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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

पुरानी चीनी भाषा

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पुरानी चीनी भाषा, जिसे पुराने भाषावैज्ञानिक साहित्य में प्राचीन चीनी भी कहा जाता है, चीनी भाषा का सबसे प्राचीन प्रमाणित ऐतिहासिक रूप है। यह आधुनिक चीनी भाषाओं और उनकी विभिन्न बोलियों की ऐतिहासिक पूर्वज भाषा मानी जाती है। पुरानी चीनी के सबसे पुराने प्रमाण लगभग 1250 ईसा पूर्व के शांग राजवंश के उत्तरार्ध के अस्थि-लेखों में मिलते हैं। इसके बाद झोउ राजवंश के समय कांस्य-पात्रों पर उत्कीर्ण लेखों और साहित्यिक ग्रंथों में इसका व्यापक प्रमाण मिलता है। पुरानी चीनी का प्रयोग सामान्यतः उत्तरवर्ती शांग काल, झोउ राजवंश, वसंत और शरद काल, युद्धरत राज्य काल तथा छिन और हान राजवंशों के आरंभिक काल से संबंधित माना जाता है। इसकी कोई एक निश्चित आरंभ और समाप्ति तिथि सर्वमान्य नहीं है, क्योंकि भाषा में परिवर्तन क्रमिक रूप से हुआ था। हान काल की भाषा को कई बार पुरानी चीनी के उत्तरवर्ती चरण के रूप में देखा जाता है। पुरानी चीनी के अध्ययन का महत्व इसलिए भी है कि इसी से आगे चलकर मध्य चीनी और फिर आधुनिक चीनी की विभिन्न भाषाई किस्मों का विकास हुआ। नाम और वर्गीकरण चीनी में पुरानी चीनी को 上古汉语 (शांगगु हान्यू) कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ ‘प्राचीन चीनी’ है। अंग्रेज़ी में Old Chinese नाम अधिक प्रचलित है, जबकि Archaic Chinese नाम का प्रयोग पुराने भाषावैज्ञानिक साहित्य में अधिक मिलता है। पुरानी चीनी को सामान्यतः साइनो-तिब्बती भाषा परिवार की सिनिटिक शाखा में रखा जाता है। चीनी भाषा और तिब्बती-बर्मी भाषाओं के बीच अनेक संभावित समजात शब्द पाए गए हैं। दूसरी ओर, चीनी और दक्षिण-पूर्वी एशिया की कुछ भाषाओं—जैसे क्रा-दाई, हमोंग-मिएन और वियतिक भाषाओं—के बीच शब्दावली, स्वर-व्यवस्था और अक्षर-संरचना में समानताएँ मिलती हैं। इन समानताओं को मुख्यतः भाषाई क्षेत्रीय संपर्क और पारस्परिक प्रभाव से समझाया जाता है, न कि आवश्यक रूप से समान वंश से। प्रमाण और स्रोत पुरानी चीनी का अध्ययन आधुनिक भाषाओं की तरह किसी प्रत्यक्ष ध्वनि-अभिलेख पर आधारित नहीं है। प्राचीन चीनी लेखन में प्रयुक्त वर्ण मुख्यतः शब्दों को दर्शाते थे और वे सीधे उनके पूरे उच्चारण को दर्ज नहीं करते थे। इसलिए पुरानी चीनी के उच्चारण का पुनर्निर्माण विभिन्न प्रकार के भाषाई और ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर किया जाता है। अस्थि-लेख पुरानी चीनी के सबसे पुराने प्रमाण शांग राजवंश के उत्तरार्ध के ओरेकल बोन अथवा 'अस्थि-लेखों' में मिलते हैं। ये मुख्यतः कछुए के कवच और पशुओं की हड्डियों पर अंकित भविष्यवाणी संबंधी लेख हैं। इनका प्रयोग राजकीय अनुष्ठानों, युद्ध, कृषि, शिकार, मौसम तथा अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं के संबंध में भविष्यवाणी करने के लिए किया जाता था। इन लेखों की भाषा और लिपि पुरानी चीनी के आरंभिक चरण को समझने के लिए विशेष महत्व रखती है। इस काल के लिए वर्णों के ध्वन्यात्मक संबंधों से प्राप्त सूचना पुरानी चीनी के ध्वनि-तंत्र के पुनर्निर्माण का प्रमुख प्रत्यक्ष आधार है। कांस्य-लेख झोउ राजवंश के दौरान कांस्य-पात्रों पर उत्कीर्ण लेखों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इन लेखों में राजकीय आदेश, धार्मिक अनुष्ठान, युद्ध, भूमि या उपाधियों से संबंधित दान तथा वंशावली संबंधी जानकारी मिलती है। कांस्य-लेखों से पुरानी चीनी की शब्दावली, वर्णों के विकास और ध्वनि-संबंधी संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। शांग काल के बाद ध्वन्यात्मक रूप से संबंधित वर्णों की श्रृंखलाएँ भी अधिक व्यापक होती गईं। व्याकरण पुरानी चीनी का व्याकरण आधुनिक मानक चीनी से कई मामलों में भिन्न था। आधुनिक चीनी की तरह इसमें भी शब्द-रूपों में सीमित परिवर्तन दिखाई देता है, लेकिन पुरानी चीनी में व्युत्पत्तिपरक रूपविज्ञान की भूमिका आधुनिक चीनी की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण थी। पुरानी चीनी में एक ही शब्द संदर्भ के अनुसार संज्ञा, क्रिया या अन्य व्याकरणिक भूमिका निभा सकता था। संज्ञाओं का क्रिया के रूप में प्रयोग तथा अकर्मक क्रियाओं का सकर्मक रूप में प्रयोग भी मिलता है। शब्दावली पुरानी चीनी की मूल शब्दावली का एक बड़ा भाग चीनी-तिब्बती भाषाओं से संबंधित माना जाता है। इसके अतिरिक्त पड़ोसी भाषाओं से भी प्राचीन काल में अनेक शब्द चीनी में आए। पुरानी चीनी के आरंभिक काल में एक-अक्षरी और एक-रूपिमीय शब्दों की प्रधानता थी। झोउ काल के दौरान समास और पुनरुक्ति द्वारा बहुअक्षरी शब्दों की संख्या बढ़ने लगी। इसके बावजूद एक-अक्षरी शब्दों का प्रभुत्व बना रहा। संदर्भ William H. Baxter और Laurent Sagart, ''Old Chinese: A New Reconstruction'', Oxford University Press, 2014. William H. Baxter, ''A Handbook of Old Chinese Phonology'', Mouton de Gruyter, 1992. श्रेणी:चीनी भाषा श्रेणी:ऐतिहासिक भाषाविज्ञान