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अनुवाद प्रविधियाँ
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उल्लेखनीयता संधिग्ध विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/अनुवाद प्रविधियाँ==विने एवं दार्बेलने की अनुवाद प्रविधियाँ==
ज़ौं पॉल विने एवं ज़ौं पॉल दार्बेलने अनुवाद अध्ययन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुवाद चिंतक हैं। अनुवाद विद्या को एक विषयानुशासन के रूप में स्थापित करने में इनका विशेष योगदान रहा है। इन्होंने फ्रांसीसी एवं अंग्रेजी के शैलीगत अध्ययन पर कार्य किया है। इनके कार्य को तुलनात्मक भाषा विज्ञान या भाषाओं के व्यतिरेकी अध्ययन का कार्य मानते हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक स्तिलिस्तिक कोपारे यु फ्रांसे ए द लॉग्ले : मेतोद द त्राद्युक्सियों हिंदी अनुवाद- फ्रांसीसी एवं अंग्रेजी का शैलीगत तुलनात्मक व्यतिरेकी अध्ययन : अनुवाद प्रविधि के शीर्षक में साफ-साफ 'अनुवाद प्रविधि' का उल्लेख किया है। यह पुस्तक सन् 1958 में प्रकाशित हुई थी। इन्होंने अपनी पुस्तक में अनुवाद के विभिन्न पक्षों एवं प्रविधियों का दृष्टांतों के साथ विशद वर्णन किया है। इस पुस्तक में अनुवाद की सात प्रविधियों का उल्लेख किया है। अनुवाद कर्म में इन सात प्रविधियों का प्रयोग होता हैं। इन सात प्रविधियों में से प्रथम तीन प्रविधियाँ प्रत्यक्ष अनुवाद (Direct Translation) से संबद्ध हैं एवं शेष चार प्रविधिया परोक्ष अनुवाद (Oblique Translation) के अंतर्गत आती हैं। उनके द्वारा बताई गई अनुवाद की प्रविधियाँ निम्नलिखित हैं:J.C Catford A linguistic theory of Translation 1965 Oxford university press new delhi
आदान
जब हम अनुवाद के दौरान स्रोत भाषा के किसी शब्द को अनुवाद न करके उसे हुबहू उसी तरह से लक्ष्य भाषा में लिख देते हैं या प्रयोग करते हैं, तो इस प्रक्रिया को आदान या आगत शब्दों का प्रयोग या उधारीकरण कहते हैं। इस पक्रिया में मूल भाषा के शब्द का अनुवाद नहीं किया जाता बल्कि उसका लक्ष्य भाषा में केवल लिप्यंतरण किया जाता है और ये शब्द ‘आगत’शब्दों की तरह ही प्रोयोग किए जाता है। यह प्रक्रिया दो स्थितियों में अपनाई जाती है पहली स्थिति में स्रोत भाषा का शब्द लक्ष्य भाषा में चलन एवं प्रयोग में होता है तथा उससे लोग परिचित होते हैं। इस स्थिति में शब्द के अनुवाद की आवश्यकता नहीं होती है, जैसे-कंप्यूटर' (Computer) भी इसी प्रकार का शब्द है, जिसके लिए 'संगणक' शब्द का प्रयोग शब्दकोश में होता है, लेकिन व्यवहार में या प्रचलित शब्द के रूप में कंप्यूटर शब्द का ही प्रचलन है। दूसरी स्थिति में हम इसका तब प्रयोग करते हैं जब इसका कोई समतुल्य शब्द लक्ष्य भाषा में उपलब्ध न हो। इस स्थिति में हम स्रोत भाषा के शब्द को ज्यों का त्यों लक्ष्य भाषा में ले लेते हैं तथा यदि