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भारत के स्वर्णयुग
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विभिन्न ऐतिहासिक समयों को स्वर्णयुग के रूप में वर्णित किया जाता है। इसका आधार दक्षिण एशिया में विभिन्न तरह के निर्माण और विकास से जोड़कर बताया जाता है।
पुरातन काल
गुप्त साम्राज्य
भारत के मध्य साम्राज्य
दाएँ|अंगूठाकार|चन्द्रगुप्त द्वितीय (375–415) के अधीन गुप्त साम्राज्य।
ईस्वी संवंत् के अनुसार चौथी और छठी सदी के काल को भारत का स्वर्णकाल कहा जाता है क्योंकि इस काल में गणित, खगोल विज्ञान, विज्ञान, धर्म और दर्शन के क्षेत्र में यहाँ बहुत उपलब्धियाँ मिली।Building Bridges Among the BRICs, p. 125, Robert Crane, Springer, 2014https://archive.org/details/indiahistory00keay/page/132 India: A history कीय जॉन एटलांटिक मंथली प्रेस 2000 978-0-87113-800-2 132 The great era of all that is deemed classical in Indian literature, art and science was now dawning. It was this of creativity and scholarship, as much as ... political achievements of the Guptas, which would make their age so golden. जॉन कीय इसी समय में शून्य की अवधारणा सहित दशमलव पद्धति का अन्वेषण हुआ।http://www.historybits.com/gupta.htm THE GUPTA EMPIRE OF INDIA 320-720 गुप्त काल के नेतृत्व में स्थापित शांति और समृद्धि ने भारत में वैज्ञानिक और कलात्मक प्रयासों को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया।Gupta Art: A Study from Aesthetic and Canonical Norms Padma Sudhi Galaxy Publications 7-17https://archive.org/details/indiainpictures0000engf India in Pictures Lee Engfer Twenty-First Century Books 2002 9780822503712 registration 6ठी सदी ईस्वी में हूणों ने गुप्त साम्राज्य पर आक्रमण किये जिसे भारत के 'स्वर्ण युग' का समापन माना जाता है; हालाँकि कुछ अन्य इतिहासकारों ने इस वर्गीकरण को विवादित माना है।इतिहासकार द्विजेंद्र नारायण झा के अनुसार इस काल में जातिगत भेद और भी अधिक गहरे तथा कठोर हो गए; क्योंकि समृद्धि और कानून का संरक्षण सामाजिक सोपान के शीर्ष पर बैठे लोगों को प्राप्त हुआ, जबकि निचले तबके के लोगों की स्थिति और भी अधिक दयनीय हो गई।Ancient India in Historical Outline https://archive.org/details/ancientindiainhi0000dnjh झा डीएन मनोहर पब्लिशर्स एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स 2002 978-81-7304-285-0 दिल्ली 149–73 टि॰"इतिहासकार कभी गुप्त काल (लगभग 320–540 ई.) को भारत का 'प्राचीन युग' मानते थे [...] यह भी माना जाता था कि नगरीय संभ्रांत वर्ग के बीच यह भौतिक समृद्धि का काल था [...] मौर्योत्तर और गुप्त-पूर्व काल के अधिक विस्तृत अध्ययनों ने इनमें से कुछ मान्यताओं पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पहले के कुषाण स्तरों से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्य अधिक भौतिक समृद्धि का संकेत देते हैं। ये संकेत इस हद तक की समृद्धि दिखाते हैं कि कुछ इतिहासकार तो गुप्त काल में नगरीय पतन होने का तर्क भी देते हैं।"Pletcher 2011 90 टि॰ प्राचीन भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 1 ईस्वी और 1000 ईस्वी में वैश्विक जीडीपी का क्रमशः 32% और 28% होने का अनुमान था।Contours of the World Economy, 1–2030 AD. Essays in Macro-Economic History https://archive.org/details/contoursofworlde0000madd Angus Maddison Oxford University Press 2007 978-0-19-922721-1 69 इसके अलावा, आम युग की पहली सहस्राब्दी के दौरान, भारतीय आबादी में कुल विश्व की आबादी का लगभग 27.15%–30.3% शामिल था।Contours of the World Economy, 1–2030 AD. Essays in Macro-Economic History https://archive.org/details/contoursofworlde0000madd Angus Maddison Oxford University Press 2007 978-0-19-922721-1 69Building Bridges Among the BRICs, p. 125, Robert Crane, Springer, 2014Raghu Vamsa v 4.60–75
मध्यकाल का उत्तरार्द्ध एवं आधुनिक काल का पूर्वार्द्ध
thumb|ल॰ 1707 ईस्वी में औरंगज़ेब के शासनकाल के दौरान मुग़ल साम्राज्य अपने अधिकतम विस्तार पर था जिसका मानचित्र यहाँ प्रदर्शित है।https://archive.org/details/cu31924022983567/page/n30/mode/1up Historical atlas of India, for the use of high schools, colleges and private students Joppen Charles London; New York: Longmans, Green Cornell University Library map 13
मुग़ल काल
मुग़ल साम्राज्य
मुग़ल साम्राज्य को अक्सर भारत का अंतिम स्वर्ण युग कहा गया है।Emperor Shah Jahan and Building Up the Mughal Empire, 1628–58/66 2016 A Short History of the Mughal Empire http://dx.doi.org/10.5040/9780755604913.ch-008 2024-06-28 I.B.Tauris 978-1-84885-872-5Malieckal Bindu As Good as Gold 2009 The English Renaissance, Orientalism, and the Idea of Asia 131–159 Johanyak Debra https://doi.org/10.1057/9780230106222_7 2024-06-28 New York Palgrave Macmillan US 10.1057/9780230106222_7 978-0-230-10622-2 Lim Walter S. H. subscription
टिप्पणी
टि॰
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
थॉटको पर भारत का भूगोल एवं इतिहास।
गुप्तकाल की कला पर फ्रॅण्टलाइन का लेख (पुरालेखित)
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श्रेणी:ऐतिहासिक युग