411 REFERENCE · Wikipedia
शिल्प (साहित्य)
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
'शिल्प' का शाब्दिक अर्थ है निर्माण अथवा गढ़न के तत्व। किसी साहित्यिक कृति के संदर्भ में 'शिल्प' की दृष्टि से मूल्यांकन का बड़ा महत्व है।
शिल्प के अंतर्गत निम्न छः बिन्दुओं की चर्चा की जाती है:
कथावस्तु
कथानक-कथानक का अर्थ है वह ढांचा जो घटनाओ, चरित्रों तथा वर्णनों को आपस में बाँधता है।यह अंग्रेजी शब्द 'प्लॉट' का हिंदी अनुवाद है।
एक अच्छे कथानक की पहचान यह है कि उसमें 'अनुपात'और 'गति' उचित हो।
अच्छे कथानक का एक विशेष गुण होता है-'संबंध निर्वाह'
कथा
चरित्रचित्रण
नायक के विभिन्न प्रकार
धीरोदात्त, धीर ललित, धीर शांत या धीरोद्धतhttp://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%95 संग्रहीत प्रति 28 अक्तूबर 2009 https://web.archive.org/web/20090929002650/http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%9F%E0%A4%95 29 सितंबर 2009 live
नरेन्द्र कोहली के उपन्यासों में सभी प्रकार के नायक वर्तमान हैं। 'अभ्युदय' के श्रीराम 'धीरोदात्त नायक' हैं। महासमर के युधिष्ठिर धीर-शांत नायक हैं। 'वसुदेव' में वसुदेव 'धीरोद्धत' नायक हैं।
और महासमर के महानायक श्रीकृष्ण तो प्रसंगवश सभी भूमिकाओं में अवतरित होते हैं। गीता का उपदेश देते समय वे धीर-शांत भी हैं और 'धीर-अद्भुत' भी, दुर्योधन की राजसभा में; कंस, शिशुपाल, जरासंध एवं द्रोणादि के वध में वे धीरोद्धत हैं; युधिष्ठिर के राजसूय में ऋषियों के चरण धोते समय, द्रौपदी की मान-रक्षा के समय, सुदामा के स्वागत एवं गुरु सांदीपनि की गुरुदक्षिणा इत्यादि के समय वे धीरोदात्त हैं एवं गोपियों एवं रूक्मिणी-सत्यभामा आदि के प्रसंग में वे धीर-ललित नायक की भूमिका का सर्वोत्तम निर्वाह करते हैं। उनके इन रूपों का सम्यक् चित्रण महासमर में जिस दक्षता से नरेन्द्र कोहली ने किया है, वह हिन्दी में बस उन्हीं की कलम से संभव था।
चरित्र-वैविध्य
पात्रों की संख्या
पात्रों का चरित्र-विस्तार
संवाद
नरेन्द्र कोहली के उपन्यासों में संवाद अत्यंत सशक्त हैं। कथाकार उनके माध्यम से कथा को भी आगे बढाता है, पात्रों के चरित्र का उद्घाटन भी करता है, उनके प्रत्युत्पन्नमतित्व से रोचकता भी बनाए रखता है एवं देश-काल का चित्रण भी करता चलता है। संपूर्ण महासमर, तोड़ो, कारा तोड़ो, वसुदेव एवं अभ्युदय इनके उत्तम उदाहरणों से भरे पड़े हैं।
समय एवं अनुभव के साथ नरेन्द्र कोहली की लेखनी का विकास भी हुआ है। यह विकास कई स्तरों पर है। उनकी संवाद शैली में भी यहाँ दृष्टिगोचर होता है। निम्न उदाहरण दृष्टव्य हैं :
रोचकता
मुनि शालिहोत्र के आश्रम में वेदव्यास-युधिष्ठिर संवाद (सार्वजनिक चर्चा में संकेतों के माध्यम से गूढ़-सन्देश का चतुराईपूर्वक आदान-प्रदान) महासमर-३ (कर्म) (पृ. १९८-२०१) (अध्याय १७) {महर्षि वेद-व्यास उच्च स्थान पर...आपकी आज्ञा का पालन होगा.}, वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली।
दूत बनकर कृष्ण के हस्तिनापुर जाते समय द्रौपदी का एकालाप (मोनोलॉग) नरेन्द्र कोहली; महासमर-७ (प्रत्यक्ष), पृ. -, अध्याय-, वाणी प्रकाशन.
