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हरिदास सम्प्रदाय
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हरिदास सम्प्रदाय ईश्वर भक्ति तथा भक्ति साहित्य से सम्बन्धित एक संप्रदाय है जिसकी उत्पत्ति भारत के कर्नाटक प्रदेश में मध्वाचार्य के पश्चात हुई। यह सम्प्रदाय मध्ययुगीन भारत के बंगाल और असम जैसे पूर्वी राज्यों में भी फैला।A History of the Dvaita School of Vedānta and Its Literature, 3rd Edition Sharma B. N. Krishnamurti Motilal Banarsidass (2008 Reprint) 2000 978-8120815759 xxxii-xxxiii, 514–516, 539 लगभग छह शताब्दियों की लम्बी अवधि में इस सम्प्रदाय के कई संतों और रहस्यवादियों ने दक्षिण भारत की संस्कृति, सभ्यता, दर्शन और कला पर गहरा प्रभाव डाला।
विजयनगर साम्राज्य के समय के प्रसिद्ध हरिदास
नरहरितीर्थ (१२१४ - १२२१ ई०)
माधवतीर्थ ( १२१५ - १३५० ई०)
अक्षोभ्यतीर्थ
विजयीन्द्रतीर्थ
जयतीर्थ
श्रीपादराय (१४०४ - १५०२ ई०)
व्यासतीर्थ (१४४७ - १५३९ )
पुरन्दरदास (१४८० - १५६४ )
कनकदास (१५०८ - १६०६ )
वादिराजतीथ (१४८० - १६०० )
जगन्नाथदास (१७२७ - १८०९ )
महिपतिदास (१६११ - १६८१ )
प्रसन्नवेङ्कटदास (१६८० -१७५२ )
वेणुगोपालदास (१८वीं शताब्दी )
मोहनदास (१८वीं शताब्दी )
नेक्कर कृष्णदास (१८वीं शताब्दी )
इन्हें भी देखें
हरिदासी सम्प्रदाय या सखी सम्प्रदाय
सन्दर्भ
श्रेणी:कर्णाटक संगीत
श्रेणी:कन्नड़ साहित्य
श्रेणी:कर्नाटक का इतिहास