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पाण्डु राजार ढिबि
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पाण्डु राजार ढिबि 23 34 19 N 87 38 59 E region:BD_type:landmark_dim:10000 inline,title पश्चिम बंगाल, भारत 1600 ईसा पूर्व या उससे पहले
भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्द्धमान जनपद के सदर उत्तर अनुमण्डल में स्थित आउसग्राम-द्वितीय विकासखण्ड की अजय नद की घाटी में 'पाण्डु राजार ढिबि'https://thedailyguardian.com/pandu-rajar-dhibi-revisiting-a-forgotten-past-of-bengal/ PANDU RAJAR DHIBI: REVISITING A FORGOTTEN PAST OF BENGAL The Daily Guardian 4 सितंबर 2026 14 दिसंबर 2024 https://web.archive.org/web/20241214192402/https://thedailyguardian.com/pandu-rajar-dhibi-revisiting-a-forgotten-past-of-bengal/ dead एक पुरातात्विक स्थल है। यह पश्चिम बंगाल में अन्वेषित प्रथम ताम्रपाषाणिक स्थल था। इसका उत्खनन पुरातत्वविद् परेशचन्द्र दाशगुप्त के नेतृत्व वाले एक दल द्वारा किया गया था। जनसामान्य की यह मान्यता है कि 'पाण्डु राजार ढिबि' का मुख्य टीला महाकाव्य महाभारत में वर्णित राजा पाण्डु से सम्बद्ध है, अतः लोकश्रुति के आधार पर ही यह नामकरण हुआ।Chattopadhyay, Akkori, Bardhaman Jelar Itihas O Lok Sanskriti (History and Folklore of Bardhaman District.), bn, Vol I, pp. 125-130, Radical Impression. 81-85459-36-3Banglapedia: National Encyclopedia of Bangladesh Mukherjee Shyam Chand Asiatic Society of Bangladesh 2012 Islam Sirajul Sirajul Islam Second Pandu Rajar Dhibi Jamal Ahmed A. https://en.banglapedia.org/index.php?title=Pandu_Rajar_Dhibi
भूगोल
450 400 10 23 23 11 N 87 45 0 E right पूर्व बर्द्धमान जनपद के बर्द्धमान सदर उत्तर अनुमण्डल के नगर एवं शहर
M: नगरपालिका नगर/कस्बा, CT: जनगणना नगर, R: ग्रामीण/नगरीय केन्द्र, H: ऐतिहासिक स्थल, W: जल परियोजना, C: हस्तशिल्प केन्द्र
लघु मानचित्र में स्थान की सीमाबद्धता के कारण, विस्तृत मानचित्र में वास्तविक स्थिति में किंचित् भिन्नता हो सकती है 23 14 0 N 87 52 0 E right बर्द्धमान M बर्द्धमान (M) #800000 13 13 l-circle #800000 white 2 23 30 0 N 87 45 0 E right गुसकरा M गुसकरा (M) 23 15 12 N 87 50 19 E left गोदा CT गोदा (CT) #A40000 23 16 6 N 87 52 21 E left बहिर सर्वमंगला CT बहिर सर्वमंगला (CT) #A40000 23 17 4 N 87 52 54 E left मिर्जापुर CT मिर्जापुर (CT) #A40000 23 15 10 N 87 53 30 E right नारी CT नारी (CT) #A40000 23 13 6 N 87 55 0 E right गंगपुर CT गंगपुर (CT) #A40000 23 25 25 N 87 32 33 E left रायपुर CT रायपुर (CT) 23 24 30 N 87 32 50 E right बुद बुद CT बुद बुद (CT) #A40000 23 23 30 N 87 32 50 E right सुकदाल CT सुकदाल (CT) #A40000 23 27 7 N 87 33 10 E left मानकर R मानकर (R) #C42222 23 30 56 N 87 39 42 E right आउसग्राम R आउसग्राम (R) #C42222 23 25 11 N 87 55 0 E left भटार R भटार (R) #C42222 23 20 43 N 87 41 8 E left गालसी R गालसी (R) #C42222 23 26 20 N 87 35 1 E left अमरागढ़ R अमरागढ़ (R) #C42222 23 18 33 N 87 52 14 E left कामनारा R कामनारा (R) #C42222 23 11 19 N 87 58 12 E left बारशूल R बारशूल (R) #C42222 23 15 45 N 87 58 42 E top हाटगोविन्दपुर R हाटगोविन्दपुर (R) #C42222 23 32 30 N 87 37 23 E left बननवाग्राम R बननवाग्राम (R) #C42222 23 22 16 N 87 37 39 E left पुरषा R पुरषा (R) #C42222 23 20 15 N 87 58 47 E left कुरमुन R कुरमुन (R) #C42222 23 26 7 N 87 36 9 E right जामताड़ा R जामताड़ा (R) #C42222 23 17 39 N 87 38 47 E left आद्राहाटी R आद्राहाटी (R) #C42222 23 34 19 N 87 38 59 E left पाण्डु राजार ढिबि H पाण्डु राजार ढिबि (H) black 13 black 23 22 8 N 87 28 15 E right रणडीहा W रणडीहा (H) #AA6666 23 27 51 N 87 42 1 E right द्वारियापुर C द्वारियापुर (C) #AA6666 23 12 16 N 87 57 36 E left शक्तिगढ़ R शक्तिगढ़ (R) #C42222 23 11 11 N 88 0 57 E top पालसित R पालसित (R) #C42222 23.2722 87.5665 दामोदर नद #77A1CB 45 top 10 0 none 23.5661 87.8404 अजय नद #77A1CB 0 right 10 0 none
अवस्थिति
यह अजय नद के दक्षिणी तट के समीप स्थित है तथा राजपोतडाँगा एवं पाण्डुक ग्रामों के निकट उत्खनन कार्य किया गया है।
उत्खनन
thumb|पाण्डु राजार ढिबि में उत्खनित एक स्थल।
इस स्थल का सर्वप्रथम उत्खनन १९५४-५७ में परेशचन्द्र दाशगुप्त द्वारा किया गया था। यद्यपि पाण्डु राजार ढिबि अन्वेषित प्रथम ताम्रपाषाणिक अथवा ताम्रयुगीन स्थल था, तथापि बीरभूम, बर्द्धमान, बांकुड़ा एवं मेदिनीपुर जनपदों में विस्तृत तथा ब्राह्मणी, मयूराक्षी, कोपाई, अजय, कुनूर, दामोदर, द्वारकेश्वर, शिलावती एवं रूपनारायण नदियों व नदों के प्रवाह-क्षेत्र में स्थित अनेक अन्य स्थलों का भी अन्वेषण हुआ। तत्पश्चात् १९६२ से ६३ में पश्चिम बंगाल के पुरातत्व विभाग द्वारा बीरभूम एवं बर्द्धमान जनपदों में अजय, कुनूर तथा कोपाई के कतिपय क्षेत्रों का उत्खनन किया गया। इस उत्खनन के माध्यम से पुरातत्वविदों को १५०० ईसा पूर्व में विद्यमान प्राचीन सभ्यताओं के अनेक तत्त्व प्राप्त हुए। एक नद के दक्षिणी तट के निकट स्थित इस उत्खनित स्थल का मूल नाम 'राजार ढिबि' था, क्योंकि विद्वानों ने इसके मुख्य टीले को महाभारत में वर्णित "पाण्डु राजा" से सम्बद्ध पाया।
इसके दो मुख्य कालखण्ड थे — लगभग १६०० ईसा पूर्व से ७५० ईसा पूर्व तक का ताम्रपाषाण काल, तथा लौह युग।
जनसमुदाय एवं उनकी संस्कृति
पाण्डु संस्कृति
बंगाल की ताम्रपाषाणिक संस्कृति के शिल्पकारों के विषय में हम अनभिज्ञ हैं। कंकालीय अवशेषों (१४ — पुरुष, स्त्री एवं बालक) के परीक्षण से प्रतीत होता है कि वे दीर्घशिरस्क थे तथा उनकी शारीरिक ऊँचाई मध्यम से उच्च थी।
ताम्रपाषाणिक बंगाल में सम्भवतः जीवन्त सामुद्रिक व्यापार प्रचलित था, किन्तु इसके पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। निश्चित रूप से, उस समय अजय नद तथा भागीरथी नदी में मिलने वाली उसकी सहायक नदियाँ नौगम्य थीं। पाण्डु राजार ढिबि के उत्खनन से ताम्रपाषाणिक संस्कृति के क्रमिक विकास तथा लौह-प्रयोगकर्ता जनसमुदाय द्वारा इसके प्रतिस्थापन के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। तृतीय कालखण्ड में एक भीषण अग्निकाण्ड के साक्ष्य मिलते हैं, जिसे संक्रमण काल माना जा सकता है। इस संक्रमण के कारण सम्भवतः ताम्रपाषाणिक संस्कृति का अवसान हुआ तथा लौह युग का प्रादुर्भाव हुआ।
महत्त्व
पाण्डु राजार ढिबि का उत्खनन बंगाली जनसमुदाय के उद्भव पर प्रकाश डालता है। पूर्वी भारत की इस ताम्रयुगीन सभ्यता का सम्बन्ध क्रीत तथा भूमध्यसागरीय प्रदेशों जैसे सुदूर भूभागों से भी था। वे प्रधानतः समुद्रगामी जनसमुदाय थे।Majumdar R.C. History of Ancient Bengal https://archive.org/details/dli.bengal.10689.13287 1971 23
संदर्भ