प्रत्युत्पन्नमतित्व (हाजिरजवाबी)
युधिष्ठिर के युवराज्याभिषेक के लिये दबाव डालते हुए धृतराष्ट्र-अक्रूर संवाद : महासमर -२ (अधिकार) महासमर -२ (अधिकार), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली।
संवादों के माध्यम से कथा का विकास
संवादों के माध्यम से चरित्र चित्रण
भीष्म-प्रतिज्ञा के पश्चात् शान्तनु-भीष्म संवाद : महासमर -१ (बन्धन) पृ. .....; अध्याय .. महासमर-१ (बन्धन), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली}
हस्तिनापुर प्रवेश पर प्रथम भेंट के अवसर पर भीष्म-द्रोण संवाद : महासमर -२ (अधिकार) महासमर -२ (अधिकार), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली।
वारणावत में पांडवों के भस्म होने का समाचार पाकर आये वेद-व्यास का धृतराष्ट्र एवं तत्पश्चात् विदुर से संवाद : महासमर-३ (कर्म)
पृ. ११५-१२०; अध्याय १४ {पांडवों के प्रेत-कर्म में ...धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा". महासमर-३ (कर्म), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली।
}
संवादों के माध्यम से पात्र के मनोविज्ञान का चित्रण
दशरथ-भीष्म संवाद एवं भीष्म-प्रतिज्ञा : महासमर -१ (बन्धन) पृ. .....; अध्याय .. महासमर-१ (बन्धन), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली}
पाण्डु के देहांत के पश्चात् सत्यवती को वनगमन के लिये प्रेरित करते समय सत्यवती-व्यास संवाद : महासमर -१ (बन्धन) पृ.---- अध्याय -- महासमर-१ (कर्म), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली
संवादों के माध्यम से शाश्वत आध्यात्मिक सत्यों का चित्रण
हिडिम्ब-वन स्थित आश्रम में मुनि शालिहोत्र-युधिष्ठिर-भीम संवाद महासमर-३ (कर्म)(पृ. १६०-१६४)(अध्याय १७), वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली।
नारी की प्रकृति के सन्दर्भ में कुंती-युधिष्ठिर संवाद नरेन्द्र कोहली; महासमर-३ (कर्म), पृ. -, अध्याय-, वाणी प्रकाशन.
संवादों के माध्यम से देश-काल-परिवेश एवं सामाज का चित्रण
पात्रानुकूलता
पात्र के मानसिक स्तर के अनुरूप संवाद
पात्र एवम देश-काल के अनुरूप भाषा
देश-काल
भाषा-शैली
आधुनिक पाठक के साथ तादात्म्य की शक्ति
प्रतिपाद्य/उद्देश्य
सन्दर्भ
नरेन्द्र कोहली पर लिखी गयी पुस्तकें एवं ग्रन्थ नरेन्द्र कोहली पर लिखी गयी पुस्तकें एवं ग्रन्थ #ccccff -
! Sr. No.
