किंवदंतियों ने उन्हें भारत के राजनीतिक केंद्र दिल्ली (बजाय अजमेर के, जो उनकी वास्तविक राजधानी थी) का शासक बताया।Cynthia Talbot 2015 6–7 पृथ्वीराज को अब "अंतिम हिंदू सम्राट" के रूप में वर्णित किया गया है। यह पदनाम गलत है, क्योंकि उनके बाद दक्षिण भारत में कई मजबूत हिन्दू शासक फले-फूले और उत्तरी भारत के कुछ समकालीन हिन्दू शासक उनके जितने ही शक्तिशाली थे।Cynthia Talbot 2015 3 पृथ्वीराज को समर्पित कई स्मारक का निर्माण अजमेर और दिल्ली में किया गया है। उनके जीवन पर कई फिल्में और टेलीविजन धारावाहिक बने हैं। इनमें हिन्दी फिल्म सम्राट पृथ्वीराज चौहान और हिन्दी टेलीविजन धारावाहिक धरती का वीर योद्धा पृथ्वीराज चौहान (2006-2009) शामिल हैं। इनमें से कई पृथ्वीराज को दोषरहित नायक के रूप में दर्शाते हैं और हिन्दू राष्ट्रीय एकता के संदेश पर जोर देते हैं। सितंबर 2019 में घोषणा हुई कि अक्षय कुमार ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म पृथ्वीराज में इनका किरदार निभाएंगे। यह यश राज फ़िल्म्स द्वारा निर्मित की जायेगी।थिएटर बंद मगर 'खिलाड़ी कुमार' के पास फिल्मों की भरमार, झोली में हैं ये मूवीज - Entertainment AajTak https://aajtak.intoday.in/gallery/covid-19-akshay-kumar-bollywood-actor-movies-lists-release-filming-tmov-1-53598.html आज तक 26 जुलाई 2020 hi'पृथ्वीराज' के लिए राजस्थानी भाषा सीखेंगे अक्षय कुमार, ऐसा है मेकर्स का प्लान https://www.livehindustan.com/entertainment/story-akshay-kumar-learns-rajasthani-language-for-prithviraj-chauhan-3110970.html 26 जुलाई 2020 हिन्दुस्तान लाइव hi https://web.archive.org/web/20200621024552/https://www.livehindustan.com/entertainment/story-akshay-kumar-learns-rajasthani-language-for-prithviraj-chauhan-3110970.html 21 जून 2020 live इन्हें भी देखें चौहान वंश राजस्थान का इतिहास सन्दर्भ 2 सन्दर्भसूची Cynthia Talbot The Last Hindu Emperor: Prithviraj Cauhan and the Indian Past, 1200–2000 https://books.google.com/books?id=m3DjCgAAQBAJ Cambridge University Press 2015 9781107118560 harv Dasharatha Sharma Dasharatha Sharma Early Chauhān Dynasties S. Chand / Motilal Banarsidass 1959 9780842606189 https://books.google.com/books?id=n4gcAAAAMAAJ harv 26 जुलाई 2020 https://web.archive.org/web/20170324054808/https://books.google.com/books?id=n4gcAAAAMAAJ 24 मार्च 2017 live R. B. Singh History of the Chāhamānas N. Kishore 1964 https://books.google.com/books?id=TKs9AAAAIAAJ 11038728 harv 26 जुलाई 2020 https://web.archive.org/web/20170323170959/https://books.google.com/books?id=TKs9AAAAIAAJ 23 मार्च 2017 live श्रेणी:चौहान वंश श्रेणी:शाकंभरी के चाहमान श्रेणी:दिल्ली का इतिहास श्रेणी:भारतीय शासक श्रेणी:१२वीं शताब्दी के भारतीय शासक