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411 समाचार
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सामान्य दवा

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right|thumb|300px|ब्राजील और फ्रांस आदि कुछ देशों में तो कुल दवाओं के २० प्रतिशत से भी अधिक दवाएँ, सामान्य दवाएँ ही बिकतीं हैं। सामान्य दवा या जेनेरिक दवा (generic drug) वह दवा है जो बिना किसी पेटेंट के बनायी और वितरित की जाती है। जेनेरिक दवा के फॉर्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है किन्तु उसके सक्रिय घटक (active ingradient) पर पेटेंट नहीं होता। जैनरिक दवाईयां गुणवत्ता में किसी भी प्रकार के ब्राण्डेड दवाईयों से कम नहीं होतीं तथा ये उतनी ही असरकारक है, जितनी की ब्राण्डेड दवाईयाँ। यहाँ तक कि उनकी मात्रा (डोज), साइड-इफेक्ट, सक्रिय तत्व आदि सभी ब्रांडेड दवाओं के जैसे ही होते हैं। जैनरिक दवाईयों को बाजार में उतारने का लाईसेंस मिलने से पहले गुणवत्ता मानकों की सभी सख्त प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। किसी रोग विशेष की चिकित्सा के लिए तमाम शोधों के बाद एक रासायनिक तत्‍व/यौगिक विशेष दवा के रूप में देने की संस्तुति की जाती है। इस तत्‍व को अलग-अलग कम्पनियाँ अलग-अलग नामों बेचतीं है। जैनरिक दवाईयों का नाम उस औषधि में उपस्थित सक्रिय घटक के नाम के आधार पर एक विशेषज्ञ समिति द्वारा निर्धारित किया जाता है। किसी दवा का जेनेरिक नाम पूरे विश्व में एक ही होता है। उदाहरण के लिए, उच्छ्रायी दुष्क्रिया (शिश्न को खड़ा न कर पाना / erectile dysfunction) की चिकित्सा के लिए सिल्डेन्फिल (sildenafil) नाम की जेनेरिक दवा है। यही दवा फिजर (Pfizer) नामक कम्पनी वायग्रा (Viagra) नाम से बेचती है। अधिकांश बड़े शहरों में जेनेरिक मेडिकल स्टोर होते हैं जहाँ केवल जेनेरिक दवाएँ ही मिलतीं हैं। किन्तु इनका व्यापक प्रचार नहीं होने से लोगों को इनका लाभ नहीं मिलता। किसी भी बीमारी के लिए डॉक्टर जो दवा लिखता है, ठीक उसी दवा के सॉल्ट वाली जेनेरिक दवाएं उससे काफी कम कीमत पर आपको मिल सकती हैं। कीमत का यह अंतर पांच से दस गुना तक हो सकता है। बात सिर्फ आपके जागरूक होने की है। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि देश में लगभग सभी नामी दवा कम्पनियां ब्रांडेड के साथ-साथ कम कीमत वाली जेनेरिक दवाएं भी बनाती हैं लेकिन ज्यादा लाभ के चक्कर में डॉक्टर और कंपनियां लोगों को इस बारे में कुछ बताते नहीं हैं और जानकारी के अभाव में गरीब भी केमिस्ट से महंगी दवाएं खरीदने को विवश हैं। गौरतलब है कि किसी एक बीमारी के लिए तमाम शोधों के बाद एक रासायनिक यौगिक को विशेष दवा के रूप में देने की संस्तुति की जाती है। इस यौगिक को अलग-अलग कम्पनियां अलग-अलग नामों से बेचती हैं। जेनेरिक दवाइयों का नाम उसमें उपस्थित सक्रिय यौगिक के नाम के आधार पर एक विशेषज्ञ समिति निर्धारित करती है। किसी भी दवा का जेनेरिक नाम पूरे विश्व में एक ही होता है। जेनेरिक दवा