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सुमन रावत
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जुलाई 2018
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सुमन रावत
सुमन रावत एक पुर्व भारतीय एथलीट है, जिसे भारत की उडन परी के नाम से भी जाना जाता है। सुमन रावत ने सन 1986 में सियोल में आयोजित एशियाई खेलोंhttps://www.jagranjosh.com/ Jagran Josh: Complete Career Guide for School, College and Job Finder www.jagranjosh.com 2020-04-29 https://web.archive.org/web/20200331065551/https://www.jagranjosh.com/ 31 मार्च 2020 dead में ३००० मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता था। पुर्व भारतीय एथलीट सुमन रावत को अर्जुन पुरस्कारhttps://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 Bharatkosh bharatdiscovery.org hi 2020-04-29 https://web.archive.org/web/20200228021434/https://bharatdiscovery.org/india/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 28 फ़रवरी 2020 dead से भी सम्मानित किया गया है।अंगूठाकार|सुमन रावत को भारत के उडन परी के नाम से भी जाना जाता है, जो एक पूर्व भारतीय एथलीट है, जिसने सियोल में आयोजित ३००० मीटर दौड़ में १९८६ एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था
प्रारंभिक जीवन
सुमन रावत का जन्म हिमाचल प्रदेश में हुआ। उन्होंने पोर्टमोर स्कूल में अध्ययन किया। स्कूल में खेल के प्रति उनको विशेेेष लगाव था। स्कूल के खेेलो में को-को, हॉकी और वॉली बॉल खेलने से उनका खेलों केे प्रति लगाव बढता चला गया। को-को के दौरान उसे कभी पकड़ा नहीं गया था, जिससे उनके शिक्षक को एहसास हुआ कि सुुुमन के पास दौड़ने के लिए एक बड़ी प्रतिभा है।
उसके पास पांच सिब्बलिंग थे, जो सभी खेल में थे।
जीवन परिवर्तन
सुमन रावत का सबसे बड़ा प्रेरक उनके पिताजी थे। उनके पिताजी का निधन सन 1986 में हुआ जिस कारण से उसके लिए यह एक बेहद दुखद साल था। उनका सपना उनके लिए स्वर्ण पदक जीतना था।
अपने पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अपना अधिकांश समय अभ्यास में समर्पित किया।
एक नई शुरुआत
वह हिमाचल से एक बहुत ही रूढ़िवादी परिवार से आती है। उन्हें मादा एथलीटों ने धमकाया क्योंकि उन्होंने कहा था कि हिमाचल से कभी भी कोई पदक जीता नहीं है। उसके बाद उसने एक प्रण लिया कि वह कभी वापस नहीं देखेगी और जीवन में अपने लक्ष्यों को स्वीकार करने के लिए वास्तव में कड़ी मेहनत करेगी।
उपलब्धियाँ
१९८३ में, एक इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी मैच के लिए दो स्वर्ण पदक जीते। इसके अलावा वह अर्जुन पुरस्कार जीतने के लिए आगे बढ़ी। उन्होंने सियोल में आयोजित १९८६ एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता। आगे वह अप्रत्याशित बीमारी के कारण खेल नहीं सकीं।
सन्दर्भ
https://alchetron.com/Suman-Rawat
http://www.divyahimachal.com/2013/04/himachal-sports-girls-shine संग्रहीत प्रति 8 सितंबर 2018 https://web.archive.org/web/20180826022126/http://www.divyahimachal.com/2013/04/himachal-sports-girls-shine/ 26 अगस्त 2018 dead
https://en.wikipedia.org/wiki/Suman_Rawat संग्रहीत प्रति 8 सितंबर 2018 https://web.archive.org/web/20190331132243/https://en.wikipedia.org/wiki/Suman_Rawat 31 मार्च 2019 live
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