आवश्यक हो तो उसके लिए पाद टिप्पणी का प्रयोग भी करते हैं। उदाहरण के तौर पर हम रेस्तरों' शब्द को लेते हैं जो फ्रांसीसी शब्द का हिंदी में प्रयोग होता है। भारत में यह प्रक्रिया अंग्रेजी एवं हिंदी के मध्य ज्यादा होती है तथा अगर कोई स्रोत भाषा का शब्द लक्ष्य भाषा में बहुत लोकप्रिय हो जाता है तो उसे लक्ष्य भाषा के कोश में शामिल कर लिया जाता है। हिंदी भाषा के कई शब्द अंग्रेजी के शब्दकोश में शामिल हो चुके हैं; जैसे लाठी, साड़ी, लूट, ठग इत्यादि। अंग्रेजी के कई शब्द जैसे- ट्रेन (Train), टिकट (Ticket), बैंक (Bank) आदि हिंदी में शामिल हो चुके हैं।
काल्क
विने एवं दार्बेलने ने इस प्रविधि को ‘एक विशिष्ट प्रकार का आदान’ कहा है। ‘काल्क’ (प्रतिलिपि) शब्द की व्युत्पत्ति फ़्रेंच की Calquer क्रिया से हुई है, जिसका अर्थ ‘डिज़ाइन, मानचित्र आदि की नकल उतारना’ है। इसमें स्रोत भाषा की अभिव्यक्ति ग्रहण करके उसके घटकों का शाब्दिक अनुवाद किया जाता है। जैसे, अंग्रेज़ी के ‘cold war’ को हिंदी में ‘शीत युद्ध’ लिखा जाता है। यहाँ हिंदी समतुल्य में अंग्रेज़ी के शब्दों को यथावत नहीं लेकर ‘cold’ और ‘war’ के शाब्दिक अनुवादों के माध्यम से ‘शीत युद्ध’ समतुल्य प्रस्तुत किया गया है। काल्क के ज़रिए लक्ष्य भाषा में नई अवधारणाएँ शामिल होती हैं। जैसे, बैंकिंग में ‘चालू खाता’ (current account) और ‘बचत खाता’ (savings account) तथा राजनीति में ‘प्रधानमंत्री’ (prime minister) और ‘मुख्यमंत्री’ (chief minister) जैसे समतुल्य काल्क के उदाहरण हैं। समय के साथ ये समतुल्य इतने प्रचलित हो गए हैं कि इन्हें हिंदी में समतुल्य के बजाय मूल हिंदी शब्द माना जाने लगा है। https://newuniversityinexileconsortium.org/wp-content/uploads/2022/07/Week-3-Translation-methods-and-procedures-Vinay-and-Darbelnet-1995-in-Vanuti-2004.pdf
शब्दानुवाद
शब्दानुवाद के अंतर्गत स्रोत भाषा से लक्ष्य भाषा में शब्द स्तर पर अनुवाद किया जाता है। शब्दानुवाद तभी स्वीकार्य है जब अनुवाद करने पर स्रोत भाषा के संदेश के समान ही संदेश लक्ष्य भाषा में भी संप्रेषित हो, अनूदित पाठ का अर्थ मूल पाठ के ही समान हो तथा वह मूल पाठ के समान ही शैली भी बनाए रखे हैं ; जैसे 'whole nine yards' का अनुवाद 'पूरे नौ गज यार्ड' किया जाए तो यह बिल्कुल गलत होगा। यहाँ इसका शाब्दिक या शब्द-प्रति-शब्द अनुवाद न करके इसके अर्थ को लक्ष्य भाषा में अनूदित किया जा सकता है। इस प्रकार, 'whole nine yards' का अनुवाद 'हर चीज' किया जाए तो बेहतर होगा।
प्रतिस्थापन
प्रतिस्थापन की प्रक्रिया में स्रोत भाषा के शब्दों की व्याकरणिक कोटि लक्ष्य भाषा में परिवर्तित हो जाती है. लेकिन उनके अर्थ संप्रेषण में अंतर नहीं आता। यह प्रक्रिया कई बार आवश्यक होती है तो वहीं कई बार वैकल्पिक होती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि व्याकरणिक कोटि परिवर्तन के दो प्रकार हैं:
