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ज्ञानश्रीमित्र
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ज्ञानश्रीमित्र (१०वीं-११वीं शताब्दी) एक प्रमाणवादी भारतीय दार्शनिक थे। वे एक कवि, विक्रमशिला के द्वारपण्डित तथा रत्नकीर्ति के गुरु थे। वे साकारवाद के प्रतिपादक थे।
रत्नकीर्ति, अतीश दीपंकर और अद्वयवज्र आदि ने उन्हें अपना गुरु घोषित किया है। हिन्दू, जैन आदि बौद्धेतर सम्प्रदायों के विचारकों में भी उनकी प्रसिद्धि थी। उदयन, माधव और शंकरमिश्र ने उनका उनको उद्धृत किया है।
कृतियाँ
अद्वैतबिन्दु
अभिसमयहृदय
अनेकचिन्तामणि
अनुपलब्धिरहस्य
अपोहप्रकरण
भेदाभेदपरीक्षा
साकारसिद्धिशास्त्र
सर्वशब्दाभावचर्चा
ईश्वरदूषण
कार्यकरणभावसिद्धि
क्षणभङ्गाध्याय
(अध्यार्ध)प्रज्ञापारमिता(नय)शतपञ्चाशिका
साकारसङ्ग्रहसूत्र
सर्वज्ञानसिद्धि
तर्कभाषा
व्याप्तिचर्चा
वृतमालास्तुति
योगीनिर्णय(प्रकरण)
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
ज्ञानश्रीमित्र-निबंधावली
अनुपलब्धिरहस्य
Buddhist Philosophy of Language in India: Jñānaśrīmitra on Exclusion
TRADITIONALISM AND INNOVATION: PHILOSOPHY, EXEGESIS, AND INTELLECTUAL HISTORY IN Jñānaśrīmitra's अपोहप्रकरण
श्रेणी:भारतीय दार्शनिक