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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

नीरूबेन अमीन

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Pujya Niruma (cropped).jpg हिंदू अक्रम विज्ञान पूज्य निरूमा भारतीय 1944 12 2 y औरंगाबाद, महाराष्ट्र, भारत 2006 3 19 1944 12 2 y कैंसर दादा भगवान दीपकभाई देसाई दादा भगवान #FFC559 डॉ नीरूबेन अमीन (2 दिसम्बर 1944 – 19 मार्च 2006Renowned Gujarati Spiritual Leader Passes Away https://www.hinduismtoday.com/blogs-news/hindu-press-international/renowned-gujarati-spiritual-leader-passes-away/5819.html हिन्दूज्म टुडे 31 मार्च 2006 en 30 जून 2020 30 जून 2020 https://web.archive.org/web/20200630200048/https://www.hinduismtoday.com/blogs-news/hindu-press-international/renowned-gujarati-spiritual-leader-passes-away/5819.html dead ) एक भारतीय धार्मिक नेता और अक्रम विज्ञान दर्शन की प्रचारक थीं। वह पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ थी। वह अपने अध्ययन के वर्षों के दौरान दादा भगवान की शिष्या बन गईं। दादा भगवान की मृत्यु के उपरांत उन्होंने दादा भगवान फाउंडेशन का नेतृत्व किया।http://eprints.soas.ac.uk/7438/1/Present_Lord_2003.pdf Present Lord: Simandhara Svami and the Akram Vijnan Movement फ़्लुगेल् पीटर The Intimate Other: Love Divine in the Indic Religions ओरिएंट लोंगमैन 2005 9788125028017 किंग अन्ना एस॰ नई दिल्ली 194–243 PDF ब्रोकिंगटन जॉन सम्मेलन की अधिकृत रपट 30 जून 2020 https://web.archive.org/web/20190412074241/https://eprints.soas.ac.uk/7438/1/Present_Lord_2003.pdf 12 अप्रैल 2019 dead डॉ निरुमा ने अध्यात्म पर कई सारी पुस्तकें भी लिखी है। परिचय 1988 में दादा भगवान की मृत्यु के तुरंत बाद, उनका अक्रम विज्ञान आन्दोलन दो गुटों में विभाजित हो गया। एक का नेतृत्व कनुभाई पटेल और जय सच्चिदानंद संघ (दादा भगवान के अधीन स्थापित एक संगठन) ने किया और दुसरे गुट का नेतृत्व नीरूबेन अमीन ने किया। निरुबेन ने अपने कई संगठन बनाए। पहले चेन्नई और अहमदाबाद में दादा भगवान फाउंडेशन ट्रस्ट और बाद में अहमदाबाद में सिमंधर स्वामी आराधना ट्रस्ट और मुंबई में महाविदेह फाउंडेशन की स्थापना की। वह आंदोलन की एक लोकप्रिय नेता बन गईं और उन्हें 1999 से उनके अनुयायियों द्वारा निरूमाँ के रूप में संबोधित किया जाने लगा।Wiley क्रिस्टी एल॰ The A to Z of Jainism https://books.google.com/books?id=cIhCCwAAQBAJ&pg=PA31 17 जून 2009 स्केयरक्रो प्रेस 978-0-8108-6337-8 167–168 30 जून 2020 https://web.archive.org/web/20170322025235/https://books.google.com/books?id=cIhCCwAAQBAJ&pg=PA31 22 मार्च 2017 live नीरुबेन ने दादा भगवान के प्रवचनों को प्रकाशित करके, ज्ञानविद्धि को औपचारिक रूप देते हुए, मंदिरों का निर्माण कर आन्दोलन को अधिक व्यवस्थित रूप दिया। 2002 में, उन्होंने गांधीनगर में त्रिमंदिर नामक मंदिर परिसर का उद्घाटन किया, जो उनके मार्गदर्शन और देखरेख में बनाया गया था। मंदिर में सिमंधर स्वामी, शिव और कृष्ण की मूर्तियाँ हैं। उन्होंने सिमंधर सिटी की स्थापना भी की। 19 मार्च 2006 को पेट के कैंसर के कारण नीरुबेन अमीन की मृत्यु हो गई।.Renowned Spiritual Exponent Dr. Niruben Passes Away जैन समाज डॉट ओर्ग 16 अप्रैल 2006 http://jainsamaj.org/magazines/ahimsatimesshow.php?id=98 21 मार्च 2017 https://web.archive.org/web/20160807033042/http://www.jainsamaj.org/magazines/ahimsatimesshow.php?id=98 7 जुलाई 2020 dead उनका स्मारक (समाधि) त्रिमंदिर परिसर में बनाया गया है। इन्हें भी देखें अक्रम विज्ञान आन्दोलन सन्दर्भ श्रेणी:आध्यात्मिक गुरु श्रेणी:गुरु श्रेणी:गुजरात के लोग श्रेणी:महाराष्ट्र के लोग श्रेणी:1944 में जन्मे लोग श्रेणी:२००६ में निधन