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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

कृष्णा सोबती

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कृष्णा सोबती Krishna Sobti photo.png 1925 2 18 गुजरात (सम्बद्ध भाग अब पाकिस्तान में) y 2019 01 25 1925 2 18https://www.amarujala.com/kavya/halchal/krishna-sobti-dies-at-94 संग्रहीत प्रति 25 जनवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190125143857/https://www.amarujala.com/kavya/halchal/krishna-sobti-dies-at-94 25 जनवरी 2019 live आख्यायिका-लेखन भारतीय मित्रो मरजानी, ज़िन्दगीनामा, समय सरगम आदि 1999: कछा चुडामणी पुरस्कार1981: शिरोमणी पुरस्कार1982: हिन्दी अकादमी अवार्ड2000-2001: शलाका पुरस्कार 1980: साहित्य अकादमी पुरस्कार1996: साहित्य अकादमी फेलोशिप 2017 : ज्ञानपीठ पुरस्कार (भारतीय साहित्य का सर्वोच्च सम्मान ) कृष्णा सोबती (१८ फ़रवरी १९२५- २५ जनवरी २०१९ ) (सम्बद्ध भाग अब पाकिस्तान में) मुख्यतः हिन्दी की आख्यायिका (फिक्शन) लेखिका थी । उन्हें १९८० में साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा १९९६ में साहित्य अकादमी अध्येतावृत्ति से सम्मानित किया गया था। अपनी बेलाग कथात्मक अभिव्यक्ति और सौष्ठवपूर्ण रचनात्मकता के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हिंदी की कथा भाषा को विलक्षण ताज़गी़ दी है। उनके भाषा संस्कार के घनत्व, जीवन्त प्रांजलता और संप्रेषण ने हमारे समय के कई पेचीदा सत्य को उजागर किया हैं। जीवन परिचय कृष्णा सोबती का जन्म गुजरात में 18 फरवरी 1925 को हुआ था। भारत के विभाजन के बाद गुजरात का वह हिस्सा पाकिस्तान में चला गया है। विभाजन के बाद वे दिल्ली में आकर बस गयीं और तब से यहीं रहकर साहित्य-सेवा कर रही हैं। उन्हें 1980 में 'ज़िन्दगीनामा' के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था। 1996 में उन्हें साहित्य अकादमी का फेलो बनाया गया जो अकादमी का सर्वोच्च सम्मान है। 2017 में इन्हें भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान "ज्ञानपीठ पुरस्कार" से सम्मानित किया गया है। ये मुख्यतः गद्य लेखिका हैं। इनकी कहानियाँ 'बादलों के घेरे' नामक संग्रह में संकलित हैं। इन कहानियों के अतिरिक्त इन्होंने आख्यायिका (फिक्शन) की एक विशिष्ट शैली के रूप में विशेष प्रकार की लंबी कहानियों का सृजन किया है जो औपन्यासिक प्रभाव उत्पन्न करती हैं। ऐ लड़की, डार से बिछुड़ी, यारों के यार, तिन पहाड़ जैसी कथाकृतियाँ अपने इस विशिष्ट आकार प्रकार के कारण उपन्यास के रूप में प्रकाशित भी हैं। इनका निधन 25 जनवरी 2019 को एक लम्बी बिमारी के बाद सुबह साढ़े आठ बजे एक निजी अस्पताल में हो गया।हिंदी की मशहूर लेखिका कृष्णा सोबती नहीं रहीं, 93 साल की उम्र में निधन https://www.bhaskar.com/national/news/hindi-writer-krishna-sobti-pass-away-01481444.html?ref=ht 25 जनवरी 2019 दैनिक भास्कर २०१९ https://web.archive.org/web/20190125130937/https://www.bhaskar.com/national/news/hindi-writer-krishna-sobti-pass-away-01481444.html?ref=ht 25 जनवरी 2019 live प्रकाशित कृतियाँ कहानी संग्रह- बादलों के घेरे - 1980 लम्बी कहानी (आख्यायिका/उपन्यासिका)- डार से बिछुड़ी -1958 मित्रो मरजानी -1967 यारों के यार -1968 ऐ लड़की -1991 सिक्का बदल गया मेरी माँ कहा है जैनी मेहरबान सिंह -2007 (चल-चित्रीय पटकथा; 'मित्रो मरजानी' की रचना के बाद ही रचित, परन्तु चार दशक बाद 2007 में प्रकाशित) उपन्यास- सूरजमुखी अँधेरे के -1972 ज़िन्दगी़नामा -1979 दिलोदानिश -1993 समय सरगम -2000 गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान -2017 (निजी जीवन को स्पर्श करती औपन्यासिक रचना) विचार-संवाद-संस्मरण- हम हशमत (तीन भागों में) सोबती एक सोहबत शब्दों के आलोक में सोबती वैद संवाद मुक्तिबोध : एक व्यक्तित्व सही की तलाश में -2017 लेखक का जनतंत्र -2018 मार्फ़त दिल्ली -2018 यात्रा-आख्यान- बुद्ध का कमण्डल : लद्दाख़ सम्मान एवं पुरस्कार साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता समेत कई राष्ट्रीय पुरस्कारों और अलंकरणों से शोभित कृष्णा सोबती ने पाठक को निज के प्रति सचेत और समाज के प्रति चैतन्य किया है। आपको हिंदी अकादमी, दिल्ली की ओर से वर्ष २०००-२००१ के शलाका सम्मान से सम्मानित किया गया था। उन्हें वर्ष २०१७ का ५३वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा हुई है।http://www.livehindustan.com/national/story-hindi-writer-krishna-sobti-will-get-jnanpith-award-for-the-year-2017-1625196.html हिन्दी लेखिका कृष्णा सोबती को मिलेगा साल 2017 का ज्ञानपीठ पुरस्कार 4 नवंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171103122553/http://www.livehindustan.com/national/story-hindi-writer-krishna-sobti-will-get-jnanpith-award-for-the-year-2017-1625196.html 3 नवंबर 2017 dead सन्दर्भ इन्हें भी देखें हिन्दी गद्यकार बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी भाषा के साहित्यकार श्रेणी:हिन्दी गद्यकार श्रेणी:शलाका सम्मान श्रेणी:साहित्य अकादमी फ़ैलोशिप से सम्मानित‎ श्रेणी:ज्ञानपीठ सम्मानित श्रेणी:२०१९ में निधन