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अणिमा
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अणिमा 150px मुखपृष्ठ हिंदी भारत साहित्य कविता संग्रह
अणिमा भारत के महान हिन्दी कवि और रचनाकार पण्डित सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की एक काव्य रचना है।Great Personalities महान व्यक्तित्व https://books.google.co.in/books?id=UBSlBQAAQBAJ उपकार प्रकाशन प्रो॰ आर॰पी॰ चतुर्वेदी २०१० 9788174820617 ४३ अंग्रेज़ी 5 फ़रवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150205212307/https://books.google.co.in/books?id=UBSlBQAAQBAJ 5 फ़रवरी 2015 live अणिमा नामक, 1943 में प्रकाशितThe Indian millennium, AD 1000-2000 भारतीय सहस्त्राब्दी, ई॰ १०००-२००० https://books.google.co.in/books?id=sghuAAAAMAAJ गोपा सभर्वाल पेंगुइन बुक्स (मूल प्रकाशक: यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन) २००० ५४८ 9780140295214 अंग्रेज़ी 5 फ़रवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150205221726/https://books.google.co.in/books?id=sghuAAAAMAAJ 5 फ़रवरी 2015 live निराला रचनावली (भाग-2) https://web.archive.org/web/20150118230355/https://books.google.co.in/books?id=NIHkdZXOItsC&lpg=PA12&ots=yLJAzMYinq&dq=%E0%A4%85%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE&pg=PA12#v=onepage&q=%E0%A4%85%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE&f=false 18 जनवरी 2015 , पृष्ठ- 12 इस कविता संग्रह http://pustak.org:5200/bs/home.php?bookid=2404 सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की पुस्तकें जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150118212821/http://pustak.org:5200/bs/home.php?bookid=2404 18 जनवरी 2015 dead में निम्नलिखित कविताएं संकलित हैं:
नूपुर के सुर मन्द रहे बादल छाये
जन-जन के जीवन के सुन्दर
उन चरणों में मुझे दो शरण
सुन्दर हे, सुन्दर
दलित जन पर करो
भाव जो छलके पदों पर
धूलि में तुम मुझे भर दो
तुम्हें चाहता वह भी सुन्दर
मैं बैठा था पथ पर
मैं अकेला
स्नेह-निर्झर बह गया है
अणिमा निराला के इससे पहले की काव्य रचनाओं से कुछ अलग स्वर में विरचित कृति है जैसे कवि का अपने पहले के विचारों से मोहभंग हो रहा हो।हिन्दी स्वछंदवादी काव्य https://web.archive.org/web/20150118222732/https://books.google.co.in/books?id=Mx6g7CpXJUgC&lpg=PA219&ots=S8E9SPa1pk&dq=%E0%A4%85%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE&pg=PA219#v=onepage&q=%E0%A4%85%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE&f=false 18 जनवरी 2015 , अब्दुल बिस्मिल्लाह, पृष्ठ- 219 "स्नेह निर्झर बह गया है" नामक कविता के शुरूआती अंश निम्नवत हैं:
"स्नेह निर्झर बह गया है
रेत ज्यों तन रह गया है
आम की यह डाल जो सूखी दिखी
कह रही है - अब यहाँ पिक या शिखी
नहीं आते, पंक्ति मैं वह हूँ लिखी
नहीं जिसका अर्थ
----जीवन दह गया है"हिन्दी स्वछंदवादी काव्य https://web.archive.org/web/20150118222745/https://books.google.co.in/books?id=Mx6g7CpXJUgC&lpg=PA219&ots=S8E9SPa1pk&dq=%E0%A4%85%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE&pg=PA220#v=onepage&q=%E0%A4%85%E0%A4%A3%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A4%BE%20%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%BE&f=false 18 जनवरी 2015 , अब्दुल बिस्मिल्लाह, पृष्ठ- 220
सन्दर्भ