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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ऑर्किड

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ऑर्किड 80 0Late Cretaceous – Recent Haeckel Orchidae.jpg Color plate from Ernst Haeckel's de Kunstformen der Natur, 1904 Plantae Angiosperms Monocots Asparagales Orchidaceae Juss.Angiosperm Phylogeny Group 2009 An update of the Angiosperm Phylogeny Group classification for the orders and families of flowering plants: APG III Botanical Journal of the Linnean Society 161 2 105–121 http://www3.interscience.wiley.com/journal/122630309/abstract https://wayback.archive-it.org/all/20170525104318/http://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1111/j.1095-8339.2009.00996.x/abstract yes 25 May 2017 PDF 26 June 2013 10.1111/j.1095-8339.2009.00996.x Orchis' | type_genus_authority = Tourn. ex'' L. Subfamilies Apostasioideae Horaninov Cypripedioideae Kosteletzky Epidendroideae Kosteletzky Orchidoideae Eaton Vanilloideae Szlachetko Orchidaceae.png Distribution range of family Orchidaceae 300px|thumb|right| ऑर्किड के फूल आर्किड, पौधों का एक कुल है जिसके सदस्यों के पुष्प अत्यंत सुंदर और सुगंधयुक्त होते हैं। आर्किडों को ठीक ही पुष्पजगत् में बड़ी प्रतिष्ठा प्राप्त है, क्योंकि इनके रंग रूप में विलक्षण विचित्रता है। और्किड बहुवर्षी बूटों का विशाल समुदाय है, जो प्राय: भूमि पर अथवा दूसरे पेड़ों पर आश्रय ग्रहण कर उगते हैं, या कुकुरमुत्ते के समान मृतभोजी जीवन बिताते हैं। मृतभोजी और्किडों में पर्णहरिम (क्लोरोफ़िल) नही होता। जो और्किड वृक्षों पर होते हैं उनमें बरोहियाँ (वायवीय जड़ें) होती हैं जिनकी बाहरी पर्त में जलशोषक तंतु होते हैं। विस्तृत रेगिस्तानी भागों के अतिरिक्त आर्किड प्राय: संसार के सभी भागों में होते हैं। वैसे ये उष्ण और समोष्ण देशों में अधिक होता हैं। और्किडों की लगभग 450 प्रजातियाँ (जेनरा) और 15,000 जातियाँ (स्पीशीज़) हैं तथा ये सब एक ही कुल (फ़ैमिली) के अंतर्गत हैं। किसी भी समूह के फूल में इतने विविध रूप नहीं हैं जितने और्किडों में। वास्तव में इनके फूल की तथा अन्य भागों के रूपांतरण ने इन्हें इतना भिन्न बना दिया है कि ये साधारण एकदली फूल जैसे लगते ही नहीं हैं। और्किडों के फूल चिरजीवी होने के लिए प्रसिद्ध हैं। यदि परागण न हो तो ये महीने डेढ़ महीने अथवा इससे भी अधिक दिनों तक अम्लान बने रहते हैं, यद्यपि यह समय बहुत कुछ वातावरण पर भी निर्भर है। परागण के पश्चात् फूल तुरंत मुर्झा जाते हैं। और्किडों में बीज अधिक मात्रा में बनते हैं तथा अत्यंत नन्हे होते हैं। प्राय: एक फल से कई हजार बीज उत्पन्न होते हैं और ये इतने हल्के होते हैं कि इनका प्रसारण वायु द्वारा सुगमता से हो जाता है। कुछ और्किडों को छोड़कर प्राय: सभी की जड़ों में कवक (फ़ंगस) होता है जो बिना कोई हानि पहुँचाए तंतुओं में रहता है। इस परिस्थिति का और्किडों के अंकुरण से विशेष संबंध है। ऐसा अनुमान है कि इनके बीज बिना कवक से संपर्क के अंकुरित ही नहीं हो पाते। और्किड की खेती का एक अत्यंत रोचक तथा आवश्यक अंग उनसे संकर पौधे उत्पन्न करना है। और्किडों में कृत्रिम परागण द्वारा सफलता प्राप्त करने के लिए इनके फूलों की रचना का यथार्थ ज्ञान, हस्तलाघव, कौशल तथा धैर्य का होना अत्यंत आवश्यक है। और्किडों का सारा महत्व इनके फूलों की सुंदरता तथा सजधज में है। इनमें से कुछ से, जैसे वैनीला से, एक प्रकार का सार (इत्र) भी प्राप्त होता है जो इनके फलों से निकाला जाता है। भारतवर्ष में आर्किड पहाड़ी प्रदेशों में, जैसे हिमालय, खासी-जयंती पर्वत, पश्चिमी घाट, कोडै कैनाल और नीलगिरि पर्वत पर होते हैं। चित्रदीर्घा बाहरी कड़ियाँ Royal Horticultural Society (RHS) International Orchid Register (with search capability) Watch the first known instance of a cricket as an orchid pollinator, Kew Orchids of Brazil Orchidaceae of Chile, by Chilefloraजून 2020 InternetArchiveBot World Orchid Iconography at the Swiss Orchid Foundation Homepage Orchidaceae in FloraGREIF Flickr - Australian Native Orchids Orchid Conservation Coalition Utopia Orchid Park, Israel Sharon orchids, Israel The North of England Orchid Society founded in 1897 and possibly the oldest orchid society in the World श्रेणी:वनस्पति विज्ञान श्रेणी:फूल *