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411 समाचार
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पराग्वे युद्ध

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पैराग्वे का युद्ध या सन् 1864 से 1870 तक पैराग्वे तथा त्रिराष्ट्रीय मैत्री (ब्राजील, अर्जेंटीना और उरुग्वे) के बीच लड़ा गया। इसे त्रिगुटीय संधि का युद्ध भी कहा जाता है। यह युद्ध लैटिन अमेरिकी इतिहास का सबसे विनाशकारी और रक्तरंजित संघर्ष था, जिसमें लगभग 400,000 लोग मारे गए।संख्यात्मक दावे के लिए स्रोत आवश्यक इस युद्ध ने दक्षिण अमेरिका के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव छोड़ा। पैराग्वे का युद्ध लैटिन अमेरिकी संघर्ष 1864–1870 पैराग्वे, ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे त्रिगुटीय गठबंधन की विजय; पैराग्वे की भारी जनहानि पैराग्वे ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे फ्रांसिस्को सोलानो लोपेज़ पेड्रो II, बार्टोलोम मितरे, वेनैंसियो फ्लोरेस 70,000 सैनिक 150,000 सैनिक 300,000+ मारे गए 100,000+ मारे गए पृष्ठभूमि 19वीं सदी में लैटिन अमेरिका में स्वतंत्रता संघर्षों और क्षेत्रीय अस्थिरता का दौर चल रहा था। रियो दे ला प्लाटा क्षेत्र पर स्पेन और पुर्तगाल के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। सन् 1750 की मैड्रिड संधि के तहत इस क्षेत्र की सीमाएँ निर्धारित की गईं, लेकिन यह क्षेत्र लगातार तनाव का केंद्र बना रहा।Herrera José María Paraguayan War (1864–1870) 2011 https://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/9781444338232.wbeow472 The Encyclopedia of War John Wiley & Sons, Ltd en 10.1002/9781444338232.wbeow472 978-1-4443-3823-2 2025-01-19 सन् 1816 में, पुर्तगाल के राजा जोआओ षष्टम ने बांदा ओरिएंटल (वर्तमान उरुग्वे) पर कब्जा कर लिया। ब्राजील की स्वतंत्रता के बाद, यह क्षेत्र ब्राजील और अर्जेंटीना के बीच विवाद का कारण बना। 1828 की मोंटेवीडियो संधि ने उरुग्वे की स्वतंत्रता सुनिश्चित की, लेकिन ब्राजील ने इस क्षेत्र पर अपना प्रभाव बनाए रखा।https://www.britannica.com/place/Paraguay/War-of-the-Triple-Alliance Paraguay - War, Triple Alliance, Conflict Britannica 2025-01-10 www.britannica.com en 2025-01-19 युद्ध की शुरुआत 1863 में उरुग्वे में ब्राजील समर्थित वेनैंसियो फ्लोरेस ने ब्लैंको सरकार के खिलाफ विद्रोह किया। 1864 में ब्राजील ने उरुग्वे में हस्तक्षेप किया, और सोलानो लोपेज़ ने ब्राजील को पीछे हटने का अल्टीमेटम दिया। जब ब्राजील ने इसे नज़रअंदाज़ किया, तो पैराग्वे ने ब्राजील के माटो ग्रोसो प्रांत पर हमला कर दिया। 1865 में पैराग्वे ने अर्जेंटीना के कोरिएंटेस प्रांत पर भी हमला किया, जब अर्जेंटीना ने पैराग्वे को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद, ब्राजील, अर्जेंटीना और उरुग्वे ने त्रिगुटीय संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें पैराग्वे के "तानाशाह" सोलानो लोपेज़ को हटाने और पैराग्वे की स्वतंत्रता बनाए रखने का संकल्प लिया गया। मुख्य घटनाएँ त्रिगुटीय गठबंधन ने पैराग्वे के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया। रियाचुएलो की नौसैनिक लड़ाई में ब्राजील ने पैराग्वे की नौसेना को नष्ट कर दिया। यताय और उरुगुआइआना की लड़ाइयों में गठबंधन की सेनाओं ने पैराग्वे को पराजित किया। सन् 1868 में हमाइता का किला गठबंधन के हाथों में चला गया, जिससे पैराग्वे की रक्षा कमजोर हो गई। 1869 में गठबंधन की सेनाएँ पैराग्वे की राजधानी असुनसियोन में प्रवेश कर गईं। इसके बावजूद, सोलानो लोपेज़ ने आत्मसमर्पण से इनकार कर दिया और गुरिल्ला युद्ध छेड़ दिया। युद्ध का अंत और परिणाम 1 मार्च 1870 को सोलानो लोपेज़ को सेरो कोरा की लड़ाई में मार दिया गया, जिससे युद्ध समाप्त हो गया। इसके बाद जून 1870 में पैराग्वे को शांति संधि पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया। इस संधि के तहत पैराग्वे ने ब्राजील और अर्जेंटीना को बड़े क्षेत्र सौंपे। युद्ध में पैराग्वे की जनसंख्या का 60-75% हिस्सा समाप्त हो गया, और इसके 90% पुरुष मारे गए। देश को आर्थिक और जनसांख्यिकीय संकट से उबरने में दशकों लग गए। युद्ध के दीर्घकालिक प्रभाव युद्ध के परिणामस्वरूप ब्राजील दक्षिण अमेरिका की सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनकर उभरा। हालांकि, युद्ध की लंबी अवधि और इसके गंभीर परिणामों ने ब्राजील की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया और दास प्रथा को समाप्त करने की प्रक्रिया तेज की। अर्जेंटीना ने इस युद्ध से राजनीतिक स्थिरता और आंतरिक विकास का लाभ उठाया। इसके बाद "डेजर्ट का विजय अभियान" ने अर्जेंटीना की भूमि का विस्तार किया, जिससे यह सदी के अंत तक लैटिन अमेरिका का सबसे समृद्ध राष्ट्र बन गया। निष्कर्ष पैराग्वे का युद्ध लैटिन अमेरिका के सबसे रक्तरंजित संघर्षों में से एक था। इसने न केवल क्षेत्रीय सीमाओं को परिभाषित किया, बल्कि इसके सामाजिक और राजनीतिक ढांचे को भी बदल दिया। यह युद्ध लैटिन अमेरिकी इतिहास में अस्थिरता और युद्धों के युग का अंत और आधुनिक युग की शुरुआत का प्रतीक बना। सन्दर्भ श्रेणी:अर्जेण्टीना के युद्ध