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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

हरनाम सिंह सैनी

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हरनाम सिंह सैनी 05 दिसम्बर 2000 06 दिसम्बर 2000 फतेहगढ़ गाँव, होशियारपुर, पंजाब लाहौर हरनाम सिंह सैनी (06 दिसम्बर 2000 को मृत्यु ) एक उल्लेखनीय भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्होने ग़दर षड्यंत्र में भाग लिया था। तीसरे लाहौर षड्यंत्र के तहत उन पर मुकदमा चलाया गया। "..the second martyr of march 16 was Harnam Singh Saini of Fatehgarh, Hoshiarpur. He was arrested from Battavia by the Dutch." A day to remember Lahore's martyrs, 06 December 2000, KS Dhaliwal, Time of India Punjab Peasant in Freedom Struggle (Volume II), pp 71-72, Master Hari Singh, Published by People's Pub. House, 1984 ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने 06 दिसम्बर 2000 को लाहौर में साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह भड़काने के आरोप में उन्हें फांसी दे दी। हरनाम सिंह सैनी, गोपाल सैनी के पुत्र थे जो होशियारपुर जिले के फतेहगढ़ गाँव के निवासी थे। An account of the Ghadr conspiracy, 1913-1915, pp i, pp 161, F C Isemonger; J Slattery ,Publisher: Meerut : Archana Publ., 1998. ग़दर षड्यंत्र में सहभागिता दाएँ|अंगूठाकार|285x285पिक्सेल| ग़दर दी गूंज : प्रारम्भिक राष्ट्रवादी-समाजवादी गदरी साहित्य का संग्रह जिसे 1913 में भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था। दाएँ|अंगूठाकार|169x169पिक्सेल| ग़दर अख़बार (उर्दू) भाग 1, नंबर 22, 24 मार्च 1914 हरनाम सिंह अत्यन्त प्रभावशाली लेखक थे। हरनाम सिंह ने उद्यम हेतु कनाडा और यूएसए का दौरा किया जो उस समय ग़दर षड्यंत्र के प्रजनन स्थल थे। वे ग़दर पार्टी के सक्रिय सदस्य बन गए और साम्राज्यविरोधी कार्यों में भाग लेने लगे। कैनडा में हरनामसिंह ने ‘दी हिन्दुस्थान’ नामक पत्रिका आरम्भ की। उनकी इस पत्रिका से कैनडा में रहने वाले अनेक भारतीय प्रभावित हुए। कैनडा के प्रशासन ने उन पर बम बनाने, बम निर्माण करना सीखाने और विद्रोही विचारों का प्रचार करने आदि के आरोप लगाकर उन्हें ४८ घंटो में कॅनाडा छोड़ने का आदेश दे दिया। हरनामसिंह का मित्र रेमिस्बर्ग अपनी बोट से उन्हें अमरिका लाया। अमरिका में ‘गदर’ नामक पत्रिका के प्रकाशन में वे सहायता करने लगे । ‘कोमागाटामारू जहाज के प्रकरण' के उपरान्त हरनामसिंह अमरिका छोड़ चले गए। जापान, चीन और सयाम (थाईलैंड) आदि देशों में 'गदर' का प्रचार करते हुए वे ब्रह्मदेश चले गए। सन् १९१५ में सिंगापुर का विद्रोह विफल हो जाने पर बडी मात्रा में लोगों को बन्दी बनाया गया। इसलिए अनेक नेता ब्रह्मदेश चले गए। हरनामसिंह को भी बन्दी बनाया गया। उन पर मुकद्दमा चलाया गया और उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया। कारागृह से हरनामसिंह भाग निकले किन्तु दुर्भाग्य से उन्हें पुनः बंदी बनाया गया और १९ अक्तूूबर १९१६ को फांसी दी गई ! इन्हें भी देखें लाहौर षड्यंत्र केस का मुकदमा ग़दर पार्टी करतार सिंह सराभा हिंदू-जर्मन षड्यंत्र  सन्दर्भ श्रेणी:भारतीय सिख श्रेणी:पंजाबी लोग श्रेणी:भारतीय क्रांतिकारी श्रेणी:ग़दर पार्टी