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चक उपजाति
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चक भारत में पाई जाने वाली हिन्दू खटीक जाति की ही एक उपजाति है।https://m.jagran.com/uttar-pradesh/auraiya-11238128.html घर-घर जाएंगे, मतदाताओं में जागरुकता लाएंगे m.jagran.com जिनको बुंदेलखंड में चिकवा और कानपुर, आगरा, बरेली मंडल में चिक पुकारा जाता था।http://www.bcmbcmw.tn.gov.in/obc/faq/uttarpradesh.pdf बाद में आईपीएस अधिकारी एस एन चक द्वारा चक उपनाम अपनाने के बाद समस्त चिक, चिकवा समुदाय के लोगों ने चक उपनाम अपना लिया।
पुस्तैनी कार्य
चक जाति का पुश्तैनी कार्य मुस्लिम चिक, चिकवा की भांति काटने के लिए बकरा पालना, बेचना, बकरा काट कर मांस, खाल, बेचना रहा है, जिससे सिद्ध होता है कि ये किसी जाति की ही उपजाति नहीं है क्योंकि चक जाति का मुख्य व्यवसाय बकरे का मांस काटने व बेचने से ही सम्बंधित रहा है।
उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक एवं अकादमिक संदर्भ
1931 की भारत की जनगणना (United Provinces - वर्तमान उत्तर प्रदेश) के प्रशासनिक और जनसांख्यिकीय रिकॉर्ड्स के अनुसार 'चिक' और 'चिकवा' का प्रशासनिक वर्गीकरण खटीक श्रेणी के अंतर्गत दर्ज किया गया था।A. C. Turner (1933). Census of India, 1931, Volume XVIII: United Provinces of Agra and Oudh, Part II - Imperial and Provincial Tables. Allahabad: The Superintendent, Printing and Stationery, U.P.
प्रसिद्ध मानवविज्ञानी (Anthropologist) डॉ. गौस अंसारी द्वारा उत्तर प्रदेश के सामाजिक ढांचे पर किए गए अकादमिक शोध ('Muslim Caste in Uttar Pradesh', 1960) के अनुसार, विभिन्न समुदायों का ऐतिहासिक वर्गीकरण और उनकी सामाजिक स्थिति तत्कालीन प्रशासनिक रिपोर्टों और आधिकारिक गजटों पर आधारित थी।Ghaus Ansari (1960). Muslim Caste in Uttar Pradesh: A Study of Culture Contact. Lucknow: The Ethnographic and Folk Culture Society, U.P. (pages 35-51)
संदर्भ
चक जाति का इतिहास
1950 के आस पास इस समाज के तत्कालीन महान समाजसेवी स्वर्गीय भैरव प्रसाद उर्फ महाशय जी ने उपनाम में चिकवा, चिक के बजाय चक लिखने की शुरुआत की।http://www.ncbc.nic.in/user_panel/GazetteResolution.aspx?Value=mPICjsL1aLvxbegUDuc3MN4eB5E3Ecc1drRPAf1qXQ+l0IqIfhjN1xHrf4i2h5g0 National Commission for Backward Classes www.ncbc.nic.in
कानपुर के झींझक कस्बे के निवासी और मैनपुरी में कचहरी में एक वकील के मुंशी श्री ओमप्रकाश, जो कि चक उपजाति (खटीक) के ही थे, ने 8 नवम्बर 1994 को अपनी ओर से व्यक्तिगत हैसियत में आयोग को एक पन्ने का प्रार्थनापत्र दे कर अनुरोध किया कि हम चिकवा, चिक, चक कहलाते हैं और बकरा काटने का काम करते हैं। हमारी तरह जो मुस्लिम बकरे का कार्य करते हैं वे चिकवा, कसाब हैं और पिछड़ी जातियों की सूची में हैं इसलिए उन्हें पिछड़ी जाति के लिए सब लाभ मिलते है लेकिन चूंकि हम पिछड़ी जातियों की सूची में नहीं हैं इसलिए हमें कोई लाभ नही मिल रहा है। श्री ओमप्रकाश ने यह प्रार्थना की कि यूपी की पिछड़ी जातियों की सूची में चक को भी सम्मिलित कर लिया जाए। परन्तु उन्होंने यह नहीं बताया कि हम चक अनुसूचित जाति का लाभ वर्षों से प्राप्त कर रहे हैं।http://edistrict.up.nic.in/GOs/CasteListCentral.pdf संग्रहीत प्रति 18 मई 2019 12 जुलाई 2018 https://web.archive.org/web/20180712181110/http://edistrict.up.nic.in/GOs/CasteListCentral.pdf dead
यूपी की तत्कालीन मायावती सरकार ने 1995 में शासनादेश जारी कर चक को प्रदेश की पिछड़ी जातियों की सूची में सम्मिलित कर लिया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जिलों में वृहत स्तर पर फील्ड सर्वे कराया जिससे यह स्पष्ट हो गया कि चक, चिक और चिकवा एक दूसरे के पर्यायवाची हैं ।
समाज के लोगों ने अनेक बार अधिकारियों को निवेदन दिया है कि इसे पिछड़ी जाति की सूची से बाहर निकाला जाए लेकिन आयोग इसको पिछड़ी सूची से बाहर निकालने के लिए तो तैयार हो गया है लेकिन पुनः अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए सहमति नहीं बन पा रही है।https://www.khatiksamaj.net/chak-samaj-history/ चक उपजाति का इतिहास Khatik Samajअगस्त 2024 InternetArchiveBot
महत्वपूर्ण व्यक्ति
श्री एस एन चक, (उप्र पुलिस महानिदेशक, से.नि.)http://www.khatiksamaj.in/view_profile.php?achiever_id=11 Khatik People KhatikSamaj.in https://web.archive.org/web/20181020085659/http://khatiksamaj.in/view_profile.php?achiever_id=11 20 अक्तूबर 2018 deadhttps://www.oneindia.com/2007/07/31/eight-ips-officers-transferred-in-up-1185946860.html Eight officers transferred in Uttar Pradesh
संदर्भ
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