अनिवार्य स्थानांतरण (Obligatory Transposition)
वैकल्पिक स्थानांतरण (Optional Transposition)
हम यहाँ स्थानांतरण के कुछ उदाहरण देख सकते हैं :As soon as she gets up." का हिंदी में अनुवाद 'जैसे ही वह उठती है' या 'उसके उठने के साथ ही' दोनों ही हो सकता है। यहाँ इसे वैकल्पिक स्थानांतरण कहा जा सकता है।
मॉडुलन
इस प्रक्रिया के अंतर्गत लक्ष्य भाषा में स्रोत भाषा के संदेश को संदर्भ या परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कहने के तरीके या ढंग में बदलाव करके संप्रेषित किया जाता है। उदाहरण के लिए अंग्रेजी के वाक्य He may be right." को हिंदी में 'वह गलत नहीं हो सकता है।' के रूप में अनूदित किया जा सकता है। 'कम गहरा' को 'छिछला' कर दिया जाना, 'कठिन' को 'सरल नहीं' कहना आदि मॉडुलन के ही प्रकार हैं। हम मूल पाठ या स्रोत भाषा में उपस्थित संदेश को लक्ष्य भाषा में अधिक प्रभावशाली एवं स्पष्ट करने के उद्देश्य से इस प्रक्रिया का प्रयोग करते हैं।
समतुल्यता
इस अनुवाद तक्नीक में हम स्रोत भाषा में उपस्थित भाव या अर्थ को लक्ष्य भाषा में संप्रेषित करने के लिए उसी के समानार्थी अभिव्यक्ति का प्रयोग करते हैं। यह शब्दशः अनुवाद न होकर स्रोत भाषा के भाव को लक्ष्य भाषा में संप्रेषित करने पर बल देता है तथा स्रोत भाषा में अभिव्यक्त भाव के समतुल्य ही लक्ष्य भाषा में समानार्थी अभिव्यक्ति को अनुवाद हेतु प्रयोग करता है। यह संभव है कि दो भिन्न भाषाओं में एक ही संदेश को संप्रेषित करने के लिए पूरी तरह से भिन्न अभिव्यक्ति का प्रयोग हो, जैसे अंग्रेजी के 'Ouch!' के लिए हिंदी में 'आहा!' या 'वाह-वाह!' का प्रयोग होता है।
अनुकूलन
अनुकूलन को सांस्कृतिक प्रतिस्थापन या सांस्कृतिक समतुल्यता के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रविधि में यदि स्रोत भाषा का कोई सांस्कृतिक पहलू या तत्व लक्ष्य भाषा में उपस्थित न हो तो इस स्थिति में हम लक्ष्य भाषा की संस्कृति में विद्यमान समतुल्य सांस्कृतिक तत्त्व से उसको संबोधित-संप्रेषित या प्रदर्शित करते हैं। कई बार लक्ष्य भाषा के पाठ को ज्यादा संप्रेषणीय बनाने के उद्देश्य से स्रोत भाषा के सांस्कृतिक तत्त्व, जो लक्ष्य भाषा में ज्यादा प्रचलित न हो, को लक्ष्य भाषा में विद्यमान समतुल्य तत्त्वों से संप्रेषित किया जाता है।
स्रोत
https://translatorsofindia.com/translationprocedures संग्रहीत प्रति 12 अप्रैल 2026 17 अप्रैल 2026 https://web.archive.org/web/20260417032407/https://translatorsofindia.com/translationprocedures dead
https://www.researchgate.net/publication/359090840_zaum_pola_vine_evam_zaum_darbelane_dvara_ullikhita_anuvada_ki_pravidhiyam_Seven_Techniques_of_Translations_by_Jean_Paul_Vinay_and_Jean_Darbelnet