! Title
! Writer
! Year
! Publisher
! Publisher's Address - 1. नरेन्द्र कोहली: व्यक्तित्व और कृतित्व संपादक: नर्मदाप्रसाद उपाध्याय 1985 ई. पराग प्रकाशन 3/114, कर्ण गली, विश्वासनगर, शाहदरा, दिल्ली- 110032 - 3. नरेन्द्र कोहली :चिंतन और सृजन डॉ॰ सतीश पांडेय 2002 ई. प्रज्ञा प्रकाशन ए- 18, संतोषी मां अपार्टमेंट, विट्ठलवाडी, कल्याण (पूर्व) - 421306 - 4. सृजन साधना, (नरेन्द्र कोहली के व्यक्तित्व और चिंतन संबंधी संस्मरण) ईशान महेश 1995 ई. वाणी प्रकाशन 21-ए, दरियागंज, नई दिल्ली- 110002 - 5. पौराणिक उपन्यास: समीक्षात्मक अध्ययन, (नरेन्द्र कोहली के तीन उपन्यासों - 'अभिज्ञान','तोड़ो कारा तोड़ो' तथा 'प्रच्छन्न' का शोधपरक अध्ययन) डॉ॰ हितेन्द्र यादव, डॉ॰ कविता सुरभि, सुनीता सक्सैना 2000 ई. वाणी प्रकाशन 21-ए, दरियागंज, नई दिल्ली/ 110002 - 6. नरेन्द्र कोहली: विचार और व्यंग्य डॉ॰ सुरेश कांत 2000 ई. वाणी प्रकाशन 21-ए, दरियागंज, नई दिल्ली/ 110002 - 7. एक व्यक्ति नरेन्द्र कोहली कार्त्तिकेय कोहली 2000 ई. क्रियेटिव बुक कंपनी ई-4/24 ए, मॉडल टाउन, दिल्ली- 110009 - 8. नरेन्द्र कोहली के राम साहित्य का विशेष अनुशीलन डॉ॰ गिरीशकुमार जोशी 1997 ई. सुप्रिया पब्लिकेशंस सागर (मध्य प्रदेश) - 9. आधुनिक उपन्यास: विविध आयाम डॉ॰ विवेकीराय 1990 ई. अनिल प्रकाशन 189/1, अलोपी बाग, इलाहाबाद- 211006 - 10. समकालीन हिंदी उपन्यास डॉ॰ विवेकीराय 1987 ई. अनिल प्रकाशन 189/1, अलोपी बाग, इलाहाबाद- 211006 - 11. स्वातंत्र्योत्तपर हिंदी व्यंग्य निबंध डॉ॰ शशि मिश्र 1992 ई. संकल्प प्रकाशन मुंबई - 12. नरेन्द्र कोहली ने कहा, (नरेन्द्र कोहली के आत्मकथ्य और उनकी रचनाओं में से विचारपूर्ण सूक्तियों का संचयन) संचयन : ईशान महेश 1997 ई. शुभम् प्रकाशन एन/10, उल्लघनपुर, नवीन शाहदरा, दिल्ली- 110032 - 13. कुछ नरेन्द्र कोहली के विषय में (आत्मकथ्य) 1996 ई. पराग प्रकाशन दिल्ली- 110032 - 14. आधुनिक सांस्कृतिक जीवन के व्याख्याता : नरेन्द्र कोहली (परिचय) 2000 ई. वाणी प्रकाशन 21- ए, दरियागंज, नई दिल्ली- 110002 - 15. नरेन्द्र कोहली - अप्रतिम कथायात्री डॉ॰ विवेकीराय 2003 ई. वाणी प्रकाशन नई दिल्ली - 110002 - 16. नरेन्द्र कोहली की कहानियों में व्यंग्य श्रीमती सुरेश सौंखले पारुल प्रकाशन रघुनाथपुर, कुल्लू - 17. कहानीकार नरेन्द्र कोहली डॉ॰ सुरैया शेख 2006 ई. विनय प्रकाशन 3-ए/ 128 हंसपुरम्, नौबस्ताग, कानपुर - 208021 - 18. अभ्युदय: संवेदना का विकास डॉ॰ कविता सुरभि 2007 ई. धारिका प्रकाशन रोहिणी, दिल्ली - 110085 - 19. रामकथा: कालजयी चेतना डॉ॰(श्रीमती) के.सी.सिंधु 2007 ई. वाणी प्रकाशन नई दिल्ली - 20. नरेन्द्र कोहली और उनके राम-कृष्ण डॉ॰ (श्रीमती) मनोरमा मिश्र 2007 ई. वाणी प्रकाशन नई दिल्ली- 110002 -
इन्हें भी देखें
शिल्पकर्म (Craft)
श्रेणी:साहित्य, आलोचना, समीक्षा, उपन्यास, महाकाव्य