बिना किसी पेटेंट के बनाई और वितरित की जाती हैं यानी जेनेरिक दवा के फॉर्मुलेशन पर पेटेंट हो सकता है किन्तु उसकी सामग्री पर पेटेंट नहीं हो सकता। अंतरराष्ट्रीय मानकों से बनी जेनेरिक दवाइयों की गुणवत्ता ब्रांडेड दवाइयों से कम नहीं होती, जिनकी आपूर्ति दुनियाभर में भी की जाती है और यह भी उतना ही असर करती हैं जितना ब्रांडेड दवाएं करती हैं। उनकी डोज, साइड- इफेक्ट, सामग्री आदि सभी ब्रांडेड दवाओं के एकदम समान होती हैं। उदाहरण के लिए पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन के इलाज के लिए सिल्डेन्फिल नाम की जेनेरिक दवा होती है जिसे फाइजर कम्पनी वायग्रा नाम से बेचती है। जेनेरिक दवाइयों को भी बाजार में लाने का लाइसेंस मिलने से पहले गुणवत्ता मानकों की सभी सख्त प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। इन दवाओं के प्रचार-प्रसार पर कंपनियां कुछ खर्च नहीं करती। जेनेरिक दवाओं के मूल्य निर्धारण पर सरकारी अंकुश होता है, इसलिए वे सस्ती होती हैं, जबकि पेटेंट दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं, इसलिए वे महंगी होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि यदि डॉक्टर मरीज को जेनेरिक दवाइयों की सलाह देने लगें तो केवल धनी देशों में चिकित्सा व्यय पर 70 प्रतिशत तक कमी आ जायेगी तथा गरीब देशों के चिकित्सा व्यय में यह कमी और भी ज्यादा होगी। कई बार तो ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की कीमतों में नब्बे प्रतिशत तक का फर्क होता है। जैसे यदि ब्रांडेड दवाई की 14 गोलियों का एक पत्ता 786 रुपये का है, तो एक गोली की कीमत करीब 55 रुपये हुई। इसी सॉल्ट की जेनेरिक दवा की 10 गोलियों का पत्ता सिर्फ 59 रुपये में ही उपलब्ध है, यानी इसकी एक गोली करीब 6 रुपये में ही पड़ेगी। खास बात यह है कि किडनी, यूरिन, बर्न, दिल संबंधी रोग, न्यूरोलोजी, डायबिटीज जैसी बीमारियों में तो ब्रांडेड व जेनेरिक दवा की कीमत में बहुत ही ज्यादा अंतर देखने को मिलता है। दवा कम्पनियां ब्रांडेड दवा से बड़ा मुनाफा कमाती हैं। दवाओं की कंपनियां अपने मेडिकल रिप्रजेंटेटिव्ज के जरिए डॉक्टरों को अपनी ब्रांडेड दवा लिखने के लिए खासे लाभ देती हैं। इसी आधार पर डॉक्टरों के नजदीकी मेडिकल स्टोर को दवा की आपूर्ति होती है। यही वजह है कि ब्रांडेड दवाओं का कारोबार दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि डॉक्टर जेनेरिक दवा लिखते ही नहीं हैं। जानकारी होने पर कोई व्यक्ति अगर केमिस्ट की दुकान से जेनेरिक दवा मांग भी ले तो दवा विक्रेता इनकी उपलब्धता से इंकार कर देते हैं। देश के ज्यादातर बड़े शहरों में एक्सक्लुसिव जेनेरिक मेडिकल स्टोर होते हैं, लेकिन इनका व्यापक प्रचार नहीं होने से लोगों को इनका फायदा नहीं मिलता आजकल हर प्रकार की जानकारी इंटरनेट के जरिये आसानी से हासिल की जा सकती है। ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की कीमत में अंतर का पता लगाने के लिए एक मोबाइल एप 'समाधान और हैल्थकार्ट भी बाजार में उपलब्ध है। दरकार है कि आज लोग जेनेरिक दवाओं के बारे में जानें और खासतौर पर गरीबों को इस ओर जागरूक करें ताकि वे दवा कंपनियों के मकडज़ाल में न फंसें। लाभ जैनरिक दवाईयां ब्राण्डेड दवाईयों की तुलना में औसतन पाँच गुना सस्ती होती है। जैनरिक दवाईयों की उपलब्धता आम व्यक्ति को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने में बहुत बड़ा योगदान प्रदान कर सकती है तथा इससे ब्राण्डेड कम्पनियों का दवा उद्योग में एकाधिकार को चुनौती मिलेगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जैनरिक दवाईयों के लिखे जाने पर केवल धनी देशों में चिकित्सा व्यय पर 70 प्रतिशत तक कमी आ जायेगी तथा गरीब देशों के चिकित्सा व्यय में यह कमी और भी ज्यादा होगी। जेनेरिक दवाएं उत्पादक से सीधे रिटेलर तक पहुंचती हैं। इन दवाओं के प्रचार-प्रसार पर कंपनियों को कुछ खर्च नहीं करना पड़ता। एक ही कंपनी की पेटेंट और जेनेरिक दवाओं के मूल्य में काफी अंतर होता है। चूंकि जेनेरिक दवाओं के मूल्य निर्धारण पर सरकारी अंकुश होता है, अत: वे सस्ती होती हैं, जबकि पेटेंट दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं, इसलिए वे महंगी होती हैं। उदाहरण के लिए यदि चिकित्सक ने रक्त कैंसर के किसी रोगी के लिए ‘ग्लाईकेव‘ ब्राण्ड की दवा लिखी है तो महीने भर के कोर्स की कीमत 1,14,400 रूपये होगी, जबकि उसी दवा के दूसरे ब्राण्ड ‘वीनेट‘ की महीने भर के कोर्स की कीमत अपेक्षाकृत काफी कम 11,400 रूपये होगी। सिप्ला इस दवा के समकक्ष जैनरिक दवा ‘इमीटिब‘ 8,000 रूपये में और ग्लेनमार्क केवल 5,720 रूपये में मुहैया करवाती है। प्रमुख जेनेरिक दवाएँ सीटीजेड पाईरेस्टेट-100, मेरिसुलाइड, ओमेसेक-20, ओमिप्राजोल, लिगनोकेन, बूपीवेक्सीन, एसीटिल सालिसाइकिल एसिड डिक्लोफेनेक, इबूप्रोफेन, परासीटामोल, क्लोरोक्वीन, एमलोडिपिन, एटीनोलेल, लोजारटन, मेटफोरमिन, प्रोगेस्टीरोन मेगामेन्टिन 625 बाहरी कड़ियाँ जेनेरिक दवाएं लिखने के कानूनी आदेश का उजाला (प्रवक्ता_डॉट_कॉम) इलाज का खर्च कम करती जेनेरिक दवा (नई दुनिया) जेनेरिक औषधियों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी जानिए जेनेरिक मेडिसीन से जुड़ी कुछ अहम बातें (अमर उजाला) राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (N P P A) जेनेरिक दवाएं : कम खर्च में अधिक लाभ जेनेरिक दवाओं का बढ़ता बाजार https://web.archive.org/web/20230315023732/https://dawausesinhindi.com/ 15 मार्च 2023 जेनेरिक दवाईयों को उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जावे https://web.archive.org/web/20191213222631/https://www.pressnote.in/readnews.php?id=40733 13 दिसंबर 2019 (प्रेसनोट) ब्रांडेड छोड़ो, जेनेरिक दवा अपनाओ Generic Drug Database with Price Details (MedIndia) Model Lists of Essential Medicines (विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO) अब डॉक्टर जेनेरिक दवा के नाम 'कैपिटल लेटर' में लिखेंगे (प्रभात खबर)